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Counter Drone Missile: मिसाइल, फाइटर जेट, बॉम्बर और तोप-टैंक अब पुरानी बात हो गई है. ड्रोन अब नया हथियार बन चुका है. यूक्रेन ने ड्रोन से रूस की नाक में दम कर रखा है. वहीं, ईरान ने ड्रोन के जरिये अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का बुरा हाल कर दिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन वॉरफेयर की अहमियत का पता चला. इसके बाद भारत ने ड्रोन फ्लीट और काउंटर ड्रोन सिस्टम पर अपना फोकस बढ़ा दिया है.
भारत की एक कंपनी ने काउंटर-ड्रोन मिसाइल डेवलप किया है जो अब ट्रायल के लिए तैयार है. (फाइल फोटो)
Counter Drone Missile: ड्रोन वॉरफेयर 21वीं सदी की हकीकत है. दुनिया के तमाम देश डिफेंस इस उभरते हुए सेक्टर में हजारों-लाखों करोड़ रुपये निवेश कर रहे हैं. ड्रोन के जरिये बहुत ही कम खर्च में दुश्मन खेमे में बड़ी तबाही लाई जा सकती है. ड्रोन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए तमाम तरह के उपाय भी किए जा रहे हैं. इसका पहला लक्ष्य ड्रोन से भी कम लागत में इस खतरे को न केवल टाला जाए, बल्कि उसे पूरी तरह से नष्ट किया जा सके. मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता है. यही वजह है कि अत्याधुनिक ड्रोन के डेवलपमेंट के साथ ही काउंटर ड्रोन सिस्टम भी डेवलप किए जा रहे हैं. भारत की निजी क्षेत्र की कंपनी ने JWALA माइक्रो मिसाइल बनाया है, जिसकी मदद से ड्रोन को तबाह किया जा सकता है. अब इस मिसाइल का ट्रायल किया जाना है. ऐसे में ड्रोन जैसे गंभीर खतरे से ब्रह्मोस और अग्नि-5 के बिना भी निपटा जा सकेगा.