75 हजार साल पहले इंसान ने किया था इंसान का कत्ल, कंधे की हड्डी में घुसा मिला लकड़ी का भाला!

75 हजार साल पहले इंसान ने किया था इंसान का कत्ल, कंधे की हड्डी में घुसा मिला लकड़ी का भाला!


नई दिल्ली: उत्तरी इराकी कुर्दिस्तान में स्थित शनिदार गुफा से पुरातत्वविदों को 75 हजार साल पुरानी निएंडरथल हड्डी मिली है. कंधे की यह हड्डी हिंसा और अपनों के अंतिम संस्कार की एक साथ कहानी बयां करती है. वैज्ञानिकों की जांच में सामने आया है कि इस हड्डी पर किसी दूसरे इंसान द्वारा लकड़ी के भाले से किए गए जानलेवा हमले का सबसे पुराना निशान मौजूद है. यह कंकाल शनिदार गुफा में दफन एक समूह से निकाला गया था. इस कंकाल को शनिदार ए नाम दिया गया है.

निएंडरथल शनिदार ए के कंधे की हड्डी में मिला 15 मिमी का सुराख कैसे बना?

  1. शनिदार ए की कंधे की हड्डी लगभग 8 मीटर ऊंचे मलबे और पत्थरों के नीचे बिल्कुल सुरक्षित दबी हुई मिली थी. पुरातत्वविदों ने जब इस हड्डी की जांच की तो उसमें 15 मिलीमीटर चौड़ा एक गोल सुराख नजर आया.
  2. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की डॉक्टर एम्मा पोमेरॉय के मुताबिक यह सुराख किसी पौधे की जड़ या कीड़े के छेद की वजह से नहीं बना था. मलबे में ऐसा कोई रास्ता नहीं मिला जो किसी जड़ के गुजरने का संकेत देता हो. इसके अलावा यह छेद खुदाई के दौरान हुए किसी नुकसान का नतीजा भी नहीं था.
  3. इस जांच में स्पेनिश नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर ह्यूमन इवोल्यूशन के विशेषज्ञ भी शामिल थे. वैज्ञानिकों ने जब माइक्रोस्कोप और माइक्रोसीटी स्कैन से हड्डी की जांच की तो पाया कि छेद के किनारों पर भरने या ठीक होने का कोई निशान नहीं था.
  4. हड्डी में छेद के चारों ओर दरारें फैली हुई थीं. यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि यह चोट इंसान के जीवित रहते या मौत के ठीक समय लगी थी. हड्डी के टूटने के तरीके से यह भी साफ हुआ कि हथियार शरीर के आगे से घुसकर पीछे की तरफ निकला था.
  5. भाले ने सीने और फेफड़े को चीरते हुए मुख्य धमनियों को काटा और फिर कंधे की हड्डी को तोड़ दिया. इससे निएंडरथल की तुरंत मौत हो गई थी.
शनिदार A के बाएं स्कैपुला (कंधे की हड्डी) की तस्वीर, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के लेवरहल्म सेंटर फॉर ह्यूमन इवोल्यूशनरी स्टडीज में लिया गया है. (Image Credit: University of Cambridge)

वैज्ञानिकों ने यह कैसे साबित किया कि यह जानलेवा हमला लकड़ी के भाले से ही हुआ था?

वैज्ञानिकों ने इस सुराख के आकार और पैटर्न का गहराई से अध्ययन किया. पत्थर की नोक वाले भालों से हड्डियों पर बनने वाले निशान इस छेद से बिल्कुल अलग होते हैं.

  • हड्डी से बने भालों की संभावना भी बेहद कम मानी गई क्योंकि उस दौर में ऐसे हथियार दुर्लभ थे. दूसरी तरफ ब्रिटेन और जर्मनी में 2 लाख से 4 लाख साल पुराने लकड़ी के भाले मिल चुके हैं. उन प्राचीन लकड़ी के भालों का निचला हिस्सा बिल्कुल गोल होता है.
  • हड्डी में बने सुराख का आकार लकड़ी के भाले की गोलाई से पूरी तरह मेल खाता है. हालांकि लकड़ी इतने लंबे समय तक जमीन में सुरक्षित नहीं बच सकती. इसी वजह से गुफा में लकड़ी का कोई टुकड़ा तो नहीं मिला. इसके बावजूद वैज्ञानिकों का कहना है कि उपलब्ध सभी सबूत लकड़ी के भाले की तरफ ही इशारा करते हैं. यह वार सीधे दिल को निशाना बनाकर किया गया जानलेवा हमला था.

गुफा में 2 मीटर ऊंची चट्टान के पीछे 5 कंकालों को एक साथ क्यों दफनाया गया था?

शनिदार गुफा की सबसे दिलचस्प बात वहां शवों को रखने का खास तरीका है. शनिदार ए का कंकाल कम से कम 5 निएंडरथल लोगों के एक समूह का हिस्सा है. इन सभी को गुफा के मुहाने पर मौजूद 2 मीटर ऊंची विशाल चट्टान के पीछे बेहद सुरक्षित जगह पर दफनाया गया था. ऐसा लगता है कि एक ही जीवनकाल के दौरान अलग-अलग समय पर इन शवों को वहां रखा गया था.

आने वाले वर्षों और दशकों में शनिदार ए के ऊपर ही चार अन्य निएंडरथल शवों को रखा गया. डॉक्टर पोमेरॉय के अनुसार यह इस बात का ठोस संकेत है कि निएंडरथल अपने मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करते थे. गुफा का वह कोना उनके लिए बेहद खास मायने रखता था. शनिदार ए को जीवन में अपनों से देखभाल मिली और मौत के बाद भी पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई.

राल्फ सोलेकी की पहली खोज और चर्चित फ्लावर बरियल को लेकर क्या विवाद रहा है?

  1. शनिदार गुफा में निएंडरथल कंकालों की पहली खोज अमेरिकी पुरातत्वविद राल्फ सोलेकी ने 1951 से 1960 के बीच की थी. उस दौर की खुदाई ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को चौंका दिया था.
  2. सोलेकी को ऐसे कंकाल मिले थे जो गंभीर चोटों के बावजूद बुढ़ापे तक जीवित रहे थे. इससे यह साबित हुआ था कि निएंडरथल अपने घायल और बीमार साथियों की लंबे समय तक देखभाल करते थे.
  3. सोलेकी को वहां एक वयस्क पुरुष निएंडरथल का कंकाल भी मिला था जो करवट के बल लेटा हुआ था. उसके शव के पास परागकणों का एक बड़ा गुच्छा मौजूद था. इसे फ्लावर बरियल का नाम दिया गया.

सोलेकी का तर्क था कि निएंडरथल ने कब्र में जानबूझकर फूल रखे थे. हालांकि कई अन्य वैज्ञानिकों ने इस पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि जमीन खोदने वाले चूहों की वजह से वहां परागकण जमा हो गए होंगे. सोलेकी की इस खोज ने निएंडरथल को कम बुद्धिमान समझने की पुरानी सोच को चुनौती दी थी.

निएंडरथल की जिंदगी में देखभाल और हिंसक टकराव के दोनों पहलू कैसे सामने आते हैं?

यह नई खोज निएंडरथल जीवन के दो बिल्कुल उलट पहलुओं को एक साथ उजागर करती है. इनमें से एक पहलू आपसी देखभाल का है और दूसरा पहलू भयानक हिंसा का है. निएंडरथल का जीवन खतरों से भरा हुआ था और शिकार के दौरान चोट लगना आम बात थी. वैज्ञानिकों को कई कंकालों में सिर की पुरानी चोटें और हड्डियों के जुड़ने के निशान मिले हैं. वे बड़े जानवरों का शिकार करते थे और लंबी दूरी तय करते थे.

कुछ लोग प्राचीन शिकारी जीवन को बहुत शांतिपूर्ण मान लेते हैं. वहीं कुछ लोग थॉमस हॉब्स के नजरिए से उस दौर को बेहद क्रूर और बर्बर मानते हैं. सच्चाई इन दोनों विचारों के बीच की है.

शनिदार ए पर हुआ हमला दिखाता है कि उनके बीच आपसी विवाद और हिंसक संघर्ष भी होते थे. यह हमला उनके अपने समूह के किसी सदस्य ने किया था या फिर किसी दूसरे गिरोह ने यह कहना मुश्किल है. यह खोज बताती है कि निएंडरथल अच्छे और बुरे दोनों मामलों में काफी हद तक हम जैसे ही थे.

इराकी कुर्दिस्तान में शनिदार गुफा के प्रवेश द्वार का नजारा. (Photo Credit: Prof Graeme Barker)

शनिदार गुफा में 11 हजार साल पहले होमो सेपियंस के आने के क्या सबूत मिले हैं?

शनिदार गुफा का इस्तेमाल सिर्फ निएंडरथल लोगों ने ही नहीं किया था. वहां लगभग 11 हजार साल पुराने 34 आधुनिक इंसानों यानी होमो सेपियंस के अवशेष भी मिले हैं. यह वह समय था जब मेसोपोटामिया में शुरुआती नवपाषाण संस्कृतियां खेती की शुरुआत कर रही थीं.

वैज्ञानिकों के अनुसार निएंडरथल ने इस गुफा का उपयोग दो अलग-अलग कालखंडों में किया था. पहला कालखंड करीब 75 हजार साल पहले का था और दूसरा कालखंड 45 हजार से 50 हजार साल पहले का था. इसके बाद जब निएंडरथल पूरी तरह विलुप्त हो गए तब आधुनिक इंसानों ने इस गुफा को अपना ठिकाना बनाया था.

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम अब गुफा में कौन सी जांच कर रही है?

साल 2014 से प्रोफेसर ग्राहम बार्कर के नेतृत्व में शनिदार गुफा प्रोजेक्ट पर दोबारा काम शुरू हुआ था. डॉक्टर एम्मा पोमेरॉय इस प्रोजेक्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. फील्डवर्क का हर सीजन लगभग एक महीने लंबा होता है. टीम या तो वसंत ऋतु में काम करती है या फिर गर्मियों के अंत में जब मौसम बहुत गर्म होता है. लगभग 12 लोगों की टीम वहां लगातार खुदाई और विश्लेषण करती है.

वैज्ञानिक मिट्टी को पानी में छानकर जानवरों की छोटी हड्डियां और पत्थरों के टुकड़े अलग करते हैं. टीम गुफा के उस दौर का अध्ययन कर रही है जब निएंडरथल का आना बंद हुआ और आधुनिक इंसानों ने गुफा में रहना शुरू किया. लैब में मिट्टी की संरचना और प्राचीन परागकणों की रासायनिक जांच की जा रही है. इससे उस समय के मौसम और पर्यावरण की सटीक जानकारी मिलेगी.

इसके अलावा हथियारों के किनारों पर बचे सूक्ष्म अवशेषों की जांच की जा रही है. वैज्ञानिक 1950 के दशक के पुराने रिकॉर्ड और नए नमूनों को मिलाकर निएंडरथल के खानपान और जीवनशैली को समझने में जुटे हैं.



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