5वें नवरात्रि मां स्कंदमाता की पूजा से खुलेंगे तरक्की के द्वार, जानें देवी का प्रिय भोग और मंत्र

5वें नवरात्रि मां स्कंदमाता की पूजा से खुलेंगे तरक्की के द्वार, जानें देवी का प्रिय भोग और मंत्र


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5वें नवरात्रि खुलेंगे तरक्की के द्वार, जानें देवी का प्रिय भोग और मंत्र

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Navratri Day 5 Puja: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता की आराधना से सुख-समृद्धि आती है और सफलता के मार्ग खुलते हैं. उनकी कृपा से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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उज्जैन. हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है. इन 9 दिनों में देवी के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर भक्त सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना करने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है. उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से माता की आराधना करना विशेष फलदायी माना जाता है.

मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं. वह दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं. नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है. बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा वरदमुद्रा में है. नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है. माता कमल पर विराजमान हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि स्कंदमाता अपने भक्तों से बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं. साथ ही माना गया है कि माता की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

मां स्कंदमाता का प्रिय भोग
नवरात्रि के 9 दिन अलग-अलग देवी को तरह-तरह का भोग लगाया जाता है. पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं. पूजन के बाद इसको प्रसाद रूप में ग्रहण करें. इसे ग्रहण करने से संतान और स्वास्थ्य, दोनों की बाधाएं दूर होंगी. शास्त्रों में मां स्कंदमाता की महिमा बताई गई है. इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है, इसलिए मन को एकाग्र और पवित्र रखकर देवी की आराधना करने वाले भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है.

पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जाप
– सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।।

– या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।



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