UP Politics: कांग्रेस और सपा के 3 बागी हुए BJP के, राकेश-अभय और विनोद ने छोड़ा साथ, कहा- कोई नहीं कर पाया वो…


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सपा के तीन बागी विधायक-अमेठी के गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या के गोसाईगंज से अभय सिंह और जालौन के कालपी से विनोद चतुर्वेदी आज आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए हैं. स्मृति ईरानी सहित कई दिग्गज नेता मौके पर मौजूद रहे.

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कांग्रेस और सपा के 3 बागी हुए BJP के, राकेश-अभय और विनोद ने छोड़ा साथZoom

तीन विधायकों ने भाजपा का दामन थामा.

UP Politics News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाले हैं. इसे देखते हुए सभी पार्टियां जोर-शोर जुटी हैं. वार-पलटवार के साथ बागी नेताओं का भी खेल जारी है. इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) को भी तगड़ा झटका लगा है. सपा के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए. इसमें कांग्रेस के गढ़ गौरीगंज के लगातार तीन बार के विधायक राकेश प्रताप सिंह, उनके साथ सपा के दो और बागी अयोध्या के गोसाईगंज विधायक अभय सिंह और जालौन के कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं. इन लोगों ने कमल का दामन थाम लिया.

आज यानी 14 अक्टूबर को अमेठी के विधायक आवास मंगलम पर सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम में राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी व प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पहुंचे. इस दौरान प्रदेश सरकार के कई मंत्री विधायक कार्यक्रम में मौजूद रहे. वहीं, हजारों की संख्या में समर्थक व कार्यकर्ता भी मौके पर रहे. इस दौरान विनोद चतुर्वेदी ने अयोध्या राम मंदिर का जिक्र किया. साथ ही बुंदेलखंड के विकास होने की सराहना की.

उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर का उद्घाटन हुआ तो हमारे अध्यक्ष जी ने कहा था कि जो चलना चाहे चल सकता है. मगर, हमारे हाईकमान ने मना कर दिया. ये सब आस्था पर चोट थी. वहीं बुंदेलखंड के लिए योगी ने जो विकास किया वो इतनी सालों में किसी सरकार ने नहीं किया. जनता को विकास चाहिए. हम लोग इसी के लिए चुने जाते हैं.

बगापत की कहानी

इन विधायकों की बगावत की कहानी कोई रातों-रात नहीं लिखी गई है. दरअसल, साल 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने के बाद से ही राकेश प्रताप सिंह और अन्य बागी विधायक व्यावहारिक रूप से सपा से अलग हो चुके थे. हालांकि, पार्टी ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन लगभग 16 महीने बाद जून 2025 में सपा ने राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय और अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया. पार्टी का तर्क था कि इन्हें वापसी का मौका दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. निष्कासन के बाद से ये तीनों विधानसभा में ‘अनअटैच्ड’ (असंबद्ध) सदस्य के रूप में माने जा रहे हैं, यानी उनकी विधायकी तो बरकरार है, लेकिन वे सपा के अधिकृत सदस्य नहीं हैं. अगस्त 2026 में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद ही राकेश प्रताप के भाजपा में जाने की पटकथा पूरी तरह से तय हो गई थी.

राकेश प्रताप सिंह अपने सख्त और आक्रामक राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. इससे पहले अक्टूबर 2021 में उन्होंने अपनी ही गौरीगंज क्षेत्र की दो जर्जर सड़कों के मुद्दे पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उनका आरोप था कि सदन में सरकार के आश्वासन के बावजूद सड़क सुधार का काम नहीं हुआ. इसके विरोध में उन्होंने लखनऊ में अनशन भी किया था. बाद में इस्तीफा वापस लिया और 2022 में फिर से सपा के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की थी.
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