Tips: नए घर में भी लग सकती है दीमक? निर्माण के समय रखें इन 5 बातों का ध्यान, एक्सपर्ट से जानें तरीका

Tips: नए घर में भी लग सकती है दीमक? निर्माण के समय रखें इन 5 बातों का ध्यान, एक्सपर्ट से जानें तरीका


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House Waterproofing Tips: मोतिहारी के इंटीरियर डिजाइनर अभिषेक अग्रवाल ने घरों को दीमक से बचाने के उपाय बताए हैं. उन्होंने नमी और पानी के रिसाव को रोकने, टाइल्स लगवाते समय वाटरप्रूफिंग कराने, लकड़ी के फर्नीचर पर एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट करने और चींटियों के प्रकोप पर ध्यान देने की सलाह दी है. (आदित्य गौरव/पूर्वी चंपारण)

Termite Prevention for Home: घर बनवाते समय लोग अक्सर उसकी खूबसूरती, मजबूती और डिजाइन पर तो ध्यान देते हैं. पर कुछ जरूरी सावधानियां नजरअंदाज कर देते हैं. यही छोटी-सी लापरवाही बाद में बड़ी परेशानी बन सकती है. दीमक भी ऐसी ही समस्या है जो घर के फर्नीचर से लेकर कपड़ों और जरूरी कागजात तक को नुकसान पहुंचा सकती है. पुराने घरों में दीमक लगने की समस्या आम तौर पर देखने को मिलती है. कई बार नए घर भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. घर बनाते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं तो दीमक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मोतिहारी के रहने वाले और करीब 10 वर्षों से इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम कर रहे अभिषेक अग्रवाल ने दीमक लगने के कारणों और इससे बचाव के कई महत्वपूर्ण तरीके बताए हैं.

दीवार में नमी बनी तो बढ़ सकता है दीमक का खतरा
अभिषेक अग्रवाल ने लोकल 18 को बतलाया कि घर में दीमक लगने का एक प्रमुख कारण नमी और पानी का रिसाव हो सकता है. अगर दीवारों में लगातार नमी बनी रहे या कहीं से पानी का रिसाव हो रहा हो तो ऐसी जगहों पर दीमक का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए घर बनाते समय प्लंबिंग का काम पूरा होने के बाद वॉटर टेस्टिंग कराना जरूरी है. उनका सुझाव है कि पानी के रिसाव की जगह पहचानने के लिए पानी में रंग मिलाकर जांच की जा सकती है. ताकि जहां से रिसाव हो रहा है. उस जगह को आसानी से पहचानकर समय रहते ठीक कराया जा सके.

टाइल्स लगवाते समय वाटरप्रूफिंग जरूरी
उन्होंने बताया कि घर में टाइल्स लगवाते समय वाटरप्रूफिंग पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. खासकर बाथरूम और पानी के संपर्क में आने वाली जगहों पर सही तरीके से वाटरप्रूफिंग कराने से पानी के रिसाव की समस्या को कम किया जा सकता है.

लकड़ी के फर्नीचर की ऐसे करें सुरक्षा
दीमक का सबसे ज्यादा खतरा लकड़ी से बने सामान को रहता है. कुर्सी, टेबल, पलंग, अलमारी समेत दूसरे लकड़ी के फर्नीचर को बचाने के लिए निर्माण और फर्नीचर लगाते समय एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट और उपयुक्त प्रोटेक्टिव कोटिंग का इस्तेमाल करना चाहिए. अभिषेक अग्रवाल दीवारों और लकड़ी के फर्नीचर की सुरक्षा के लिए वॉल गार्ड जैसे सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की भी सलाह देते हैं.

चींटियों के रास्ते से भी पहुंच सकती है दीमक
अभिषेक ने आगे बतलाया कि घर में चींटियों का प्रकोप भी परेशानी बढ़ा सकता है. कई बार चींटियां लकड़ी के फर्नीचर में अपना रास्ता या ठिकाना बना लेती हैं. ऐसे रास्तों और खाली जगहों का इस्तेमाल दूसरे कीट कर सकते हैं. धीरे-धीरे फर्नीचर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए घर में चींटियों या किसी भी तरह के कीट का प्रकोप नजर आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

घर बनाते समय ही कर लें बचाव की तैयारी
दीमक लगने के बाद उसका इलाज कराने की तुलना में घर बनाते समय ही एंटी-टर्माइट और नमी से बचाव के उपाय करना ज्यादा बेहतर होता है. पानी के रिसाव की नियमित जांच, वाटरप्रूफिंग और लकड़ी के फर्नीचर की उचित सुरक्षा जैसे उपाय अपनाकर घर को लंबे समय तक दीमक के नुकसान से बचाया जा सकता है.



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