दोनों पैरों से दिव्यांग, फिर भी हौसले बुलंद, ट्राई साइकिल को बना ली चलती फिरती दुकान, दिन में 2500 की बिक्री

दोनों पैरों से दिव्यांग, फिर भी हौसले बुलंद, ट्राई साइकिल को बना ली चलती फिरती दुकान, दिन में 2500 की बिक्री


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Inspiring Story: दिव्यांगता काफी मुश्किल होती है. दिव्यांग जनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो मुश्किलों में भी अपना सफर आसान बनाने का रास्ता ढूंढ निकालते हैं. कुछ ऐसा ही कर रहे हैं जमुई जिले के रहने वाले दिनेश पासवान. बचपन से ही दोनों पैरों से दिव्यांग हैं. लेकिन उन्होंने एक ऐसा जुगाड़ लगाया है, कि जिसे देखकर आपको भी उनकी तारीफ करने का मन करेगा.

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दिनेश पासवान मूल रूप से जमुई जिले के डैनीखांड गांव के रहने वाले हैं. वह गांव-गांव घूम कर झालमुड़ी, मुंबई मिठाई सहित घर में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें बेचते हैं. उससे अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं.

दिनेश पासवान बताते हैं कि वह बचपन से ही दोनों पैरों से दिव्यांग हैं. जब तक उनके माता-पिता जीवित थे, तो उनके द्वारा किसी तरीके से उनके परिवार का भरण पोषण किया जाता था. लेकिन माता-पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेवारी उन पर आ पड़ी. 2 साल पहले सरकार की एक योजना के दौरान उन्होंने फॉर्म भरा और प्रखंड कार्यालय के द्वारा उन्हें इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल दी गई. यह बैटरी से संचालित की जाती है. इस ट्राई साइकिल को दिनेश पासवान ने अपनी दुकान बना ली.

ट्राई साइकिल के पीछे लगाए हुए बूट स्पेस में उन्होंने अपना दुकान खोल लिया. उसी के अंदर मुड़ी, मिक्चर, प्याज, मसाले सहित उसका सारा सामान रखकर वह गांव-गांव घूम कर उसे बेचते हैं. ट्राई साइकिल के अगले हिस्से में कई सारी जालियां लगा दी जिसमें वह सामान टांग लेते हैं, और फिर उसे बेचकर परिवार को गुजारा करते हैं.

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दिनेश पासवान ने बताया कि वह सुबह 9 बजे तक अपने घर से निकल जाते हैं. फिर वह ट्राई साइकिल से आसपास के गांव में घूमते रहते हैं. उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन करीब 20 से 25 किलोमीटर ट्राई साइकिल चलाकर गांव-गांव घूमते हैं. इस बीच अगर उनकी ट्राई साइकिल डिस्चार्ज हो जाए, और उसे चार्ज करने की आवश्यकता पड़ती है. तब वह उसे किसी भी व्यक्ति के घर चार्ज में लगा देते हैं.

शाम 5 से 6 बजे के बीच वापस वह अपने घर को लौट जाते हैं. इस बीच प्रतिदिन वह कभी 2 हजार तो कभी ढाई हजार रुपए के सामान की बिक्री कर लेते हैं. जिससे वह अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं. दिनेश पासवान कि इस कोशिश को स्थानीय लोग भी खूब सराहते हैं. साथ ही उनका यह जुगाड़ भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है.

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