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Keoladeo National Park Bharatpur Navigation App Launch: भरतपुर के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क में पर्यटन को आसान और रोमांचक बनाने के लिए एक खास नेविगेशन ऐप लॉन्च किया जाएगा. इस ऐप से पर्यटकों को रास्तों और प्रमुख स्थानों की जानकारी मिलेगी. ऐप के जरिए पक्षियों की प्रजातियों को पहचानने और दुर्लभ पक्षियों की साइटिंग रिकॉर्ड करने की सुविधा होगी, जिससे सिटीजन साइंस को बढ़ावा मिलेगा. यह पहल डिजिटल पर्यटन के साथ-साथ पक्षी संरक्षण में भी मददगार साबित होगी.
भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घाना पक्षी अभयारण्य) में पर्यटन को अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और तकनीक-संचालित बनाने के लिए एक बड़ी और अनूठी पहल की जा रही है. अब यहां आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक और आसान होने वाला है. पार्क प्रशासन जल्द ही पर्यटकों के लिए एक समर्पित ‘विशेष नेविगेशन ऐप’ लॉन्च करने जा रहा है. इस मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से पर्यटक विशाल पार्क के भीतर बिना किसी भटकन के विभिन्न रास्तों, साइकिल ट्रेल्स और प्रमुख अवलोकन केंद्रों की सटीक जानकारी अपने स्मार्टफोन पर ही प्राप्त कर सकेंगे.
केवलादेव नेशनल पार्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने जैविक महत्व और पक्षी अभयारण्य के रूप में अपनी खास पहचान रखता है. खासकर सर्दियों के मौसम में यहां साइबेरिया समेत दुनिया के विभिन्न कोनों से हजारों मील की दूरी तय करके दुर्लभ प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं. ऐसे में यह नया नेविगेशन ऐप पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक डिजिटल गाइड के रूप में काम करेगा. ऐप में मौजूद विशेष फीचर्स की मदद से पर्यटक पार्क में नजर आने वाले अलग-अलग पक्षियों की प्रजातियों, उनके वैज्ञानिक नाम, व्यवहार और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में विस्तृत जानकारी सेकंडों में हासिल कर सकेंगे.
दुर्लभ पक्षियों की लाइव साइटिंग और सिटीजन साइंस को बढ़ावा
इस प्रस्तावित ऐप की सबसे अनूठी और तकनीकी रूप से क्रांतिकारी विशेषता ‘साइटिंग रिकॉर्डिंग’ (Sighting Recording) सुविधा होगी. इसके तहत यदि कोई पर्यटक पार्क भ्रमण के दौरान किसी दुर्लभ या विशेष पक्षी को देखता है, तो वह तुरंत उसकी तस्वीर और लोकेशन ऐप पर दर्ज कर सकेगा. इससे पर्यटकों की भूमिका केवल एक दर्शक तक सीमित न रहकर ‘नागरिक वैज्ञानिक’ (Citizen Scientist) के रूप में भी स्थापित होगी. पर्यटकों द्वारा दी गई यह जानकारी वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों को पक्षियों की आबादी, उनकी आवाजाही और उनके संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा तैयार करने में बहुत मददगार साबित होगी.
नए पर्यटकों के लिए सुरक्षित और सुलभ सैर
अक्सर पहली बार केवलादेव नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों को इसके विस्तृत और घने इलाके में रास्तों को समझने और सही स्पॉट तक पहुंचने में कठिनाई होती है. ई-रिक्शा, साइकिल या पैदल सैर करने वाले पर्यटकों के लिए यह ऐप एक डिजिटल नेविगेटर की भूमिका निभाएगा. ऐप पर्यटकों को न केवल सबसे सुरक्षित और आसान रास्ते बताएगा, बल्कि पार्क के ऐतिहासिक और पारिस्थितिकीय महत्व को समझाने के लिए ऑडियो-विजुअल जानकारी भी प्रदान करेगा, जिससे प्रकृति प्रेमियों के लिए यह यात्रा न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि बेहद आनंददायक बन जाएगी.
पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल पर्यटन का अनूठा संगम
भरतपुर का केवलादेव नेशनल पार्क यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल एक प्रमुख प्राकृतिक स्थल है. ऐसे में नेविगेशन ऐप की यह डिजिटल पहल तकनीक और प्रकृति संरक्षण के बीच एक बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करती है. इससे जहां एक तरफ पर्यटन को डिजिटल और स्मार्ट बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों को भी पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण की प्रक्रिया से सीधे जोड़ा जा रहा है. आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा.