Nainital News : पैर रखने की जगह न मिले, उस सीजन में सन्नाटा…नैनीताल में ये कैसी आफत? कारोबारी बोले- वायरल वीडियो से रूठे पयर्टक

Nainital News : पैर रखने की जगह न मिले, उस सीजन में सन्नाटा…नैनीताल में ये कैसी आफत? कारोबारी बोले- वायरल वीडियो से रूठे पयर्टक


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Nainital ki local news : अक्टूबर में सैलानियों से गुलजार रहने वाले नैनीताल में इस बार पर्यटकों की आमद कम होने से होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. दो अक्टूबर के लंबे वीकेंड के दौरान नैनीताल और कैंची धाम में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट और बाजारों के कारोबारी भी इसी सीजन से बेहतर कमाई की उम्मीद करते हैं. कारोबारियों की मांग है कि प्रशासन यातायात प्रबंधन, पार्किंग और कैंची धाम में पर्यटकों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि नैनीताल की पर्यटन छवि बेहतर बनी रहे.

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नैनीताल. उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल नैनीताल में लॉन्ग वीकेंड के दौरान उमड़ी पर्यटकों की भारी भीड़ के बाद अब पर्यटन कारोबार में गिरावट देखने को मिल रही है. अक्टूबर में आमतौर पर ऑटम सीजन के दौरान सैलानियों से गुलजार रहने वाले नैनीताल में इस बार पर्यटकों की आमद कम होने से होटल, रेस्टोरेंट और अन्य पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. स्थानीय कारोबारियों का दावा है कि पर्यटकों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. इसके पीछे सोशल मीडिया पर वायरल हुए जाम और अव्यवस्थाओं के वीडियो के साथ ही दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित होने को भी वजह माना जा रहा है.

लंबी कतारें, घंटों जाम

दो अक्टूबर के लंबे वीकेंड के दौरान नैनीताल और कैंची धाम में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी थी. शहर की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जबकि कई पर्यटकों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा. इस दौरान यातायात अव्यवस्था और भीड़ से जुड़े वीडियो और रील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए. इसके बाद नैनीताल की यातायात व्यवस्था, पार्किंग और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को संभालने की तैयारियों पर सवाल उठने लगे. स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि पर्यटन स्थलों की छवि पर सोशल मीडिया का सीधा असर पड़ता है. जब पर्यटक जाम और अव्यवस्थाओं से जुड़े वीडियो देखते हैं, तो वे यात्रा की योजना बदलने या दूसरे पर्यटन स्थलों का विकल्प तलाशने पर विचार कर सकते हैं. कारोबारियों के मुताबिक, वायरल वीडियो के बाद पर्यटन पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है.

दिल्ली में प्रदर्शन भी एक वजह

नैनीताल में पर्यटकों की आमद कम होने के पीछे दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों को भी एक कारण बताया जा रहा है. कारोबारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत की गई सख्ती और दिल्ली-एनसीआर में आवाजाही प्रभावित होने से पर्यटकों की यात्रा योजनाओं पर असर पड़ा. ट्रेनों के रद्द होने और मेट्रो स्टेशनों के बंद होने जैसी परिस्थितियों का भी पर्यटन गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है. दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में पर्यटक नैनीताल और आसपास के पर्यटन स्थलों का रुख करते हैं. ऐसे में वहां यातायात या परिवहन संबंधी बाधाएं आने पर पहाड़ों की ओर आने वाले सैलानियों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है.

ऑनलाइन पंजीकरण की जरूरत

नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट लोकल 18 से बताते हैं कि पर्यटकों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. अक्टूबर में ऑटम सीजन और वीकेंड के दौरान बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. पर्यटन सीजन और लंबे वीकेंड को देखते हुए पुलिस और प्रशासन को यातायात प्रबंधन की योजना पहले से तैयार करनी चाहिए. अक्सर पर्यटकों की भीड़ बढ़ने के बाद डायवर्जन लागू किया जाता है, जिससे पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. दिग्विजय बिष्ट ने कैंची धाम आने वाले पर्यटकों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था जल्द लागू करने की मांग भी उठाई. वे कहते हैं कि कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक इसे लागू करने के संबंध में अपडेट सामने नहीं आया है. उनके मुताबिक, ऑनलाइन पंजीकरण से पर्यटकों की संख्या का पूर्वानुमान लगाने और उसी के अनुसार व्यवस्थाएं बनाने में मदद मिल सकती है.

छोटी घटनाओं का बड़ा असर

मल्लीताल व्यापार मंडल के महामंत्री त्रिभुवन फर्त्याल कहते हैं कि पर्यटन एक संवेदनशील कारोबार है, जहां छोटी-छोटी घटनाओं का भी बड़ा असर पड़ सकता है. लंबे वीकेंड के दौरान यातायात व्यवस्था बिगड़ने और अनियंत्रित भीड़ से जुड़े वीडियो वायरल होने से नैनीताल की छवि प्रभावित हुई है. पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुविधा, यातायात प्रबंधन और स्थानीय लोगों की दैनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. सरकार और प्रशासन को ऐसी स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए, जिससे पर्यटकों को जाम और अव्यवस्थाओं का सामना न करना पड़े और स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सुचारू बनी रहे.



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