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Purnia 150 Year Old Famous Nashta Shop: पूर्णिया के मधुबनी चौक पर स्थित डेढ़ सौ साल पुरानी मधुबनी मिष्ठान भंडार दुकान में सालों भर बिना प्याज और लहसुन के समोसे और लिट्टी मिलते हैं. मंदिर के पास होने के कारण यहां शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है. इस दुकान को परिवार की पांचवी पीढ़ी संभाल रही है.
पूर्णिया. नवरात्रि आते ही कई लोग लहसुन-प्याज खाना बंद कर देते हैं, जबकि साधु-संत सालों भर लहसुन-प्याज से परहेज करते हैं. ऐसे में नवरात्रि के मौसम में कई लोग बिना प्याज-लहसुन के समोसे खाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसी दुकान नहीं मिलती, जहां प्याज-लहसुन का इस्तेमाल न होता हो. ऐसे में अगर आप भी पूर्णिया में रहते हैं और नवरात्रि का व्रत करते हैं या नवरात्रि के दौरान बिना प्याज-लहसुन के समोसे खाना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है.
पूर्णिया की इस दुकान में सालों भर बिना प्याज-लहसुन के समोसे मिलते हैं. इसके लिए आपको पूर्णिया के मधुबनी चौक पर स्थित मधुबनी मिष्ठान भंडार में आना होगा. यह एक ऐसी दुकान है, जहां आपको नवरात्रि ही नहीं, बल्कि सालों भर बिना प्याज और लहसुन के समोसे और लिट्टी खाने को मिलेंगे.
150 साल पुरानी दुकान
इस बारे में जानकारी देते हुए मधुबनी मिष्ठान भंडार के मालिक बद्री प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि उनकी यह डेढ़ सौ साल पुरानी दुकान मधुबनी चौक पर स्थित है. इस दुकान में आज तक बिना प्याज-लहसुन के ही समोसे बनाए जाते हैं. पांच पुश्तों से वह अपनी इस दुकान को इसी जगह पर चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अपनी दुकान में किसी भी चीज को बनाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं करते हैं.
इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर उनकी दुकान से सटी हुई है. मंदिर में साधु-संत और पुजारी आते हैं और उनकी दुकान पर मिठाई सहित समोसे का आनंद लेते हैं. इसलिए वह अपनी दुकान पर बिना प्याज-लहसुन के ही समोसे बेचते हैं.
पांच पुश्तों से बन रहा बिना प्याज-लहसुन का खाना
उन्होंने कहा कि डेढ़ सौ साल पुरानी इस दुकान पर पांच पुश्तों से बिना प्याज और लहसुन के समोसे, लिट्टी और अन्य चीजें बनाई जा रही हैं, जो लोगों को खूब पसंद आती हैं. ऐसे में अगर आप भी बिना प्याज-लहसुन के समोसे या लिट्टी खाना चाहते हैं, तो पूर्णिया के मधुबनी चौक स्थित मधुबनी मिष्ठान भंडार में पहुंच सकते हैं. यहां आपको बिना प्याज-लहसुन वाले समोसे ₹12 प्रति पीस मिल जाएंगे. यह दुकान सुबह से लेकर देर शाम तक खुली रहती है और शुद्धता का भी पूरा ख्याल रखा जाता है.