रिश्तेदारों से कर्ज लेकर पति-पत्नी ने खड़ी कर दी कंपनी, 15 लोगों को दिया रोजगार, जानें जमुई के प्रियंका-चंदन की कहानी

रिश्तेदारों से कर्ज लेकर पति-पत्नी ने खड़ी कर दी कंपनी, 15 लोगों को दिया रोजगार, जानें जमुई के प्रियंका-चंदन की कहानी


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Business Idea: जमुई के चंदन और प्रियंका ने दूसरे प्रदेशों में नौकरी छोड़कर खुद की धागा फैक्ट्री शुरू की है. बैंक से लोन न मिलने पर रिश्तेदारों से कर्ज लेकर लगाई गई इस फैक्ट्री में अब 15 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला हुआ है. इसके साथ ही अब उन्हें दूसरे शहर में जॉब के लिए नहीं जाना पड़ रहा है.

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जमुई: रोजगार की तलाश में वर्षों तक दूसरे प्रदेशों में काम करने के बाद एक युवक ने अपनी खुद की फैक्ट्री खड़ी कर दी है. जो कभी खुद दूसरों की कंपनी में काम किया करता था, अब वो 15 लोगों को रोजगार दे रहा है. ये कहानी जमुई जिले के गुगुलडीह निवासी प्रियंका कुमारी और उनके पति चंदन रावत की है, जिन्होंने शहर के नीमारंग में अपनी धागा निर्माण की फैक्ट्री शुरू की है. प्रियंका ने बताया कि चंदन करीब 25 साल तक अलग-अलग कंपनियों में काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने तय किया कि अब वह दूसरे प्रदेशों में काम नहीं करेंगे, बल्कि खुद का कोई कारोबार करेंगे. चंदन को इस काम में अनुभव था और उन्होंने घर आकर धागा फैक्ट्री बनाने की योजना बनाई.

लोन नहीं मिला, तो लेना पड़ा कर्ज

चंदन ने बताया कि जब उन्होंने अपने घर लौटकर कारोबार शुरू करने की योजना बनाई, तो सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी. चंदन ने बताया कि उन्होंने फैक्ट्री लगाने के लिए बैंक से लोन लेने का प्रयास किया, लेकिन ऋण स्वीकृत नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर नीमारंग में अपनी धागा फैक्ट्री स्थापित कर दी. आज इस इकाई में 15 लोगों को रोजगार मिला हुआ है और कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने एक लाख रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं.

ऑटोमैटिक मशीनों से तैयार होता है धागा

प्रियंका ने बताया कि फैक्ट्री में धागा तैयार करने से लेकर उसकी पैकेजिंग तक के लिए मशीनों की व्यवस्था की गई है. यहां ऑटोमैटिक मशीनों की मदद से धागे को रंगने, सुखाने, पॉलिश करने और रोल तैयार करने का काम किया जाता है. इसके बाद धागे के रोल पर हाथों से लेबल लगाया जाता है और फिर उनकी पैकेजिंग की जाती है. उन्होंने बताया कि तैयार धागे के लिए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार के लगभग सभी जिलों से ऑर्डर मिल रहा है है. सबसे खास बात यह है कि चंदन जिन कंपनियों में पहले काम कर चुके हैं, उनमें से एक कंपनी को भी अब उनकी फैक्ट्री से धागे की आपूर्ति की जा रही है.

दूसरों को बाहर जाने से रोकने की पहल

प्रियंका कुमारी का कहना है कि उन्होंने और उनके पति ने रोजगार के लिए लंबे समय तक दूसरे प्रदेशों में रहकर काम किया है. बाहर रहकर काम करने के दौरान उन्होंने बहुत कुछ महसूस किया है. उनका उद्देश्य है कि जिस तरह उन्हें रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ा, वैसी मजबूरी दूसरे लोगों के सामने नहीं आए. स्थानीय लोगों को अपने घर और परिवार के पास ही काम मिल सके, इसी सोच के साथ फैक्ट्री शुरू की गई है.



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