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Dehradun News: जिस मां ने अंगुली पकड़कर दुनिया दिखाई, आज उसी को दो वक्त की रोटी और छत के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं. देहरादून में 70 साल की एक बेसहारा बुजुर्ग महिला पिछले डेढ़ साल से अपनी लाठी टेके इंसाफ की आस में हर हफ्ते जिलाधिकारी दफ्तर की चौखट नाप रही है. बीमारी से लाचार शरीर, सिर से उठा पति का साया और बेटों की बेरुखी के बीच व्यवस्था के आश्वासन भी अब तक उसके आंसुओं को पोंछ नहीं पाए हैं.
देहरादून: पति का साया सिर से उठने के बाद बेसहारा हुई एक दुखियारी मां पिछले डेढ़ साल से इंसाफ और भरण-पोषण की उम्मीद में देहरादून जिलाधिकारी के दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर है. जिन बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वही कलयुगी बेटे आज न सिर्फ मां को दो वक्त की रोटी देने से इनकार कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके साथ आए दिन मारपीट और मानसिक प्रताड़ना भी करते हैं. आर्थिक तंगी से जूझ रही वृद्धा के पास अब न तो अपना पेट पालने के लिए पैसा बचा है और न ही रहने का कोई सुरक्षित ठिकाना है.
सरकारी दफ्तरों की चौखट पर अपनी लाठी टेके खड़ी यह पीड़िता हर जनसुनवाई में अपनी आपबीती सुनाकर न्याय की गुहार लगाती है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसे अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है. बेटों की बेरुखी और व्यवस्था की इस अनदेखी के बीच वृद्धा आज भी इस उम्मीद में आस लगाए बैठी है कि शायद कभी उसे अपना हक और शांतिपूर्ण जीवन मिल सके. देहरादून के राजपुर क्षेत्र की रहने वाली 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला मीना देवी ने बताया कि वह पिछले डेढ़ साल से जिलाधिकारी के दफ्तर आ रही हैं ताकि उन्हें न्याय मिल सके और अपना पेट पालने के लिए बच्चों से खर्च मिल सके.
अस्पताल का खर्च और बेटों का झगड़ा
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी की ओर से बच्चों को पत्र भी पहुंचाया गया है जिसमें हर महीने खर्च दें, लेकिन उन्हें भरण-पोषण का खर्च नहीं मिलता है और उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बेटे-बहू उनसे झगड़ा करते हैं, कई बार मारपीट भी हो जाती है. उन्होंने बताया कि उनके पति को गुजरे हुए 10 साल बीत चुके हैं. छोटे बेटे का एक्सीडेंट हो गया था इसीलिए वह काम नहीं कर पाता है, उसकी दवाओं का खर्च भी निकलना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने बताया पहले वह जच्चा-बच्चा की मालिश करती थीं लेकिन अब उनकी कमर और पैर दर्द के कारण वे यह मेहनत नहीं कर पाती हैं.
इलाज के पैसे नहीं, प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
मीना देवी ने बताया कि उनके पैरों में कोई समस्या है जिसके कारण डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन करवाने की सलाह दी है, लेकिन उन्होंने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं मैं कहां से ऑपरेशन करवाऊंगी? उन्होंने बताया कि उनके बेटे देते भी हैं तो 3 महीने में 1500, इसमें वह अपना पेट भरेंगी या दवाओं का खर्च करेंगी. दुखी होकर उन्हें अपने उन बेटों की शिकायत जिलाधिकारी के पास करनी पड़ रही है जिन्हें उन्होंने जन्म दिया और उनकी परवरिश की. जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि बुजुर्ग महिला के बेटों को पहले भी पत्र भेजा गया है, अगर वह अपनी माता का भरण-पोषण नहीं करते हैं तो उन पर सख्त कदम उठाया जाएगा.