भारत ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, दूसरी तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं की भावनाओं पर हमला, क्या रोक सकेंगे PM तारिक?

भारत ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, दूसरी तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं की भावनाओं पर हमला, क्या रोक सकेंगे PM तारिक?


India-Bangladesh Relations: भारत अपने पड़ोसी बांग्लादेश के साथ रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. सीमा पार कर भारत में घुस आए बांग्लादेश के दो पुलिसकर्मियों को BSF ने वापस उनके देश के अधिकारियों को सौंप दिया. लेकिन दूसरी तरफ बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक यूनिवर्सिटी के अंदर मंदिर के पास बीफ बनाने को लेकर विवाद गहरा गया है. अब कुछ छात्रों ने 16 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के दौरान कैंपस में जानवर काटने और दावत का ऐलान किया है. तारिक रहमान के देश में लगातार हिंदुओं की भावनाओं का जानबूझकर अपमान किया जा रहा है और वह खामोश बैठे हैं.

यह मामला ढाका की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी का है. यहां 12 अक्टूबर को इस्लामिक हिस्ट्री एंड कल्चर विभाग के कुछ छात्रों ने कैंपस में बीफ खिचड़ी बनाने का कार्यक्रम रखा था. यूनिवर्सिटी के नाम से ही आप समझ सकते हैं कि यह हिंदू भगवान के नाम पर है. वहीं जहां ये हरकत की गई वह जगह विश्वविद्यालय के अंदर मौजूद मंदिर के पास है. हिंदू छात्रों ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि मंदिर के पास ऐसा आयोजन होने से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची. BBC बांग्ला और ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद अब सिर्फ खाने के आयोजन तक सीमित नहीं रहा. विश्वविद्यालय प्रशासन के नोटिस, छात्रों के विरोध और दुर्गा पूजा के दौरान नए कार्यक्रम के ऐलान ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

विश्वविद्यालय की केंद्रीय मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य सचिव जॉय साहा ने BBC बांग्ला को बताया कि हिंदू छात्रों को जब वहां बीफ पकाए जाने की जानकारी मिली, तो उन्होंने आयोजकों से जगह बदलने की अपील की. उनका कहना था कि मंदिर के इतने करीब खाना बनाने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही थीं. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई. बाद में प्रोफेसर एमडी आजम खान ने हस्तक्षेप किया और एक सहायक प्रॉक्टर को मौके पर भेजा. इसके बाद आयोजकों ने खाना बनाने की जगह मंदिर से दूर कर दी. आयोजकों ने कहा कि उनका मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.

विवाद बढ़ने की एक और वजह मंदिर की ईंटों को लेकर सामने आई. आरोप लगा कि खाना बनाने के लिए अस्थायी चूल्हा तैयार करने में मंदिर की ईंटों का इस्तेमाल किया गया था. द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजकों ने पहले विश्वविद्यालय की कैंटीन में खिचड़ी बनाने की योजना बनाई थी. लेकिन गैस का दबाव कम होने के कारण उन्हें दूसरी जगह खाना बनाना पड़ा. आयोजकों का कहना था कि उन्होंने पास में पड़ी ईंटों का इस्तेमाल किया और उन्हें पता नहीं था कि वे मंदिर की हैं. बाद में आयोजकों ने ईंटें हटा दीं, कैंटीन से लोहे का चूल्हा मंगाया और गलतफहमी के लिए माफी मांगी. हालांकि, मंदिर समिति के जॉय साहा ने कहा कि उनकी मुख्य आपत्ति ईंटों को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर के इतने करीब खाना बनाने को लेकर थी.

यूनिवर्सिटी ने जारी किया नोटिस

विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 14 अक्टूबर को एक नोटिस जारी किया. इसमें छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से कैंपस में पशुओं को काटने से बचने को कहा गया था. प्रशासन ने इसके पीछे साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने की जरूरत बताई. इस नोटिस पर कुछ छात्रों ने आपत्ति जताई. उनका कहना था कि इससे कैंपस में बीफ भोज जैसे आयोजनों पर रोक लग सकती है.

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दूसरा नोटिस जारी किया. इसमें कहा गया कि पहले हुए विवाद को प्रॉक्टर के हस्तक्षेप और दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद सुलझा लिया गया था. प्रशासन ने पहले नोटिस से पैदा हुई गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी. दूसरे नोटिस में छात्रों को कैंपस में कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया कि किसी एक समूह की गतिविधि से दूसरे समूह को परेशानी नहीं होनी चाहिए.

दुर्गा पूजा के बीच पशु काटने का ऐलान

प्रशासन के दूसरे नोटिस के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ. कुछ छात्रों ने 16 अक्टूबर, शुक्रवार को कैंपस में बीफ भोज आयोजित करने की योजना का ऐलान कर दिया. यह दिन दुर्गा पूजा के महाषष्ठी पर्व के साथ पड़ रहा है. BBC बांग्ला के मुताबिक, आयोजन समिति के एक सदस्य ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि छात्रों ने पहले यह कार्यक्रम दुर्गा पूजा के बाद करने पर विचार किया था. लेकिन प्रशासन के पहले नोटिस के बाद उन्हें लगा कि उनके आयोजन पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है. आयोजकों ने इसे प्रशासन के शुरुआती नोटिस के विरोध में आयोजित कार्यक्रम बताया है.

भारत ने लौटाए बांग्लादेश के पुलिसकर्मी

इस घटनाक्रम में दो अलग-अलग पहलू हैं. एक तरफ भारत और बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बलों के बीच कोऑर्डिनेशन दिखा. दूसरी तरफ बांग्लादेश के एक विश्वविद्यालय में धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर विवाद बढ़ गया. सीमा पर हुई घटना में बांग्लादेश के दो पुलिसकर्मी 15 अक्टूबर की रात ड्रग्स की तस्करी करने वालों का पीछा करते हुए भारतीय इलाके में दाखिल हो गए थे. वे स्थानीय लोगों के हाथ लगने के बाद BSF को सौंपे गए. इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच फ्लैग मीटिंग हुई और 16 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:50 बजे BSF ने दोनों पुलिसकर्मियों को बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के हवाले कर दिया. ब्रह्मणपारा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी फारुक हुसैन के मुताबिक, दोनों पुलिसकर्मियों की बंदूकें उनके गश्ती वाहन में ही थीं. बाद में हथियार भी पुलिस को वापस सौंप दिए गए.



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