सीमेंट की जगह मिट्टी से जुड़ी पक्की ईंटें, क्या ऐसा मकान टिक पाएगा? सरगुजा के दिलीप ने बनाया देसी स्टाइल का घर

सीमेंट की जगह मिट्टी से जुड़ी पक्की ईंटें, क्या ऐसा मकान टिक पाएगा? सरगुजा के दिलीप ने बनाया देसी स्टाइल का घर


Dilip Manjhi Desi Style House: आपने पक्के का मकान खुब देखा है, साथ में मिट्टी की जुड़ाई से बने कच्चे मकान भी देखे है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसा मकान देखा है, जिसमें दिवारे पक्की ईट से बनी हो और उन ईंटों की जोड़ाई मिट्टी से की गई हो. छत्तीसगढ के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाका कतकालो के रहने वाले मांझी समाज के एक युवक दिलीप ने अपने सूचबुझ के साथ 2 साल पहले एक मकान की बुनियाद पक्के ईट से रखी. लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से इस मकान को पक्के का मकान नही बना सके तो पक्के ईट की दीवारे मिट्टी से जोड़ दिया यानी देसी स्टाईल में मकान को तैयार किया, जिसमें 2 साल बाद भी किसी तरह का दरार नही आया. खासबात युवक ने अपने हाथों से इस मकान को बनाया है, जिसमें उनके माता पिता रहते हैं और आगे शादी की योजना बना रहा युवक, देखिए ये रिपोर्ट…

आर्थिक तंगी बनी वजह, सीमेंट की जगह मिट्टी से जोड़ दी ईंटें
दिलीप मांझी ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने दूसरे स्थान पर इस तरह का निर्माण कार्य होते देखा था. वहीं से उन्हें मिट्टी के गिलावे से ईंटों की जुड़ाई करने का विचार आया. उनके पास सीमेंट खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे. ऐसे में उन्होंने उपलब्ध ईंटों का इस्तेमाल करते हुए मिट्टी के गिलावे से मकान की दीवारें तैयार कर दीं. दिलीप के मुताबिक, ईंटें उन्हें एक अन्य निर्माण कार्य से मिली थीं. उन्होंने खुद भी कुछ ईंटें बनाई थीं, लेकिन उनकी संख्या ज्यादा नहीं थी.

नींव में चार फीट तक दबाई ईंटें
दिलीप ने बताया कि उनके घर के आसपास जमीन में गड्ढा था. ऐसे में उन्होंने जमीन को भरने के साथ मकान की नींव में ईंटों को करीब चार फीट तक अंदर दबाया. इसके बाद मिट्टी के गिलावे से ईंटों की जुड़ाई की गई. इस तरह उन्होंने अपनी जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से मकान का निर्माण पूरा किया.

दो साल से रह रहा परिवार, अब तक नहीं दिखी बड़ी टूट-फूट
दिलीप मांझी के मुताबिक, इस मकान को बने करीब दो साल हो चुके हैं. इस दौरान उन्हें मकान में कोई बड़ी टूट-फूट नजर नहीं आई है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मिट्टी से जुड़ी ईंटों का मकान सीमेंट से बने पक्के घर जितना मजबूत नहीं हो सकता. बारिश और पानी का असर पड़ने पर मिट्टी की जुड़ाई कमजोर होने और दीवारों की मजबूती प्रभावित होने की आशंका रहती है.

छत में बांस और मिट्टी के खपरों का इस्तेमाल
मकान की छत बनाने में भी स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है दिलीप ने बताया कि छत में बांस के छोटे-छोटे टुकड़ों और लकड़ी के ढांचे का सहारा लिया गया है वहीं, छत के ऊपर मिट्टी के खपरे लगाए गए हैं इनमें से कुछ खपरे उन्होंने खुद बनाए, जबकि कुछ खरीदे थे इस तरह उन्होंने सीमित खर्च में अपने परिवार के रहने के लिए मकान तैयार किया.

तीसरी कक्षा तक पढ़ाई, परिवार की जिम्मेदारी ने बढ़ाया काम का बोझ
दिलीप मांझी ने बताया कि उन्होंने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की है. परिवार की परिस्थितियों और कामकाज की जिम्मेदारियों के कारण वह आगे पढ़ाई नहीं कर सके. उनके पिता भी कामकाज में अकेले पड़ जाते थे. ऐसे में उन्हें परिवार की मदद के लिए मेहनत करनी पड़ी.दिलीप खेतीबाड़ी भी करते हैं और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध काम के सहारे परिवार चलाते.

मां-बाप के साथ रहते हैं दिलीप, खुद बनाया अपना आशियाना
दिलीप ने बताया कि उन्होंने अभी शादी नहीं की है और फिलहाल अपने माता-पिता के साथ रहते हैं. परिवार में तीन लोग हैं सीमित आर्थिक स्थिति के बीच उन्होंने अपने रहने के लिए यह मकान तैयार किया. सीमेंट से निर्माण कराने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और उपलब्ध ईंटों, मिट्टी तथा बांस का इस्तेमाल कर अपने लिए छत का इंतजाम किया. दिलीप की कहानी बताती है कि ग्रामीण इलाकों में कई बार आर्थिक मजबूरी लोगों को अपने संसाधनों से नए रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित करती है. हालांकि, ऐसे मकानों की सुरक्षा और मजबूती के लिए निर्माण की गुणवत्ता, नींव और बारिश से बचाव का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.



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