राजस्थान पंचायत चुनाव : सवाई माधोपुर जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बदलता रहा है सियासी समीकरण

राजस्थान पंचायत चुनाव : सवाई माधोपुर जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बदलता रहा है सियासी समीकरण


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Sawai Madhopur Zila Parishad Chunav : सवाई माधोपुर जिले में जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार सियासी मुकाबला होता रहा है. यहां जिला प्रमुख के पद पर साल 2000 से लेकर अब तक बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने जिम्मेदारी संभाली है. बीते ढाई दशक में जिला परिषद की सत्ता में कई बार परिवर्तन हुआ और राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं.

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सवाई माधोपुर जिला परिषद में कांग्रेस और बीजेपी को लगभग बराबर मौका मिलता रहा है.

सवाई माधोपुर. सवाई माधोपुर जिला राजस्थान में राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम है. वर्तमान में यहां से बीजेपी के कद्दावर नेता किरोड़ीलाल मीणा सूबे की भजनलाल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. मीणा को जमीनी जुड़ाव वाला नेता माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में उनकी साख दूसरे नेताओं से बिल्कुल अलग है. सवाई माधोपुर की जनता लोकसभा और विधानसभा चुनावों से लेकर पंचायती राज संस्थानों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों को मौका देती रही है. यहां कभी भी एक पक्षीय माहौल नहीं रहा.

यहां जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए भी सियासी समीकरण समय-समय पर भाजपा और कांग्रेस दोनों के फेवर में होते रहे हैं. जिला परिषद के पिछले कार्यकाल में सवाई माधोपुर में कांग्रेस काबिज थी. इस बार लोगों की नजरें इस बात पर है कि क्या कांग्रेस फिर से अपना जिला प्रमुख बनाएगी या फिर बीजेपी उससे कुर्सी छीन लेगी. बीजेपी और कांग्रेस में परिसीमन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए दोनों के बीच जोरदार टक्कर होने के आसार हैं.

ढाई दशक में बीजेपी 15 और कांग्रेस 10 साल काबिज रही है
कुल 31 वार्डों वाली सवाई माधोपुर जिला परिषद चुनाव में इस बार बीजेपी के कद्दावर नेता किरोड़ीलाल मीणा की साख दांव पर है. वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक दानिश अबरार और बामनवास विधायक इन्द्रा मीणा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है. सवाई माधोपुर इलाका भी दौसा की तरह मीणा और गुर्जर बाहुल्य है. इस बार यहां जिला प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है. बीते 25 साल में 15 और 10 साल तक जिला परिषद पर काबिज रह चुकी है

पांच साल में तीन जिला प्रमुख रहे
सवाई माधोपुर जिला परिषद के इतिहास बड़ा रोचक रहा है. यहां 12 फरवरी 2000 को भाजपा के पृथ्वीराज मीणा जिला प्रमुख बने थे. उसके बाद यहां सियासी उठापटक हुई. इसमें 17 जनवरी 2003 को यह कुर्सी कांग्रेस के पास चली गई थी और पंखीलाल मीणा जिला प्रमुख बने. लेकिन वे बहुत कम समय तक जिला प्रमुख रहे. वे 14 अगस्त 2003 तक ही इस कुर्सी रह पाए. उसके बाद पृथ्वीराज मीणा ने फिर से जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली. दूसरी बार जिला प्रमुख बनने के बाद वे 10 फरवरी 2005 तक इस पद पर रहे.

2005 के बाद सभी जिला प्रमुखों ने पूरा किया अपना कार्यकाल
मीणा के बाद 10 फरवरी 2005 को भाजपा के प्रहलाद मथुरिया जिला प्रमुख बने. उन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. वे 10 फरवरी 2010 तक जिला प्रमुख के पद पर रहे. मथुरिया के बाद भी सवाई माधोपुर जिला प्रमुख की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा कायम रहा और सुनीता गुर्जर ने जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली. सुनीता गुर्जर ने भी पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. करीब 15 बरसों से जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए कसमसा रही कांग्रेस ने आखिरकार साल 2015 में इस पर कब्जा जमा लिया और विनीता मीणा इस पर आसीन हुई.

कांग्रेस लगातार 10 साल से कुर्सी पर काबिज है
विनीता मीना 7 फरवरी 2015 से 7 फरवरी 2020 तक जिला प्रमुख रही. एक बार कुर्सी पर काबिज होने के बाद कांग्रेस ने इसे छोड़ा नहीं. अगले कार्यकाल में भी जिला प्रमुख का पद कांग्रेस के पास रहा. 6 सितंबर 2021 को सुदामा देवी मीना कांग्रेस की जिला प्रमुख बनीं. सुदामा देवी ने भी पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. अब फिर से जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने है. इस बार परिसीमन के कारण ग्रामीण राजनीति के कई समीकरण बदल गए हैं. लिहाजा मुकाबला और कड़ा हो गया है.



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