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GST On X Subscription : एलन मस्क की सोशल मीडिया कंपनी एक्स अपने पेड सब्सक्रिप्शन सर्विसेज में जीएसटी नहीं जोड़ती है. जबकि गूगल, नेटफ्लिक्स और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां सब्सक्रिप्शन चार्जेज में जीएसटी जोड़कर ही ग्राहक को बिल भेजती है. एक्स का जीएसटी न लेना अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स प्रीमियम सब्सक्रिप्शन पर जीएसटी नहीं लगाता है.
नई दिल्ली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. अब वे स्टारलिंक सेवाओं को भारत में अनुमति न मिलने से भन्नाए हुए हैं. भारत को लेकर दिए गए उनके बयानों से लोग नाराज हैं. मुंबई के टेक एक्सपर्ट और ओलिव इंटेलिजेंस (Olive Intelligence) के चीफ ग्रोथ ऑफिसर प्रकाश आडवाणी ने अब मस्क की कंपनी एक्स पर अब जीएसटी को लेकर निशाना साधा है. आडवाणी ने एक्स पर ही अपनी एक पोस्ट में एलन मस्क से पूछा है कि X प्रीमियम और अन्य पेड सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स के इनवॉइस से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) क्यों गायब है. आडवाणी के जीएसटी का सवाल उठाते है बहुत से लोग पूछ रहे हैं कि जीएसटी को लेकर मस्क से चूक हुई है या वो कोई चालाकी कर रहे हैं.
एलन मस्क को टैग की गई पोस्ट में आडवाणी ने लिखा,”मुझे यह देखकर अचंभा हुआ कि भारत में X प्रीमियम और अन्य पेड सब्सक्रिप्शन के बिलों में स्थानीय टैक्स (GST) का कोई जिक्र तक नहीं है. अगर X भारतीय यूजर्स से कमाई कर रहा है, तो उसे भारतीय टैक्स कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा. X को ग्राहकों से GST वसूलकर भारत सरकार के खजाने में जमा कराना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स करते हैं.”
क्या कहता है भारतीय टैक्स कानून?
सवाल केवल बिल पर टैक्स न दिखने का नहीं है, बल्कि कानूनी प्रावधानों का भी है. भारत का टैक्स ढांचा देश के भीतर दी जाने वाली हर तरह की डिजिटल और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन सेवाओं पर स्पष्ट रूप से लागू होता है. इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) एक्ट की धारा 14 के तहत, विदेशी सेवा प्रदाता यदि भारत में गैर-कर योग्य ऑनलाइन प्राप्तकर्ताओं को डेटाबेस एक्सेस या ऑनलाइन सूचना सेवाएं (OIDAR) देते हैं, तो उन्हें IGST का भुगतान करना अनिवार्य है. कोई भी विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल इसलिए भारतीय टैक्स देनदारियों से बच नहीं सकता कि उसका मुख्य दफ्तर या सर्वर भारत की सीमा से बाहर संचालित हो रहा है.
अन्य टेक दिग्गज भर रहे टैक्स, तो X क्यों नहीं?
गूगल, नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई और माइक्रोसॉफ्ट जैसी तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय यूजर्स को अपनी पेड सेवाएं देते वक्त बिल में बकायदा 18% GST जोड़ती हैं और उसे सरकार के पास जमा करती हैं. ऐसे में एलन मस्क के प्लेटफॉर्म द्वारा जारी बिलों में लोकल टैक्स का कॉलम खाली होना गंभीर सवाल खड़े करता है.