IPS Neeraj Kumar Jadaun Biography: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एसएसपी नीरज कुमार जादौन एक बार फिर अपने सख्त फैसले को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने ड्यूटी में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में एक सब इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है. नीरज जादौन पहले भी अपने फैसलों और काम करने के तरीके को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. कभी गोतस्करों को पकड़ने के दौरान उन पर जानलेवा हमले हुए तो कभी सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से परेशान होकर उन्होंने इस्तीफा देने तक की बात कह दी थी.
उनकी जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है. कभी मल्टीनेशनल कंपनी में 25 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी करने वाले नीरज ने पिता की हत्या के बाद पुलिस अफसर बनने की ठानी थी. तीसरी कोशिश में यूपीएससी की परीक्षा पास की और 140वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बन गए. आइए जानते हैं नीरज जादौन कौन हैं, कहां के रहने वाले हैं, कब आईपीएस बने, कहां-कहां तैनात रहे और किन वजहों से चर्चा में आए.
तीन पुलिसकर्मियों पर एक्शन, SSP ने किया सस्पेंड
अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने ड्यूटी में लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों में बड़ी कार्रवाई की है. उन्होंने एक उपनिरीक्षक समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. पुलिस के मुताबिक थाना सिविल लाइंस में तैनात आरक्षी राजकुमार और थाना बन्नादेवी में तैनात आरक्षी चालक धर्मपाल सिंह पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप हैं. वहीं पीआरवी पालीमुकीमपुर में तैनात उपनिरीक्षक दुर्विजय पर अनुशासनहीनता का आरोप है. एसएसपी ने तीनों को निलंबित करते हुए विभागीय जांच शुरू करा दी है. जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस फैसले के बाद नीरज जादौन एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं.
कौन हैं IPS नीरज कुमार जादौन, कहां के रहने वाले हैं?
नीरज कुमार जादौन उत्तर प्रदेश कैडर के 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के नौरेजपुर गांव के रहने वाले हैं. उनका जन्म 1 जनवरी 1983 को हुआ था. उनके पिता का नाम नरेंद्र सिंह जादौन था. नीरज बचपन से पढ़ाई में अच्छे थे और आगे चलकर उन्होंने इंजीनियरिंग को अपना करियर बनाया. उन्होंने आईआईटी बीएचयू से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की. उनके आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड में शैक्षणिक योग्यता बीई (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) दर्ज है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में नौकरी शुरू की. उस समय उनका पुलिस सेवा में आने का कोई तय इरादा नहीं था, लेकिन जिंदगी में हुई एक घटना ने सब कुछ बदल दिया.
25 लाख की नौकरी कर रहे थे, पिता की हत्या ने बदल दी जिंदगी
नीरज जादौन ने वर्ष 2005 में नोएडा की एक कंपनी में नौकरी शुरू की थी. इसके बाद 2008 में वह बेंगलुरु चले गए जहां एक मल्टीनेशनल कंपनी में उनका सालाना पैकेज करीब 25 लाख रुपये था. इतनी अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी के बावजूद उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसके बाद उन्होंने अपना करियर बदलने का फैसला कर लिया.दरअसल 6 दिसंबर 2008 को उनके पिता नरेंद्र सिंह जादौन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस समय नीरज की उम्र महज 25 साल थी. पिता की हत्या के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. बताया जाता है कि इस मामले में न्याय पाने के लिए नीरज को काफी संघर्ष करना पड़ा. केस की पैरवी के दौरान उन्हें पुलिस से अपेक्षित मदद नहीं मिली. इसी अनुभव ने उन्हें पुलिस व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने तय किया कि वह खुद पुलिस अधिकारी बनेंगे और ऐसे लोगों की मदद करेंगे जिन्हें अपनी शिकायत लेकर थानों और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
नौकरी के साथ UPSC की तैयारी, तीसरी कोशिश में बने IPS
पिता की हत्या के बाद नीरज जादौन ने सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया था. वर्ष 2010 में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. शुरुआत में वह नौकरी के साथ ही पढ़ाई करते रहे. पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. दूसरे प्रयास में उन्हें रैंक तो मिली लेकिन मनचाही सेवा नहीं मिल सकी.इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी. तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 140वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए. इस तरह उन्होंने अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर आईपीएस बनने का सपना पूरा किया आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड के मुताबिक वह 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उनकी भर्ती की तारीख 28 दिसंबर 2015 दर्ज है. उनकी सेवा की पुष्टि 28 दिसंबर 2017 को हुई थी.
आईपीएस बनने के बाद कहां-कहां रही पोस्टिंग?
नीरज कुमार जादौन को भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद उत्तर प्रदेश कैडर मिला. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने प्रदेश में अलग-अलग पुलिस जिम्मेदारियां संभालीं. उनके शुरुआती करियर में अलीगढ़ जिले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वर्ष 2018-19 के दौरान वह अलीगढ़ में तैनात रहे और सीओ गभाना की जिम्मेदारी भी संभाली. इसी दौरान वह गोतस्करों और संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में आए थे.अलीगढ़ के अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी पुलिस सेवा की जिम्मेदारियां संभाली हैं. सितंबर 2025 में अलीगढ़ के एसएसपी के रूप में नियुक्ति से पहले वह हरदोई जिले में तैनात थे. हरदोई से उनका तबादला अलीगढ़ किया गया था. अलीगढ़ में पोस्टिंग की तारीख 18 सितंबर 2025 है. वर्तमान में वह अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हैं.
अलीगढ़ में गोतस्करों ने छह बार किया था हमला
नीरज जादौन का अलीगढ़ से पुराना नाता है. वह पहली बार इस जिले में तब चर्चा में आए थे, जब वर्ष 2018-19 के दौरान सीओ गभाना की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उस समय उन्होंने गोतस्करी के खिलाफ कई कार्रवाइयों में हिस्सा लिया था. बताया जाता है कि गोतस्करों को पकड़ने के दौरान उन पर कई बार हमले भी हुए. एक घटना में गोतस्करों ने उनकी गाड़ी में टक्कर मार दी थी और फायरिंग तक कर दी थी. अलीगढ़ में अपनी शुरुआती तैनाती के दौरान उन पर छह बार हमले हुए थे. इसके बावजूद उन्होंने गोतस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी. वर्ष 2018 में एएसपी के तौर पर काम करते समय भी वह गोतस्करी और संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे थे.
थानों में शिकायतों की सुनवाई के लिए लागू की व्यवस्था
अलीगढ़ में एसएसपी का पदभार संभालने के बाद नीरज जादौन ने आम लोगों की शिकायतों की सुनवाई को लेकर नई व्यवस्था लागू की थी. शुरुआत में यह व्यवस्था पुलिस कार्यालय में लागू की गई और बाद में इसे जिले के सभी थानों तक बढ़ाया गया.उन्होंने थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि थाने में आने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और उसका जल्द एवं निष्पक्ष निस्तारण किया जाए. साथ ही शिकायत करने वाले लोगों को रिसीविंग पर्ची देने पर भी जोर दिया गया.एसएसपी ने आम लोगों से अपील की थी कि किसी भी समस्या को लेकर सबसे पहले संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं. यदि वहां सुनवाई नहीं होती है या शिकायत की रिसीविंग पर्ची नहीं दी जाती है तो जनशिकायत प्रकोष्ठ से संपर्क किया जा सकता है.
सोशल मीडिया पर ट्रोल, बोले- बिना सोचे इस्तीफा दे दूंगा
नीरज जादौन एक बार सोशल मीडिया पर अपने भावुक पोस्ट को लेकर भी काफी चर्चा में आए थे. दरअसल बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया था. इसमें दावा किया गया था कि एसएसपी ने अर्दली रूम यानी ओआर में सिपाहियों और दीवानों को सूती वर्दी पहनकर आने का आदेश दिया है. वीडियो में यह भी कहा गया था कि इस आदेश की वजह से पुलिसकर्मियों पर करीब 3500 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ गया. इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर एसएसपी के खिलाफ कई तरह की टिप्पणियां होने लगीं. कुछ लोगों ने उनके काम करने के तरीके पर सवाल उठाए तो कुछ ने व्यक्तिगत टिप्पणियां भी कीं. इससे आहत होकर नीरज जादौन ने अपने एक्स अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट लिखी.
उन्होंने लिखा था कि वह अपना काम पूरे जुनून और ईमानदारी से करते हैं. जिस दिन उन्हें लगेगा कि वह अपनी नौकरी के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं, वह उनका आखिरी दिन होगा और उसी दिन बिना एक क्षण सोचे इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह भी एक इंसान हैं और सोशल मीडिया पर होने वाली अभद्र ट्रोलिंग से उनका परिवार काफी आहत हुआ है. उन्होंने सवाल किया था कि क्या किसी व्यक्ति को केवल इसलिए ट्रोल करना सही है क्योंकि वह अपना काम कर रहा है.
विवाद पर दी थी सफाई, बोले- मैंने नियम नहीं बनाए
सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद नीरज जादौन ने सूती वर्दी के मामले में भी अपना पक्ष रखा था. उन्होंने बताया था कि शुक्रवार की परेड के बाद अर्दली रूम की प्रक्रिया पुलिस विभाग की निर्धारित व्यवस्था का हिस्सा है. इसमें सूती वर्दी पहनना पहले से तय नियमों के तहत आता है. एसएसपी ने कहा था कि न तो उन्होंने यह नियम बनाया है और न ही उन्हें इसे बदलने का अधिकार है. वह केवल पुलिस विभाग के नियमों का पालन करवा रहे हैं. बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला ने अपने वीडियो में यह भी आरोप लगाया था कि एसएसपी को राजा जैसी फीलिंग चाहिए और वह सिपाहियों को गुलाम जैसा दिखाना चाहते हैं.इस आरोप पर नीरज जादौन ने कहा था कि उन्होंने कभी राजा बनने की कोशिश नहीं की. वह केवल अपने काम को 100 फीसदी ईमानदारी और नियमों के मुताबिक करने की कोशिश करते हैं.
तीन बार मिल चुका है डीजी का प्रशंसा चिह्न
आईपीएस नीरज कुमार जादौन को पुलिस सेवा के दौरान कई सम्मान भी मिल चुके हैं. उनके आधिकारिक सेवा विवरण के मुताबिक 15 अगस्त 2021 को उन्हें डीजी का सिल्वर कमेंडेशन डिस्क प्रदान किया गया था. इसके बाद 15 अगस्त 2022 को उन्हें गोल्ड कमेंडेशन डिस्क मिला.वहीं 26 जनवरी 2024 को उन्हें डीजी का प्लेटिनम कमेंडेशन डिस्क प्रदान किया गया. इस तरह उनके सेवा रिकॉर्ड में सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम, तीनों प्रशंसा चिह्न दर्ज हैं. ये सम्मान उनके पुलिस सेवा के रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
अभी कहां तैनात हैं नीरज जादौन, क्या है उनका सर्विस रिकॉर्ड?
नीरज कुमार जादौन वर्तमान में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं. उनके आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड में वर्तमान रैंक एसपी और पद एसएसपी अलीगढ़ दर्ज है. वह 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1983 है और उनका गृह जनपद जालौन है. उनके पिता का नाम नरेंद्र सिंह जादौन है. उनकी शैक्षणिक योग्यता कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग डिग्री है. सेवा रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी भर्ती 28 दिसंबर 2015 को हुई थी और 28 दिसंबर 2017 को उनकी सेवा की पुष्टि हुई थी. अलीगढ़ में उनकी पोस्टिंग की आधिकारिक तारीख 18 सितंबर 2025 दर्ज है. इससे पहले वह हरदोई में तैनात थे. उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने 22 सितंबर 2025 को अलीगढ़ के एसएसपी का पदभार संभाला था.