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Munger News: नवरात्र में लोग देवी माता की भक्ति में लीन हैं. इसी बीच मुंगेर में भक्ति का अलग रंग दिखाई दिया. जहां विश्वजीत कुमार ने अपनी छाती पर कलश स्थापित कराया. अब वह 9 दिनों तक लेटे रहेंगें. बिना अन्न-जल ग्रहण किए वह कठिन तपस्ता कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
9 दिन तक छाती पर कलश रखते हैं विश्वजीत.
मुंगेरः देश भर में नवरात्र पर भक्ति के अलग-अलग नजारे देखने को मिल रहे हैं. इसी तरह बिहार के मुंगेर में अनोखी भक्ति देखने को मिली. यहां के असरगंज प्रखंड स्थित कमराय चौक दुर्गा मंदिर में विश्वजीत कुमार सिंह (33) अपनी छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों की कठिन साधना कर रहे हैं. दावा है कि इस दौरान वे अन्न-जल ग्रहण नहीं करते. लगातार चौथे साल उनकी इस साधना देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं.
9 दिनों की कठिन साधना
विश्वजीत कुमार मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड स्थित कमराय चौक के रहने वाले हैं. यहां दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ है और हर किसी की निगाहें 33 वर्षीय विश्वजीत कुमार सिंह पर टिकी हैं. जो अपनी छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों की कठिन साधना में लीन हैं. नवरात्र के पहले दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित मुकेश कुमार झा ने विधि-विधान से उनकी छाती पर कलश स्थापित कराया. इसके बाद से विश्वजीत लगातार लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं. उनकी इस साधना को देखने के लिए आसपास के गांवों के साथ दूसरे जिलों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
पानी तक नहीं करते ग्रहण
विश्वजीत कुमार सिंह मूल रूप से बांका जिले के शंभूगंज थाना क्षेत्र के चटमाडीह गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता स्वर्गीय रंजीत प्रसाद सिंह थे. उनकी बहन की शादी कमराय गांव में हुई है. इसी वजह से कमराय चौक दुर्गा मंदिर से उनका गहरा जुड़ाव है. विश्वजीत की पत्नी अवंतिका देवी ने बताया कि- साधना के दौरान वे नौ दिनों तक किसी प्रकार का आहार ग्रहण नहीं करते. इस दौरान तुलसी और गंगाजल से उनका चेहरा पोछा जाता है. पत्नी का कहना है कि इस कठिन साधना को करने से पहले विश्वजीत कई महीनों तक अभ्यास भी करते हैं.
4 साल से कर रहे अनोखी भक्ति
खास बात यह है कि विश्वजीत की यह साधना कोई पहली बार नहीं है. वे लगातार चौथे वर्ष अपनी छाती पर कलश स्थापित कर मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं. उनकी इस कठिन साधना को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है. मंदिर के सेवक मुकेश कुमार सिंह और बाबुल कुमार बताते हैं कि विश्वजीत की साधना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. नवरात्र के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए लोगों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है.