हर की पौड़ी से 100 मीटर दूर पालीवाल धर्मशाला… चूने-दाल से बनी 2 सदी पुरानी धरोहर, जहां सिर्फ 500 रुपये में मिलता है कमरा

हर की पौड़ी से 100 मीटर दूर पालीवाल धर्मशाला… चूने-दाल से बनी 2 सदी पुरानी धरोहर, जहां सिर्फ 500 रुपये में मिलता है कमरा


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Haridwar Paliwal Dharamshala: धर्मनगरी हरिद्वार में हर की पौड़ी की छांव तले एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है, जो बीते दो सौ सालों से आस्था, परंपरा और वास्तुकला की बेजोड़ मिसाल बनी हुई है. आधुनिक चकाचौंध के बीच चूने और उड़द की दाल के गारे से तराशी गई 200 साल पुरानी पालीवाल धर्मशाला आज भी श्रद्धालुओं को प्राचीन सुकून, लग्जरी अहसास और किफायती आशियाना देती है.

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Haridwar Paliwal Dharamshala: धर्मनगरी हरिद्वार के अपर रोड पर नगर कोतवाली से हर की पौड़ी की ओर महज 100 मीटर की दूरी पर ऐतिहासिक पालीवाल धर्मशाला करीब दो सदी पुरानी है, जो आस्था और पारंपरिक स्थापत्य का संगम है. सुर्खी, चूना और उड़द की दाल के गारे से तैयार की गई इसकी मजबूत दीवारें आज भी शान से खड़ी हैं. समय बीतने के बावजूद इसके प्राचीन स्वरूप, आर्च, मेहराबदार दरवाजों, पुरानी सीढ़ियों और उस दौर के कुएं की बनावट से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. लगभग 85 कमरों वाली यह धरोहर आज भी श्रद्धालुओं को प्राचीन काल के वैभव और सुकून का जीवंत अहसास कराती है.

हर की पौड़ी से 5 मिनट की दूरी और आधुनिक सुविधाएं
प्राचीन वास्तुकला से बनी इस धर्मशाला के अंदर आधुनिक होटलों से बेहतर लग्जरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां श्रद्धालु पर्यटक कम खर्च पर ठहर सकते हैं. हर की पौड़ी, मां गंगा और कुशावर्त घाट इस प्राचीन धर्मशाला से मात्र 5 मिनट की पैदल दूरी पर हैं. हर की पौड़ी पर स्नान करने और कुशावर्त घाट पर पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आसानी से पहुंचा जा सकता है. धर्मशाला के सामने से सिद्धपीठ मनसा देवी का रोपवे और 100 मीटर आगे चलकर पैदल सीढ़ियों का रास्ता है. हिंदू परंपराओं पर संचालित इस धर्मशाला में परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को पहचान पत्र देने के बाद यहां रुकने दिया जाता है.

20 इंच मोटी दीवारें, संस्कृत महाविद्यालय और मात्र 500 रुपये किराया
अपर रोड पर स्थित पालीवाल धर्मशाला की ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए हम धर्मशाला पहुंचे और धर्मशाला में स्थित 200 साल पुराने मंदिर के पुजारी और व्यवस्थापक ऋषि पंत से बातचीत की. उन्होंने बताया कि अपर रोड स्थित पालीवाल धर्मशाला करीब 200 साल पुरानी है. इस धर्मशाला में 85 कमरे और चार हॉल हैं. इस धर्मशाला की सभी दीवारें 20-20 इंच मोटी हैं, जो सुर्खी-चूने और दाल से बनी हुई हैं. इस धर्मशाला में प्राचीन ब्रह्मचारी रामकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय और एक ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर भी है. धर्मशाला में रुकने के लिए एक कमरे का किराया करीब 500 रुपए है. योग और साधना करने के लिए इस धर्मशाला में विशेष व्यवस्था की जाती है. अकेले व्यक्ति या केवल चार से पांच पुरुषों के समूह को यहां कमरा नहीं दिया जाता है.

मुख्य बाजार, मंदिर और कुशावर्त घाट का सुगम मार्ग
ऋषि पंत बताते हैं कि सुबह 6 बजे पालीवाल धर्मशाला का मुख्य गेट खुलता है और रात 10 बजे बंद हो जाता है. इस धर्मशाला में पीछे की ओर पूजा-पाठ करने के लिए प्राचीन मंदिर प्रांगण और 200 साल पुराना एक कुआं है. यहां रुकने वाले यात्री और श्रद्धालु केवल 5 मिनट की पैदल दूरी पर हर की पौड़ी पहुंचकर गंगा स्नान कर सकते हैं. धार्मिक अनुष्ठान, हवन आदि करने के लिए हर की पौड़ी के कुशावर्त घाट का रास्ता भी इस धर्मशाला से महज 5 मिनट की पैदल दूरी पर है. मनसा देवी मंदिर, बड़ा बाजार, मोती बाजार और अपर रोड बाजार भी इस धर्मशाला के बिल्कुल पास हैं. वह आगे बताते हैं कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धरोहर में ठहरने के लिए आते रहते हैं.



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