Dussehra 2026: इस बार बारिश नहीं बिगाड़ पाएगी दशहरे का मजा, देहरादून में तैयार हुआ 181 फीट का वाटर प्रूफ रावण

Dussehra 2026: इस बार बारिश नहीं बिगाड़ पाएगी दशहरे का मजा, देहरादून में तैयार हुआ 181 फीट का वाटर प्रूफ रावण


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Dehradun News: देहरादून में इस बार दशहरे पर 181 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा, लेकिन इस बार के पुतलों में एक खास बात है. बारिश से बचाने के लिए पहली बार रावण को वाटरप्रूफ बनाया गया है, ताकि मौसम खराब होने पर भी पिछले साल जैसी परेशानी न हो. हरियाणा के कारीगर तेजिंदर सिंह चौहान अपनी 40 लोगों की टीम के साथ 45 दिनों में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशालकाय पुतले तैयार कर चुके हैं. खास बात यह भी है कि उनकी टीम में हिंदू और मुस्लिम कारीगर मिलकर काम करते हैं. इन पुतलों को बनाने में करीब 31 लाख रुपये खर्च हुए हैं. जानिए इस बार दशहरे पर क्या कुछ खास देखने को मिलेगा.

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देहरादून: पिछले साल दशहरे पर बारिश की वजह से देहरादून में रावण दहन ठीक से नहीं हो पाया था. ऐसे में इस बार आयोजकों ने पहले से ही खास तैयारी की है, ताकि बारिश होने पर भी रावण के पुतलों को नुकसान न पहुंचे. देहरादून में पहली बार वाटरप्रूफ रावण का पुतला तैयार किया गया है. इस बार रावण के पुतले को फाइबरग्लास और खास कपड़ों से बनाया गया है. खास बात यह भी है कि इस बार परेड ग्राउंड में 131 फीट की जगह 181 फीट ऊंचा रावण बनाया जा रहा है. इसके साथ मेघनाथ और कुंभकरण के 70-70 फीट ऊंचे पुतले भी तैयार किए गए हैं.

देहरादून में दशहरे की तैयारियां शुरू हो गई हैं. यहां रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाने का काम पूरा कर लिया गया है. आयोजकों को इस बार भी मौसम को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है, क्योंकि बारिश की संभावना को देखते हुए पुतलों को सुरक्षित रखने के इंतजाम किए गए हैं. इस काम में हरियाणा के मशहूर कारीगर तेजिंदर सिंह चौहान और उनकी टीम ने करीब 45 दिनों तक मेहनत की है.

इस बार 181 फीट ऊंचा होगा रावण
बन्नू बिरादरी के महामंत्री और दशहरा कमेटी के प्रधान संतोख नागपाल ने बताया कि परेड ग्राउंड में पिछले 78 सालों से दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई 131 फीट से बढ़ाकर 181 फीट कर दी गई है. वहीं, रावण के दोनों तरफ मेघनाथ और कुंभकरण के 70-70 फीट ऊंचे पुतले बनाए गए हैं. इन विशाल पुतलों को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.

बारिश से बचाने के लिए खास इंतजाम
पिछले साल बारिश के कारण रावण दहन में परेशानी आई थी. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. पुतलों को बनाने में फाइबरग्लास और विशेष कपड़ों का इस्तेमाल किया गया है, ताकि बारिश होने पर उन्हें कम से कम नुकसान पहुंचे. इसी वजह से इस बार रावण को वाटरप्रूफ रूप दिया गया है.

41 साल से रावण के पुतले बना रहे तेजिंदर
हरियाणा के मशहूर कारीगर तेजिंदर सिंह चौहान पिछले 41 साल से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहे हैं. इस बार उन्होंने अपनी करीब 40 कारीगरों की टीम के साथ 45 दिनों में देहरादून के विशाल पुतले तैयार किए हैं. उनके बनाए पुतलों और काम को कई रिकॉर्ड बुक में जगह मिल चुकी है. साल 2013 में उनके काम को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था.

हिंदू-मुस्लिम कारीगर मिलकर बनाते हैं पुतले
तेजिंदर सिंह चौहान की टीम में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के कारीगर साथ मिलकर काम करते हैं. सभी लोग मिलकर पुतलों को तैयार करते हैं. तेजिंदर के लिए यह काम सिर्फ पुतले बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसे अलग-अलग समुदायों के लोगों को जोड़ने और आपसी भाईचारे का संदेश देने का जरिया भी मानते हैं.

31 लाख रुपये में तैयार हुए तीनों पुतले
इस बार देहरादून में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के तीनों पुतलों को तैयार करने में करीब 31 लाख रुपये खर्च हुए हैं. इसके साथ ही दशहरे के आयोजन के लिए भव्य लंका भी बनाई गई है, जिसे जल्द ही स्थापित किया जाएगा. 20 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे पुतला दहन किया जाएगा. इस आयोजन को देखने के लिए देहरादून के साथ ही प्रदेश के दूसरे इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.



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