मध्य प्रदेश के खंडवा में मां नवचंडी का ऐसा मंदिर है, जहां नवरात्रि ही नहीं, बल्कि सालभर दूर-दूर से भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं. शहर के बीचोंबीच स्थित नवचंडी देवी धाम अपनी धार्मिक मान्यताओं, अनोखी पूजा-पद्धति और यहां लगने वाले मेले के लिए जाना जाता है. मंदिर के महंत का दावा है कि देश के कई बड़े नेता और फिल्मी कलाकार यहां माता के दर्शन कर चुके हैं. मान्यता है कि मां नवचंडी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। मंदिर से कई बड़े राजनीतिक चेहरों के जुड़ने के किस्से भी सुनाए जाते हैं. आखिर क्या है इस मंदिर का इतिहास और क्यों खास माना जाता है मां नवचंडी का दरबार? जानिए इस धाम की पूरी कहानी.
महंत को सपने में हुए माता के दर्शन, 1991 में बना मंदिर
नवचंडी देवी धाम के महंत बाबा गंगाराम लोधी बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही देवी मां के प्रति गहरी आस्था रही है. उनके मुताबिक, माता ने सपने में दर्शन देकर इसी स्थान पर मंदिर बनाने के लिए प्रेरित किया था. इसके बाद जमीन लेकर वर्ष 1991 में मंदिर का निर्माण कराया गया. महंत बताते हैं कि वे माता की प्रेरणा और मार्गदर्शन के अनुसार यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित करते आए हैं. धीरे-धीरे यह स्थान भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया और यहां दर्शन करने आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई.
हेमा मालिनी से राजेश खन्ना तक बड़े कलाकारों ने दर्शन किए
महंत बाबा गंगाराम लोधी के मुताबिक, नवचंडी देवी धाम में फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां दर्शन कर चुकी हैं। वे हेमा मालिनी, राजेश खन्ना, शक्ति कपूर और गुलशन ग्रोवर सहित कई कलाकारों के नाम लेते हैं. उनके अनुसार, मंदिर में अब तक 200 से ज्यादा कलाकार और सेलिब्रिटी दर्शन कर चुके हैं। मंदिर से जुड़े भक्तों के बीच भी इन हस्तियों के यहां आने के किस्से सुनाए जाते हैं। हालांकि, इन सभी यात्राओं की अलग-अलग फोटो मंदिर में भी लगे है लेकिन मंदिर की पहचान स्थानीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में बनी हुई है।
दिग्विजय सिंह और उमा भारती सहित कई नेताओं से जुड़ी मान्यताएं
मंदिर के महंत बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई राजनीतिक नेता मां नवचंडी के दर्शन करने आते रहे हैं.उनके अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव और कांग्रेस-भाजपा के कई नेताओं ने भी यहां माथा टेका है। महंत एक पुराने किस्से का जिक्र करते हुए बताते हैं कि जब दिग्विजय सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब वे अपनी टीम के साथ मंदिर आए थे। उस समय मंदिर और मेले के लिए सहयोग की बात भी हुई थी. महंत के मुताबिक, इसी दौरान एक नेता ने उनसे कहा था कि अगर दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे माता के दरबार में जरूर आएंगे.ओर दिग्विजय सिंह उसके बाद मुख्यमंत्री बने तो उनकी आस्था इस मंदिर से ज्यादा जुड़ गई.मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यहां मां का आशीर्वाद लेने वाले कई लोग राजनीति और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़े हैं। इसी वजह से भक्तों के बीच यह चर्चा भी होती है कि मां नवचंडी का आशीर्वाद बड़े पद और सफलता पाने में सहायक होता है। हालांकि, मुख्यमंत्री या मंत्री बनने और मंदिर में दर्शन करने के बीच किसी निश्चित संबंध का कोई प्रमाण नहीं है. यह भक्तों की आस्था और मंदिर से जुड़े किस्सों का हिस्सा है.
पंच मशाल की विशाल ज्योत और काकड़ा आरती है खास
मंदिर से लंबे समय से जुड़े भक्त लव जोशी बताते हैं कि नवचंडी देवी धाम में होने वाली पूजा-पद्धति और आरती भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। उनके मुताबिक, यहां पंच मशाल की विशाल ज्योत और काकड़ा आरती विशेष रूप से की जाती है। त्योहारों पर मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है और धार्मिक आयोजन उत्साह के साथ होते हैं। मंदिर परिसर में लगने वाला मेला भी खंडवा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है.
नवचंडी मेले के मैदान की भी है खास पहचान
नवचंडी देवी धाम केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां लगने वाला मेला भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। महंत बाबा गंगाराम लोधी बताते हैं कि मेले के मैदान के लिए जमीन आरक्षित कराने में तत्कालीन सरकार की भूमिका रही थी. मेले के दौरान यहां धार्मिक आयोजनों के साथ लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के लिए यह मेला आस्था, परंपरा और मेल-मिलाप का अवसर भी है.खंडवा का नवचंडी देवी धाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले भक्त मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर से जुड़े पुराने किस्से, नेताओं और कलाकारों के आने की बातें, विशेष आरती और मेले की परंपरा इस धाम को अलग पहचान देती हैं। यही वजह है कि मां नवचंडी के दर्शन करने के लिए खंडवा के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी भक्त पहुंचते हैं.