Success Story: बहन से उधार लिए 10 हजार, शुरू किया चप्पल का कारोबार; अब दुकान पर उमड़ रहे ग्राहक

Success Story: बहन से उधार लिए 10 हजार, शुरू किया चप्पल का कारोबार; अब दुकान पर उमड़ रहे ग्राहक


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Success Story: बुरहानपुर में बहन से 10 हजार रुपये उधार लेकर भाई ने चप्पल का व्यवसाय शुरू किया और मेहनत के दम पर अच्छी कमाई करने लगा.

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Success Story: कहते हैं कि अपनों का साथ और विश्वास मिल जाए तो जिंदगी बदलने में देर नहीं लगती. बुरहानपुर में एक भाई की ऐसी ही कहानी सामने आई है जिसमें बहन ने केवल 10 हजार रुपये उधार देकर उसे आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई. बहन से मिली प्रेरणा और आर्थिक सहयोग के दम पर आरीस चौधरी ने चप्पल का व्यवसाय शुरू किया. आज मेहनत और लगन से वह अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं.

बहन ने दिया हौसला, शुरू हुआ कारोबार
लोकल 18 की टीम को आरीस चौधरी बताते हैं कि उनके जीवन में बहन की अहम भूमिका रही है. जब उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा तब बहन ने उनका हौसला बढ़ाया और 10 हजार रुपये उधार देकर चप्पलों का कारोबार शुरू करने में मदद की शुरुआत में पूंजी कम थी लेकिन बहन और पिता के विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. उन्होंने छोटे स्तर पर दुकान शुरू की और धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाने में जुट गए.

कम दाम में चप्पलें खरीदने पहुंचते हैं ग्राहक
आरीस चौधरी जयस्तंभ क्षेत्र में अपनी दुकान का संचालन करते हैं. यहां कम कीमत में विभिन्न डिजाइन की चप्पलें उपलब्ध होने के कारण ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. दुकान पर ब्रांडेड चप्पलों जैसी डिजाइन वाली कॉपी चप्पलें भी मिलती हैं. जिन्हें ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदते हैं. कम कीमत में विकल्प मिलने से उनकी दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है.

मेहनत और लगन से बदली जिंदगी
आरीस का कहना है कि किसी भी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत, लगन और ग्राहकों के विश्वास की जरूरत होती है. उन्होंने सीमित पूंजी से शुरुआत की और अपने काम पर ध्यान देते हुए कारोबार को आगे बढ़ाया. आज उन्हें इस व्यवसाय से अच्छी कमाई हो रही है.

आरीस चौधरी की कहानी यह संदेश देती है कि परिवार का सहयोग और सही समय पर मिला प्रोत्साहन किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है. बहन ने 10 हजार रुपये देकर केवल व्यवसाय शुरू करने में मदद नहीं की बल्कि भाई को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया. यह कहानी भाई-बहन के रिश्ते विश्वास और मेहनत की मिसाल है.



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