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Neha Bora News: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी की अगुआई में दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन किया गया. इसमें विपक्ष के कई धड़े भी शामिल हो चुके हैं. इस दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन (AISA) की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा सुर्खियों में हैं. उन्होंने बांग्लादेश को लेकर चौंकाने वाली बात कही है.
छात्र संगठन AISA की नेता नेहा बोरा का एक वीडियो फेसबुक पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे यह कहती हुई दिख रही हैं कि बांग्लादेश ने भारत के जेन Z को रास्ता दिखाया. (फोटो: PTI)
Neha Bora News: डेमोक्रेटिक सिस्टम में संवैधानिक पदों पर बैठे किसी व्यक्ति से मतभेद हो सकता है. उनका विरोध हो सकता है. उनको हटाने तक की मांग की जा सकती है. इसको लेकर विरोध-प्रदर्शन भी किया जा सकता है. लोकतांत्रिक प्रणाली में नागरिकों को इसका पूर्ण अधिकार है. दूसरी तरफ, इसी सिस्टम में संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों को हटाने के लिए मुकम्मल व्यवस्था भी की गई है. लेकिन जब यह मांग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चोट करने लगे तो उसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है. इसकी आड़ में यदि लोकतांत्रिक तौर-तरीकों को कुचलने का प्रयास किया जाने लगे तो फिर नागरिकों का जागना जरूरी हो जाता है. मौजूदा समय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है. इसमें विभिन्न तरह के संगठन शामिल हैं. वामपंथी धड़े का छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन (AISA) भी इसमें शामिल है. AISA की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह यह कहती हुई दिख रही हैं कि बांग्लादेश के लोगों ने भारत के Gen Z को रास्ता दिखाया है. नेहा बोरा के इस बयान से कई तरह के सवाल पैदा होते हैं.
दरअसल, बांग्लादेश में विद्रोह की आड़ में देश की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका गया. प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा. इसके बाद पहले अंतरिम सरकार का गठन किया गया और बाद में चुनाव कराया गया. बांग्लादेश में कराया गया चुनाव कितना पाक-साफ था, उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी को चुनाव लड़ने से ही रोक दिया गया. शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया. इसके बाद सिर्फ एक बड़ी पार्टी बची थी – बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी. जब देश की 2 बड़ी राजनीतिक पार्टी में से एक को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया हो तो उस चुनाव की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों में हुई गिरावट का अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है.
नेहा बोरा ने क्या कहा?
अब आते हैं नेहा बोरा पर. वायरल वीडियो में AISA प्रमुख नेहा कह रही हैं, ‘इस देश (भारत) में जेन Z का जो मूवमेंट चल रहा है, उसकी शुरुआत पहले बांग्लादेश में हुई थी. हमें रास्ता दिखाने के लिए आपको (बांग्लादेश) बहुत बधाई. इस देश के युवाओं के साथ एकता दिखाने और उनको रास्ता दिखाने के लिए भी आपको बधाई. हमलोग जानते हैं कि बांग्लादेश का मूवमेंट लोकतांत्रिक और मतदाताओं के अधिकारों के लिए था. आज भारत में जो मूवमेंट हो रहा है, वह भी लोकतंत्र और मतदान के अधिकार को लेकर हो रहा है. मैं जानती हूं कि आपका जो संघर्ष धार्मिक कट्टरपंथियों के खिलाफ किया, वही संघर्ष भारत के युवा आज कर रहे हैं.’
हकीकत से दूर या बड़ी साजिश का हिस्सा?
नेहा बोरा ने वायरल वीडियो में कहा कि बांग्लादेश का मूवमेंट लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने और वोटिंग के अधिकार के लिए था. बड़ा सवाल यह उठता है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी को चुनाव का हिस्सा बनने से रोक कर और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हिंसा के दम पर सत्ता से उखाड़ना लोकतंत्र बचाने की कैसी लड़ाई है? नेहा बोरा हाइली एजुकेटेड हैं. AISA जैसे संगठन का प्रमुख होने के नाते यह भी नहीं माना जा सकता कि उन्हें देश और दुनिया के बारे में जानकारी नहीं है. तो नेहा बोरा बांग्लादेश में हुए मूवमेंट का खुलेआम समर्थन कर किसी सोची समझी साजिश को अंजाम देने की कोशिश में जुटी हैं? लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा लोगों द्वारा चुनी गई सरकार को बेदखल कर कतई नहीं की जा सकती है. हां एक अधिनायकवादी सिस्टम की स्थापना जरूरी की जा सकती है.
नेहा बोरा ने बांग्लादेश को लेकर जो कहा है, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए खतरनाक है. (फोटो: PTI)
हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं दिखा?
चलिए मान लेते हैं कि नेहा बोरा कि आप मौजूदा सिस्टम से संतुष्ट नहीं हैं. लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि आप अत्याचारियों के साथ खड़े हो जाएं. बांग्लादेश में हुए कथित मूवमेंट (नेहा बोरा की नजर में) के दौरान और उसके बाद क्या हुआ, क्या आपको मालूम नहीं है. हिन्दू महिलाओं के साथ दरिंदगी की गई. हिन्दुओं के साथ हिंसा की गई. उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया. सरेआम उनकी हत्याएं की गईं. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा मई 2026 में कहा था कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच देश के 62 जिलों और सभी 8 प्रशासनिक मंडलों में हिंसा की 505 घटनाएं दर्ज की गईं. इन घटनाओं में हत्या, अपहरण, शारीरिक हमले, यौन हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और जमीन पर कब्जे जैसे मामले शामिल हैं. ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (एचआरसीबीएम) ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘द परसीक्यूशन कंटिन्यूज: माइनॉरिटी कम्युनिटीज अंडर सस्टेन्ड अटैक इन बांग्लादेश’ में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी. रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज घटनाओं में अपहरण और शारीरिक हमले के 144 मामले शामिल हैं. वहीं, संपत्तियों पर हमले, जमीन पर कब्जे, आगजनी और लूटपाट की 132 घटनाएं दर्ज की गईं. इसके अलावा हत्या और संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के 100 मामले सामने आए. संगठन ने मंदिरों पर हमले और धार्मिक हिंसा की 95 घटनाओं का भी उल्लेख किया है. रिपोर्ट में दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म समेत यौन हिंसा के 28 मामले तथा ईशनिंदा से जुड़े छह मामलों को दर्ज किया गया है.
नेहा बोरा का इरादा क्या है?
अब सवाल उठता है कि बांग्लादेश को अपना आदर्श बताने वाली नेहा बोरा का इरादा क्या है? वे असल में क्या चाहती हैं? नीट पेपर लीक के जरिये एक मंत्री को पद से हटाया गया और उसके बाद यह मामला देश के मुख्य चुनाव आयुक्त तक पहुंच गया. नेहा बोरा जिस विचारधारा और मानसिकता से आती हैं, भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में वह अपन रसूख तकरीबन खो चुका है. केरल को छोड़ दिया जाए तो लेफ्ट फ्रंट आज के दिन कहीं पानी मांगने के लायक नहीं बचा है. ऐसे में नेहा बोरा के इस बयान को सिर्फ वजूद बचाने और येन केन प्रकारेण खुद को प्रासंगिक बनाए रखने का कुत्सित प्रयास मात्र है. वरना बांग्लादेश क्या किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकता है!