Last Updated:
Dairy Farming Tips: भागलपुर में डेयरी फार्मिंग शुरू करने की सोच रहे हैं? सोशल मीडिया देखकर केवल ज्यादा दूध के लिए एचएफ गाय खरीदना नुकसानदेह हो सकता है. विशेषज्ञ अनिल शर्मा के अनुसार भागलपुर जैसे इलाकों में मौसम के अनुकूल साहीवाल, गिर, कांकरेज और राठी जैसी नस्लों या क्रॉस ब्रीड से डेयरी फार्मिंग की शुरुआत करना बेहतर विकल्प है.
Dairy Farming Tips: युवाओं का रुझान अब नौकरी के साथ-साथ बिजनेस और फार्मिंग की ओर भी बढ़ रहा है. खासकर बकरी पालन, मुर्गी पालन और डेयरी फार्मिंग में युवा तेजी से कदम रख रहे हैं. पर जानकारी की कमी और गलत नस्ल का चुनाव कई बार किसानों के लिए नुकसान का कारण बन जाता है. सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर बिना स्थानीय मौसम और पशुपालन की स्थिति समझे फार्म शुरू करना भी बड़ी गलती हो सकती है. अगर आप भागलपुर, बांका, मुंगेर या आसपास के इलाकों में डेयरी फार्मिंग शुरू करने की सोच रहे हैं तो गाय की नस्ल का चुनाव बेहद सोच-समझकर करना चाहिए.
भागलपुर में कौन सी गाय पालना बेहतर?
पशुपालक अनिल शर्मा ने लोकल 18 से बात करते हुए बतलाया कि भागलपुर और आसपास के इलाकों में ऐसी गायों का पालन करना बेहतर रहता है. जो यहां के गर्मी, सर्दी और बारिश जैसे अलग-अलग मौसम में आसानी से रह सकें. उन्होंने बताया कि इन दिनों कई युवा ज्यादा दूध की उम्मीद में सीधे HF यानी होल्सटीन फ्रिजियन गाय खरीद लेते हैं. लेकिन इस नस्ल के बेहतर पालन के लिए सही प्रबंधन, खान-पान, साफ-सफाई और स्वास्थ्य देखभाल की जानकारी जरूरी होती है. जानकारी के अभाव में पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
शुरुआत में क्रॉस ब्रीड पर करें फोकस
अनिल शर्मा ने आगे बतलाया कि अगर कोई नया व्यक्ति डेयरी फार्मिंग शुरू कर रहा है तो उसे सीधे किसी एक विदेशी नस्ल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. स्थानीय मौसम के अनुकूल क्रॉस ब्रीड से शुरुआत करना एक विकल्प हो सकता है. उन्होंने साहीवाल, गिर, कांकरेज और राठी जैसी नस्लों को भी क्षेत्र के हिसाब से बेहतर विकल्प बताया. इन नस्लों को गर्मी और बदलते मौसम में अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से पालने की संभावना रहती है. दूध उत्पादन और पशु की सेहत नस्ल के साथ-साथ उसकी जेनेटिक्स, चारा, प्रबंधन और देखभाल पर भी निर्भर करती है.
दूध के साथ सेहत पर भी दें ध्यान
डेयरी फार्मिंग में केवल ज्यादा दूध देने वाली गाय खरीदना ही सफलता की गारंटी नहीं है. पशु की बीमारी, चारे की लागत, मौसम के अनुकूलन और देखभाल का खर्च भी ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने बताया कि अच्छी नस्ल के साथ अगर संतुलित आहार, साफ पानी, साफ-सुथरा शेड और समय पर टीकाकरण जैसी चीजों का ध्यान रखा जाए तो पशुपालक बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं. इसलिए डेयरी फार्म शुरू करने से पहले अपने इलाके के मौसम, चारे की उपलब्धता, बाजार और पशु चिकित्सक की सलाह को ध्यान में रखते हुए नस्ल का चुनाव करना जरूरी है. सिर्फ सोशल मीडिया पर देखकर किसी नस्ल को खरीदना नुकसान का कारण बन सकता है.