Jio IPO: निवेशकों का इंतजार जल्द होगा खत्म, आएगा देश का सबसे बड़ा आईपीओ, Meta-गूगल भी हैं हिस्सेदार

Jio IPO: निवेशकों का इंतजार जल्द होगा खत्म, आएगा देश का सबसे बड़ा आईपीओ, Meta-गूगल भी हैं हिस्सेदार


रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platform) का आईपीओ शेयर बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है. कंपनी 21 से 23 अक्टूबर के बीच अपना आईपीओ लाने की तैयारी में है. इसके जरिए करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखा गया है. यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में रुपये के हिसाब से सबसे बड़ा आईपीओ होगा. इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ करीब 27,870 करोड़ रुपये का था. जियो के आईपीओ पर निवेशकों की नजर इसलिए भी है क्योंकि कंपनी के कारोबार में मेटा और गूगल जैसी ग्लोबल कंपनियों की हिस्सेदारी है.

हालांकि, इस आईपीओ को लेकर उत्साह के साथ कुछ सवाल भी हैं. कंपनी खुद को सिर्फ टेलीकॉम कारोबार तक सीमित नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की बड़ी कंपनी के तौर पर पेश करती है. लेकिन बाजार के कुछ जानकारों का मानना है कि जियो की कमाई का बड़ा हिस्सा इंटरनेट डेटा और टेलीकॉम सर्विसेस से आता है. ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि कंपनी के प्राइस बैंड है और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए जियो की क्या प्लान बना रही है.

कितने शेयर बिकेंगे और क्या होगी कीमत?

जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए करीब 27 करोड़ शेयर बेचेगी. हर शेयर का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया गया है. यानी निवेशकों को इसी दायरे में शेयर खरीदने का मौका मिलेगा. कंपनी की मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी है.

आईपीओ के अपर प्राइस बैंड पर जियो प्लेटफॉर्म्स की कुल वैल्यू करीब 108 अरब डॉलर आंकी गई है. यह पहले लगाए जा रहे कुछ अनुमानों से कम है. आईपीओ के तहत मेटा और गूगल अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगी.

निवेशकों की नजरें आईपीओ पर टिकी

मुंबई की वित्तीय सेवा कंपनी DRChoksey Finserv के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन चोकसी के मुताबिक, जियो की पहचान भले ही टेक्नोलॉजी कंपनी के तौर पर बनाई जा रही हो, लेकिन इसका मुख्य कारोबार टेलीकॉम सेवाएं देना है. जियो के मनोरंजन और गेमिंग ऐप लोगों का इंटरनेट इस्तेमाल बढ़ाते हैं, लेकिन कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा डेटा और टेलीकॉम सेवाओं से आता है. इसलिए निवेशक यह देखेंगे कि कंपनी की तय कीमत उसके कारोबार और भविष्य में कमाई की संभावनाओं के हिसाब से कितनी सही है.

रिलायंस, मेटा और गूगल की कितनी हिस्सेदारी?

CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज की है. कंपनी के पास जियो का 66% से ज्यादा हिस्सा है. वहीं, फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा से जुड़ी जाधू होल्डिंग्स की हिस्सेदारी करीब 10% है. गूगल इंटरनेशनल के पास लगभग 7.7% हिस्सा है. खास बात यह है कि आईपीओ के दौरान मेटा और गूगल अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगी. इससे आईपीओ में उनकी मौजूदा हिस्सेदारी बनी रहेगी. निवेशकों के लिए इन बड़े निवेशकों की मौजूदगी के साथ जियो की कमाई, कर्ज और भविष्य की कारोबारी योजनाओं को समझना भी जरूरी होगा.

सैटेलाइट इंटरनेट में भी उतरने की तैयारी

Jio अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेस शुरू करने की योजना पर भी काम कर रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन का नेटवर्क बनाने की योजना रखती है. इसका मकसद दूर-दराज के इलाकों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है. इस सेक्टर में जियो का मुकाबला एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक से हो सकता है. जियो का आईपीओ निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है.



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