चीन ने किस ब्रह्मास्त्र से भेदा इजरायल का कवच? क्या ईरान को थी पल-पल की खबर
Last Updated:
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. चीन ने एक खास सिस्टम के जरिए इजरायल की खास टेक्निक का राज पता किया. यह ईरान की तरफ से ड्रोन और मिसाइल अटैक को ध्वस्त करने का सिस्टम था, जिसका सुराग चीन ने लगा लिया. इससे पूरी संभावना जताई जा रही है कि चीन ने ईरान को इसकी हर एक डिटेल दे दी होगी.
हवाई हमले की फाइल फोटो
मिडिल ईस्ट में ये तनाव वाला साल रहा है. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने मोर्चेबंदी जारी रही. जमकर हमला हुआ और वैसे ही डिफेंस भी देखने को मिला. हालांकि इस पूरी मारामारी के बीच चीन की तरफ से चौंकाने वाला दावा हुआ है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. चीन ने एक खास सिस्टम के जरिए इजरायल की खास टेक्निक का राज पता किया. यह ईरान की तरफ से ड्रोन और मिसाइल अटैक को ध्वस्त करने का सिस्टम था, जिसका सुराग चीन ने लगा लिया. इससे पूरी संभावना जताई जा रही है कि चीन ने ईरान को इसकी हर एक डिटेल दे दी होगी. हालांकि इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं है. लेकिन पहले समझते हैं पूरी बात.
चीन के रिसर्चर्स का कहना है कि उन्होंने एक ऐसा एल्गोरिदम विकसित किया है, जिसकी मदद से ओपन-सोर्स सिविल एविएशन के फ्लाइट डेटा का उपयोग करके इजराइल के आसपास ऐक्टिव संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स का पता लगाया जा सकता है. यह स्टडी झेंगझोउ स्थित पीएलए की इंफॉर्मेशन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी की रिसर्चर दु लान और उनकी टीम की तरफ से की गई है, जिसे ‘जर्नल ऑफ जियोमैटिक्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ में पब्लिश किया गया है.
GPS स्पूफिंग और फ्लाइट डेटा का खेल
रिसर्चर्स के अनुसार जब युद्ध क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस या फिर GPS स्पूफिंग की जाती है, तो इसका असर सिविल एविएशन के डेटा पर भी पड़ता है.विमान के डेटा में अचानक से एबरप्ट जम्प (Abrupt Jumps) दिखते हैं. मतलब ऐसे रास्ते दिखने लगते हैं जो नॉर्मल फ्लाइट रूट से मेल नहीं खाते हैं. चीनी वैज्ञानिकों के इसी एल्गोरिदम ने इन असामान्य फ्लाइट रूट्स का विश्लेषण करके हस्तक्षेप करने वाले सोर्स के संभावित ठिकानों का अनुमान लगाया है.
हाइफा और गाजा के पास मिले दो ठिकाने
चीन की इस रिसर्च टीम ने ईरान के साथ संघर्ष के दौरान 27 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच के 43 दिनों के विमान-ट्रैकिंग डेटा का एनालिसिस किया. वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने भूमध्य सागर के इलाके में दो मुख्य टार्गेट एरिया की पहचान की है.
- टार्गेट एरिया 1: पहला टार्गेट एरिया इजराइल के प्रमुख उत्तरी शहर हाइफा से करीब 80 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित था. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यहां की यूनिट ने ईरान के शहीद-136 जैसे लंबी दूरी के सुसाइड ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए ‘डायनेमिक स्पूफिंग रणनीति’ का इस्तेमाल किया होगा.
- टार्गेट एरिया 2: दूसरा टार्गेट एरिया गाजा पट्टी से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था. रिसर्चर्स का मानना है कि इस क्षेत्र में गाजा के समूहों और यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले कम लागत वाले, कम दूरी के ड्रोन को रोकने के लिए ‘स्टैटिक सिंगल-पॉइंट स्पूफिंग’ का यूज किया गया.
कम लागत और खास तकनीक
चीन की इस रिसर्च टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उनकी यह तकनीक बेहद किफायती है. इसकी निगरानी के लिए लिए किसी महंगे या फिर अतिरिक्त उपकरण की जरूरत नहीं होती है. यह ओपन-सोर्स पब्लिक डेटा (ADS-B सिस्टम) पर आधारित है और समय पर सटीक जानकारी देने में सक्षम है. यह तकनीक विदेशी संघर्ष क्षेत्रों में सिविल एविएशन की सुरक्षा और स्पूफिंग मामलों की निगरानी के लिए बेहद मददगार साबित हो सकती है.
मिडिल ईस्ट का इलाका ईरान बनाम इजरायल और अमेरिका की जंग में उलझा हुआ है. 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने के बाद से यह संघर्ष जारी है और अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. उस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी. बीच में युद्धविराम और बातचीत की तमाम कोशिश हुई लेकिन फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. यमन में हूती ग्रुप की एंट्री के बाद से मामला उलझ गया है.