मौसम के बदलते मिजाज से बिगड़ सकता है खेती का पूरा गणित, रबी फसलों की बुवाई से पहले किसान अपनाएं ये जरूरी टिप्स

मौसम के बदलते मिजाज से बिगड़ सकता है खेती का पूरा गणित, रबी फसलों की बुवाई से पहले किसान अपनाएं ये जरूरी टिप्स


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मौसम के उतार-चढ़ाव से बिगड़ सकता है फसल चक्र, किसान इन बातों का रखें ध्यान

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Bhilwara Agriculture News: भीलवाड़ा में मौसम के लगातार बदलते मिजाज और बेमौसम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है. अक्टूबर 2026 के पहले सप्ताह में दिन का तापमान 37 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में तापमान करीब 33 डिग्री था. बढ़ती गर्मी का असर अगेती सरसों, चने और सब्जियों की बुवाई पर पड़ने की आशंका है. इससे रबी फसलों की बुवाई में देरी और फसल चक्र प्रभावित हो सकता है.

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भीलवाड़ा – इस साल मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और बेमौसम बारिश के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. मौसम के इस उतार-चढ़ाव का असर खेतों में खड़ी फसलों और उनकी पैदावार पर भी देखने को मिला है. अब इसका असर आने वाली रबी की फसल पर पड़ने की आशंका है. मौसम के उलट फेर के वजह से बुवाई और फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इससे रबी की बुवाई में देरी होने के साथ फसल चक्र भी आगे बढ़ सकता है. मानसून की विदाई के साथ अक्टूबर ने गर्मी के मई-जून से तेवर दिखा दिए हैं. गत साल 2025 में 3 अक्टूबर को तापमान 33.2 डिग्री था, जबकि 2026 में 4 व 5 अक्टूबर को दिन का पारा 37 डिग्री दर्ज किया गया. बीते साल की तुलना में करीब 4 डिग्री अक्टूबर के पहले सप्ताह के दिन ज्यादा तापमान रिकार्ड किया गया. अक्टूबर की यह गर्मी अगेती सरसों, चना और सब्जियों की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें ला दी है.

ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेती से जुड़े फैसले लें. खेतों में नमी की स्थिति की जांच करें और बुवाई से पहले मिट्टी की तैयारी पर विशेष ध्यान दें. बिना जरूरत खेतों में सिंचाई करने से बचें और मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही खाद व दवाओं का इस्तेमाल करें. साथ ही फसल का चयन स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति के हिसाब से करें.

खेत में सरसों की बुवाई करें
कृषि विभाग के सयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने बताया कि मौसम चक्र में हुए बदलाव ने फसल चक्र को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है. औसतन अक्टूबर महीने में जो तापमान अमूमन रहता है. उस से 3 से 4 डिग्री तापमान इस समय अधिक चल रहा है. अभी सरसों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है मगर बढ़ते तापमान के चलते सरसों की बुवाई नहीं हो पा रही है. उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि जिनकी खेतों में नमी है वही अपने खेत में सरसों की बुवाई करें.

किसान की फसल की लागत बढ़ना तय
भीलवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़ जिले में 15 अक्टूबर के आसपास सरसों की बुवाई अमूमन शुरू हो जाती है. मगर इस बार तापमान ज्यादा रहने से काम से कम 15 दिन बुवाई आगे बढ़ती दिख रही है. मौजूदा हालात में 30 अक्टूबर तक बुवाई शुरू होने का अनुमान है. मानसून अच्छा नहीं बरसाने से पहले ही जल से खाली पड़े हैं. उस पर अभी सर्दी भी शुरू नहीं हुई है तो सब्जी और सरसों की बुवाई पर असर आ रहा है. जिससे इस बार करीब डेढ़ से दो गुना दाम बढ़ने की उम्मीद है. जिससे आम जन को महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है. किसान की फसल की लागत बढ़ना तय है. ऐसे में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा.



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