IAS Saurabh Katiyar Biography: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के एक गांव का लड़का जिसने यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया. इसके बाद आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और देश की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी में नौकरी भी की लेकिन मन में कुछ और करने की इच्छा थी. इसलिए नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. बिना किसी कोचिंग के यूपीएससी पास किया, पहले भारतीय राजस्व सेवा यानी IRS में चयन हुआ और फिर दोबारा परीक्षा देकर IAS बन गए. यह कहानी है महाराष्ट्र कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी सौरभ कटियार की. अमरावती में कलेक्टर रहते हुए आदिवासी इलाकों में माताओं और बच्चों की सेहत सुधारने के लिए काम करने वाले सौरभ कटियार अब एक नई जिम्मेदारी के कारण चर्चा में हैं. महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC में कथित पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों को लेकर विवाद चल रहा है. इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें आयोग के सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. आखिर कौन हैं IAS सौरभ कटियार, कहां के रहने वाले हैं, कितने पढ़े-लिखे हैं और अब उनके सामने क्या चुनौती है? आइए जानते हैं उनका पूरा सफर.
कौन हैं IAS सौरभ कटियार, जिन्हें मिली MPSC की जिम्मेदारी?
सौरभ कटियार महाराष्ट्र कैडर के 2016 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं.वे वर्तमान में मुंबई उपनगरीय जिले यानी मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट के कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं.अब महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के सचिव पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी है.यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.इस विवाद के बीच आयोग के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालना उनके करियर की एक महत्वपूर्ण चुनौती मानी जा रही है. सौरभ कटियार इससे पहले अमरावती के कलेक्टर, अकोला जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पालघर जिले के दहानू में सहायक कलेक्टर जैसे पदों पर काम कर चुके हैं.
यूपी के कानपुर के रहने वाले हैं सौरभ
आईएएस सौरभ कटियार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के रहने वाले हैं.उनका पैतृक गांव मिरगांव बताया जाता है, जो कानपुर देहात की सिकंदरा तहसील में आता है.उनके परिवार के लोग सिकंदरा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं हालांकि सिविल सेवा में चयन के बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला और उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर का बड़ा हिस्सा इसी राज्य में बिताया है.एक छोटे से गांव से निकलकर देश की प्रतिष्ठित आईआईटी में पढ़ाई और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का उनका सफर खास रहा है.
वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी
सौरभ कटियार का जन्म 30 मई 1992 को हुआ था. वे वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और लगभग दस वर्षों से भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े हुए हैं.अपने अब तक के करियर में उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों से लेकर मुंबई जैसे बड़े महानगर के जिला प्रशासन तक की जिम्मेदारियां संभाली हैं.
12वीं परीक्षा में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान
सौरभ कटियार की पढ़ाई की कहानी भी दिलचस्प है.वे सबसे पहले उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने उत्तर प्रदेश बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया था.उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा में 92.20 प्रतिशत अंक हासिल किए थे.इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था यानी सिविल सेवा में चयन से काफी पहले ही वे अपनी पढ़ाई के कारण सुर्खियों में आ चुके थे.स्कूली शिक्षा में मिली इस सफलता के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का फैसला किया.
IIT कानपुर से BTech और MTech की पढ़ाई
12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने के बाद सौरभ कटियार ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया. उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की. उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एमटेक किया है. आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने निजी क्षेत्र में अच्छे करियर के अवसर थे. उन्होंने शुरुआत में टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरी करने का रास्ता भी चुना.
प्राइवेट कंपनी में की नौकरी, फिर सिविल सेवा की ओर बढ़े
आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ कटियार ने बेंगलुरु में टेक्नोलॉजी कंपनी में काम किया लेकिन निजी क्षेत्र में नौकरी करने के दौरान उनकी रुचि सार्वजनिक सेवा की ओर बढ़ी. अप्रैल में प्रकाशित एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने और लोगों के लिए कुछ करने की संभावना ने उन्हें सिविल सेवा की ओर आकर्षित किया. इसी सोच के साथ उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की.उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में रहती है, क्योंकि इंजीनियरिंग और निजी क्षेत्र की नौकरी के बाद उन्होंने अपना करियर बदलकर प्रशासनिक सेवा को चुना.
बिना कोचिंग UPSC पास की, पहले IRS में हुआ चयन
सौरभ कटियार की यूपीएससी की तैयारी से जुड़ी एक खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद के परीक्षा पास करने का दावा किया था.उन्होंने वर्ष 2014 में भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की थी.उस समय उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा यानी IRS में हुआ था.आईआरएस में चयन के बाद वे आयकर विभाग से जुड़े प्रशिक्षण के लिए नागपुर में थे लेकिन उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना था इसलिए उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी परीक्षा दी और बेहतर सेवा प्राप्त करने में सफल रहे.
कब IAS बने सौरभ कटियार, UPSC में कितनी रैंक?
सौरभ कटियार वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 334वीं रैंक हासिल की थी.इसके बाद उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ और उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित किया गया. आईएएस में चयन की सूचना मिलने के समय वे नागपुर में आयकर विभाग के प्रशिक्षण से जुड़े हुए थे. इस तरह उनका सफर पहले आईआरएस और फिर आईएएस तक पहुंचा. सौरभ कटिया ने यूपीएससी परीक्षा में वर्ष 2016 में 334वीं रैंक हासिल की.
पिता रिटायर्ड कर्मचारी, मां गृहिणी और बहन बैंक अधिकारी
आईएएस सौरभ कटियार का परिवार उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का रहने वाला है. उनके पिता का नाम अमरनाथ कटियार है. उनके पिता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगरकेन रिसर्च से सेवानिवृत्त हुए हैं. उनकी मां विद्या कटियार गृहिणी हैं. सौरभ कटियार की बड़ी बहन रश्मि कटियार भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI में अधिकारी हैं.
स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं पत्नी मोनिका चौधरी
सौरभ कटियार की पत्नी का नाम मोनिका चौधरी है. वे पेशे से गायनेकोलॉजिस्ट यानी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं. जहां सौरभ कटियार प्रशासनिक सेवा में काम कर रहे हैं वहीं उनकी पत्नी चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ी हैं. उनके परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग पेशों में कार्यरत रहे हैं.
महाराष्ट्र में कहां से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर?
आईएएस बनने के बाद सौरभ कटियार को महाराष्ट्र कैडर मिला. उनके शुरुआती प्रशिक्षण और प्रशासनिक अनुभव में मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी का प्रशिक्षण भी शामिल रहा. उन्होंने मई 2018 से जुलाई 2018 के बीच अकादमी में दूसरे चरण का प्रशिक्षण पूरा किया. इसके बाद जुलाई से सितंबर 2018 तक नई दिल्ली में सहायक सचिव के रूप में काम किया. इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र में क्षेत्रीय प्रशासन की जिम्मेदारी मिली.सौरभ कटियार की शुरुआती महत्वपूर्ण तैनातियों में पालघर जिले का दहानू क्षेत्र शामिल है. वे अक्टूबर 2018 से जुलाई 2020 तक दहानू में सहायक कलेक्टर और एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी रहे. दहानू महाराष्ट्र का ऐसा क्षेत्र है, जहां बड़ी आदिवासी आबादी रहती है.
CEO के रूप में तीन साल काम किया
दहानू में तैनाती के बाद सौरभ कटियार को अकोला जिला परिषद का मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO बनाया गया.उन्होंने जुलाई 2020 से जुलाई 2023 तक इस पद पर काम किया यानी वे करीब तीन साल तक अकोला जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे. अकोला में करीब तीन साल तक जिम्मेदारी संभालने के बाद सौरभ कटियार को अमरावती जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया. वे जुलाई 2023 से मई 2025 तक अमरावती के जिला कलेक्टर रहे. उनके अमरावती कार्यकाल का सबसे चर्चित हिस्सा आदिवासी क्षेत्र मेलघाट में माताओं और बच्चों की सेहत सुधारने के लिए किया गया काम रहा.