दिल्ली. कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. अगर मन में कुछ नया करने का जुनून हो, तो इंसान जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर अपनी पहचान बना सकता है. कुछ ऐसी ही कहानी है कमल कक्कू की, जो पिछले 40 साल से कला की दुनिया से जुड़े हुए हैं. कमर्शियल आर्टिस्ट के तौर पर अपना सफर शुरू करने वाले कमल आज कैरिकेचर आर्टिस्ट बन चुके हैं. खास बात यह है कि 60 साल की उम्र में भी उनका सीखने का सिलसिला रुका नहीं है. वह आज भी अपनी कला को बेहतर बनाने में जुटे हैं.
अमिताभ बच्चन के फैन थे, वहीं से शुरू हुआ कला का सफर
कमल काकू बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें अमिताभ बच्चन काफी पसंद थे. करीब 40 साल पहले इसी पसंद ने उन्हें एक ऐसा अनुभव दिया, जिसने उनके कला के सफर को आगे बढ़ाने में मदद की. वह अमिताभ बच्चन और उनके पिता से मिले और उन्हें अपनी बनाई तस्वीरें दिखाईं. इसके बाद उन्हें प्रेस में भी जगह मिली. इस अनुभव ने उन्हें अपनी कला को और आगे ले जाने का हौसला दिया.
कमल ने ललित कला महाविद्यालय से फाइन आर्ट्स की पढ़ाई की और बीएफए की डिग्री हासिल की. हालांकि, उनका मानना है कि डिग्री हासिल करना ही कला सीखने के लिए काफी नहीं है. उन्हें असल में पेंटिंग की बारीकियां अपने 80 साल के एक शिक्षक से सीखने को मिलीं, जो खुद एक पेंटर थे. उन्होंने कमल को कला को समझना और उसे सही तरीके से करना सिखाया.
मौके पर बनाते हैं लोगों की तस्वीरें, चेहरे पर आ जाती है मुस्कान
कमल काकू आज कैरिकेचर और ऑन-स्पॉट चित्रकला के जरिए लोगों को खुश करते हैं. वह सामने बैठे व्यक्ति के चेहरे को देखकर मौके पर ही उसका चित्र बनाते हैं. उनकी बनाई तस्वीरें देखकर लोग हंसते हैं और खुश होते हैं. कमल के लिए यही उनकी कला की सबसे बड़ी खूबसूरती है. वह बताते हैं कि लोगों को अपनी तस्वीर देखकर खुश होते हुए देखना उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देता है. यही काम उनकी कमाई का भी जरिया है. उनके लिए कला सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि ऐसा काम है, जिससे वह अपनी आजीविका भी चलाते हैं और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान भी लाते हैं.
पत्नी का मिला साथ
कमल अपने इस सफर में पत्नी के योगदान को भी खास मानते हैं. वह बताते हैं कि उनकी पत्नी गृहिणी हैं, लेकिन पिछले चार साल से ऑन-स्पॉट चित्रकला के काम को आगे बढ़ाने में उनका बहुत बड़ा सहयोग रहा है. कमल के मुताबिक, पत्नी का साथ उनके लिए प्रेरणा बना है. वह उन्हें हर तरह से सहयोग देती हैं और एक मजबूत स्तंभ की तरह उनके पीछे खड़ी रहती हैं. कमल मानते हैं कि किसी भी काम को आगे बढ़ाने में परिवार का साथ काफी मायने रखता है. उनकी कला के सफर में पत्नी का सहयोग उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत देता है.
सेहत अच्छी तो काम भी अच्छा
60 साल की उम्र में भी कमल काकू खुद को कला का विद्यार्थी मानते हैं. उनका कहना है कि अच्छा काम करने के लिए सबसे पहले स्वस्थ रहना जरूरी है. जब शरीर और मन स्वस्थ रहते हैं, तभी इंसान अपने काम को बेहतर तरीके से कर पाता है. वह यह भी मानते हैं कि लोगों की प्रतिक्रिया उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है. जब लोग उनकी कला को पसंद करते हैं, तो उनके मन में और अच्छा करने की इच्छा पैदा होती है.
उन्हें लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है. कमल काकू का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ इंसान को सीखना बंद नहीं करना चाहिए. वह जब तक संभव होगा, अपनी कला सीखते रहेंगे और उसे बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे. उनके लिए इस सफर का कोई आखिरी पड़ाव नहीं है. उनका एक ही मंत्र है, सीखते रहो, सीखते रहो और सीखते रहो.