कानपुर के सीएसए विश्वविद्यालय में 15 से 17 तक लगेगा किसान मेला, महिला बनेंगी उद्यमी कृषक, 8 राज्यों के 25 हजार किसानों का होगा जुटान

कानपुर के सीएसए विश्वविद्यालय में 15 से 17 तक लगेगा किसान मेला, महिला बनेंगी उद्यमी कृषक, 8 राज्यों के 25 हजार किसानों का होगा जुटान


कानपुरः अब महिला किसान केवल खेतों में काम करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अपनी मेहनत और हुनर से उद्यमी भी बनेंगी. खेती को रोजगार और कारोबार से जोड़ने की इस पहल में कानपुर का चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) अहम भूमिका निभाएगा. विश्वविद्यालय में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी में महिला किसानों को अपना व्यवसाय शुरू करने और खेती से अतिरिक्त कमाई करने के तरीके बताए जाएंगे. इस बार मेले में मोती की खेती भी खास आकर्षण होगी. इसके जरिए उत्तर प्रदेश के किसानों को खेती के एक नए विकल्प से जोड़ने की तैयारी है.

‘सशक्त किसान, आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर आयोजित होने वाले इस मेले में उत्तर भारत के आठ राज्यों से 25 हजार से अधिक किसानों के पहुंचने की उम्मीद है. विश्वविद्यालय परिसर में 150 से अधिक स्टाल लगाए जाएंगे. इनमें आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों और खेती से जुड़े कारोबार की जानकारी मिलेगी. मेले का उद्घाटन प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही करेंगे. मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में सीएसए के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने मेले की तैयारियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी.

महिला किसान बनेंगी कारोबारी

मेले का दूसरा दिन यानी 16 अक्टूबर विशेष रूप से महिला किसानों के नाम रहेगा. अंतरराष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर महिला किसानों को खेती के साथ अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया जाएगा. कार्यक्रम का उद्घाटन छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक करेंगे. इस दौरान चार ऐसी महिला किसानों को भी मंच पर बुलाया जाएगा, जिन्होंने खेती के क्षेत्र में अपनी मेहनत से उद्यम स्थापित किए हैं. उनके अनुभवों के जरिए दूसरी महिला किसानों को यह समझने का मौका मिलेगा कि खेती को छोटे कारोबार में कैसे बदला जा सकता है.

मशरूम उत्पानदन, मधुमक्खी पालन की दी जाएगी जानकारी

महिलाओं को मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और मोती की खेती जैसे विकल्पों की जानकारी दी जाएगी. इन व्यवसायों के जरिए किसान परिवार अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं. मोती की खेती खास तौर पर उन किसानों के लिए नया विकल्प बन सकती है, जो परंपरागत फसलों के अलावा दूसरे कामों से भी कमाई करना चाहते हैं. मेले में इस खेती से जुड़ी जानकारी देकर किसानों को इसकी संभावनाओं से परिचित कराया जाएगा. हालांकि, इसे शुरू करने से पहले प्रशिक्षण, शुरुआती लागत, पानी की गुणवत्ता और बाजार की मांग को समझना जरूरी होगा.

यूपी के किसानों को सिखाई जाएगी मोती की खेती

अब तक गेहूं, धान, दलहन और तिलहन जैसी फसलों पर निर्भर रहने वाले किसानों के सामने कमाई बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशने की जरूरत है. इसी को ध्यान में रखते हुए मेले में मोती की खेती और दूसरे कृषि आधारित व्यवसायों को प्रमुखता दी जाएगी. किसानों को बताया जाएगा कि पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय के लिए दूसरे कामों की संभावनाएं कैसे तलाश सकते हैं. इसके अलावा बागवानी, वानिकी और कृषि आधारित उद्योगों की जानकारी भी मिलेगी.

कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता के मुताबिक, मेले में किसानों को गेहूं, जौ, चना और मटर के उन्नत किस्म के बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे. छोटे किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बीजों के छोटे पैकेट और छोटे कृषि यंत्र भी प्रदर्शित किए जाएंगे. इससे कम जमीन वाले किसानों को भी अपनी जरूरत के मुताबिक विकल्प चुनने में मदद मिलेगी.

ड्रोन और सोलर ट्रैक्टर भी होंगे आकर्षण

मेले में खेती की लागत घटाने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने वाली तकनीकों का प्रदर्शन भी होगा. ड्रोन से अरहर और गन्ने की फसलों में खाद के छिड़काव की जानकारी दी जाएगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सिंचाई व्यवस्था से किसानों को पानी बचाने के तरीके समझाए जाएंगे. सोलर ऊर्जा से चलने वाले ट्रैक्टर और थ्रेसर मशीनें भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी. धान के पुआल के बेहतर प्रबंधन में काम आने वाली मशीनों की उपयोगिता भी बताई जाएगी.

किसानों को केवल खेती की तकनीक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी मिलेगी. महिला किसानों के लिए निशुल्क डाइट काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी. इसमें खानपान और अनाज के बेहतर इस्तेमाल के बारे में बताया जाएगा. वहीं, मेले के पहले दिन शाम को कवि सम्मेलन और लोकगीतों के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. विश्वविद्यालय का प्रयास है कि किसान नई तकनीक सीखने के साथ खेती से जुड़े रोजगार के नए रास्तों को भी पहचान सकें.



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