रूस और जापान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी में अब एक खतरनाक क्लाइमैक्स आ गया है. रूस की खूंखार इंटेलिजेंस एजेंसी एफएसबी ने एक जापानी पत्रकार को जासूसी के गंभीर आरोपों में दबोच लिया है. रूस का आरोप है कि ये पत्रकार उसके सबसे सेंसेटिव सखालिन द्वीप पर रूसी सेना की खुफिया जानकारियों की चोरी कर रहा था. यूक्रेन युद्ध और कुरील द्वीपों को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से ही आग सुलग रही थी, और अब इस जापानी पत्रकार की गिरफ्तारी ने उस आग में पेट्रोल छिड़कने का काम कर दिया है. पुतिन के राज में जासूसी के इस जुर्म की खौफनाक सजा मिल सकती है.
कौन है गिरफ्तार पत्रकार और क्या हैं गंभीर आरोप
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस यानी एफएसबी ने जापान के जाने-माने अखबार होक्काइडो शिंबुन के लिए काम करने वाले एक पत्रकार को सखालिन इलाके से हिरासत में लिया है.
रूस के विदेश मंत्रालय की तेजतर्रार प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने इस गिरफ्तार पत्रकार का नाम इमाई युकी बताया है. रूसी एजेंसियों का दावा है कि इमाई युकी रूस के भीतर रहकर बकायदा एक जासूसी का सिंडिकेट चला रहा था.
एफएसबी का कहना है कि इस पत्रकार ने रूस की सेना की ताकत, डिफेंस यूनिट्स और कई बेहद सीक्रेट रणनीतिक संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा तैयार किया था. वो ये सारा सेंसिटिव डेटा जापानी खुफिया एजेंसियों को सौंपने की फिराक में था.
गिरफ्तारी के ठीक बाद उसे सखालिन से सीधे राजधानी मॉस्को भेज दिया गया, जहां एक रूसी अदालत ने उसे मुकदमे से पहले की जेल यानी प्री-ट्रायल डिटेंशन में भेज दिया है. रूस के बेहद कड़े और निर्मम जासूसी कानूनों के मुताबिक, अगर इमाई युकी पर ये आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे अधिकतम बीस साल तक की लंबी और खौफनाक कैद की सजा भुगतनी पड़ सकती है.
विदेशी पत्रकारों का गलत इस्तेमाल न करे टोक्यो – रूस की खुली चेतावनी
इस मामले के सामने आने के बाद रूसी विदेश मंत्रालय की तरफ से टोक्यो यानी जापान सरकार पर बहुत तीखा हमला बोला गया है. प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने साफ शब्दों में कहा है कि रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखकर खुफिया जानकारियां जुटाने के लिए विदेशी संवाददाताओं या पत्रकारों का इस्तेमाल करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है.
जाखारोवा ने चेतावनी दी है कि इस तरह की घटिया हरकतों से मॉस्को और टोक्यो के बीच बचे-कुचे कूटनीतिक रिश्ते भी पूरी तरह नेस्तनाबूद हो जाएंगे और दोनों देशों के बीच का तनाव अब ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएगा जहां से वापसी मुमकिन नहीं होगी.
दूसरी तरफ, रूस की राजधानी मॉस्को में मौजूद जापानी दूतावास ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनकी सरकार अपने देश के पत्रकार की गिरफ्तारी के पीछे की असली वजह और रूसी दावों की सच्चाई का पता लगाने में जुटी हुई है. वहीं, गिरफ्तार पत्रकार का संस्थान होक्काइडो शिंबुन भी अपने स्तर पर पूरी खबर की सच्चाई टटोल रहा है.
सखालिन और कुरील द्वीप: रूस के लिए क्यों इतने ज्यादा अहम हैं?
सखालिन द्वीप रूस के फार ईस्ट इलाके में स्थित है. ये भौगोलिक रूप से जापान के होक्काइडो द्वीप के ठीक उत्तर में और कुरील द्वीप समूह के पश्चिम में फैला हुआ है. रूस के लिए ये पूरी जमीन किसी कवच से कम नहीं है.
- नौसेना का सबसे बड़ा गढ़: सखालिन और इसके आसपास के इलाके रूस की प्रशांत महासागरीय नौसेना के लिए रीढ़ की हड्डी जैसे हैं. यहीं से ओखोटस्क सागर और उत्तरी प्रशांत महासागर के तमाम अहम समुद्री रास्तों पर रूसी नौसेना अपनी पैनी नजर रखती है.
- परमाणु सबमरीन का ठिकाना: ओखोटस्क सागर में ही रूस की खतरनाक परमाणु मिसाइलों से लैस पंडुब्बियां यानी सबमरीन तैनात रहती हैं. ऐसे में इस इलाके की छोटी से छोटी सैन्य जानकारी भी लीक होना रूस अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मानता है.
दूसरे विश्व युद्ध के जमाने से सुलग रही दुश्मनी
रूस और जापान के बीच केवल आज का यूक्रेन युद्ध ही विवाद की जड़ नहीं है, बल्कि इनके बीच जमीन का एक बहुत पुराना और अनसुलझा झगड़ा भी है. कुरील द्वीप समूह के चार ऐसे द्वीप हैं जिन पर रूस का नियंत्रण है, लेकिन जापान उन पर अपना ऐतिहासिक हक जताता है और उन्हें अपने उत्तरी क्षेत्र कहता है.
ये खटास द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी दिनों से चली आ रही है, जब सोवियत संघ की सेना ने इन पर कब्जा जमा लिया था. सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इसी क्षेत्रीय विवाद की वजह से द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के इतने दशक बाद भी रूस और जापान के बीच आज तक कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हो पाया है.
ये तनाव तब और ज्यादा भड़क गया था जब कुछ महीने पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इन विवादित द्वीपों में से एक इटुरुप का अचानक दौरा कर लिया था. पुतिन के उस दौरे पर जापान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था.
यूक्रेन युद्ध ने गहरी कर दी दोनों देशों के बीच की खाई
फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया, तो जापान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों का आंख मूंदकर साथ दिया. जापान ने रूस पर कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध थोप दिए. इस बात से भड़के रूस ने बिना देर किए जापान को आधिकारिक रूप से ‘अनफ्रेंडली’ देशों की लिस्ट में डाल दिया.
रूस का ये भी आरोप है कि जापान न सिर्फ कीव को पैसे और हथियारों से मदद कर रहा है, बल्कि अमेरिका के इशारे पर पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र में युद्ध के हालात पैदा कर रहा है. जापानी पत्रकार इमाई युकी की ये गिरफ्तारी इसी भूराजनीतिक महासंग्राम का एक नया और डरावना अध्याय है. कूटनीतिक रिश्ते पहले ही रसातल में जा चुके हैं और अब इस गिरफ्तारी ने दोनों देशों के बीच तनाव को दुश्मनी की आग में बदल दिया है.