80 की उम्र में खेती कर रहे किसान राजेंद्र महतो, गोभी-मिर्च से कमा रहे ₹200000
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Sitamarhi Agriculture News: सीतामढ़ी के 80 वर्षीय किसान राजेंद्र महतो उम्र को मात देकर खेतों में पसीना बहा रहे हैं. पानी की भारी किल्लत के बावजूद उन्होंने निजी बोरिंग कराई और आज हरी सब्जियों की खेती से सालाना दो लाख रुपये कमा रहे हैं. उनके साथ उनका पूरा परिवार भी खेती के कार्य में लगा हुआ है.
सीतामढ़ी: उम्र के पड़ाव पर जहां लोग आराम करना पसंद करते हैं. वहीं, 80 वर्ष की उम्र में भी सीतामढ़ी के किसान राजेंद्र महतो खेतों में पसीना बहाकर दूसरों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं. पहले वह पारंपरिक खेती किया करते थे, लेकिन लगभग 10 साल पहले उन्होंने एक बड़ा फैसला लेते हुए हरी सब्जियों की खेती की ओर रुख किया. उन्होंने एक कट्ठा ऊंचे खेत में गोभी और मिर्च लगाकर अपनी इस नई यात्रा की शुरुआत की थी. समय के साथ उनकी यह कोशिश सफल रही और उन्होंने बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती शुरू कर दी. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में.
पानी की समस्या के बाद भी लहलहा दी फसल
किसान राजेंद्र महतो के लिए खेती का यह सफर इतना आसान नहीं था. शुरुआत में उनके इलाके में पानी की भारी समस्या थी और खेत सींचने के लिए बोरिंग तक की सुविधा उपलब्ध नहीं थी. उन्हें गड्ढों और खड्डों से बर्तन या बाल्टी के सहारे पानी उलीच-उलीचकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ती थी. इस बड़ी चुनौती का सामना करते हुए उन्होंने हार नहीं मानी और सरकार पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जमा-पूंजी से 2 बोरिंग लगवाए. साथ ही निजी खर्च पर बोरिंग की व्यवस्था होने के बाद उनके खेतों तक पानी आसानी से पहुंचने लगा.
सब्जियों के उत्पादन से बढ़ा मुनाफा
सिंचाई की तंगी दूर होते ही उनकी मेहनत रंग लाने लगी. वर्तमान में वह लगभग 3 बीघा (लगभग 2 एकड़) ज़मीन में खेती कर रहे हैं, जिसमें से एक बीघा पूरी तरह से हरी सब्जियों के लिए समर्पित है. जहां गोभी, बैंगन, परवल, मूली, कद्दू, मिर्च और टमाटर जैसी विविध सब्जियों की पैदावार करते हैं. इसके अलावा आवश्यकतानुसार वे धान की भी खेती कर लेते हैं. साथ ही विभिन्न मौसमों में अलग-अलग फसलें उगाने की इस समझदारी से उन्हें हर साल करीब ₹2 लाख की शुद्ध आय प्राप्त हो जाती है.
पूरा परिवार जुड़ा है खेती के काम में
सब्जियों की खेती न केवल राजेंद्र महतो के लिए जीवन-यापन का ज़रिया बनी है, बल्कि इससे उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण भी सम्मानजनक ढंग से हो रहा है. उनका बेटा उगाई गई ताज़ा सब्जियों को बाज़ार में बेचने का काम संभालता है. इस प्रकार, पूरा परिवार मिलकर खेती और व्यापार में हाथ बटाता है. 80 साल के किसान राजेंद्र महतो की यह कहानी साबित करती है कि यदि सही दिशा, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की इच्छाशक्ति हो, तो उम्र और परिस्थितियां कभी रुकावट नहीं बन सकती हैं.