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Kota Hospital fall Ceiling Collapses: कोटा के जेके लोन अस्पताल के सिजेरियन वार्ड में फॉल सीलिंग गिर गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई. वार्ड में दो दर्जन बच्चे भर्ती थे, लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. वार्ड में अपने बच्चों के साथ मौजूद तीमारदारों ने बिना देर किए बच्चों को संभाला और उन्हें लेकर बाहर निकल आए. कुछ ही देर में वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. परिजनों की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी.
कोटा के अस्पताल में बड़ा हादसा टला
कोटा. शहर के जेके लोन अस्पताल में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सिजेरियन वार्ड की फॉल सीलिंग अचानक नीचे गिर गई. घटना के वक्त वार्ड में करीब दो दर्जन बच्चे भर्ती थे. सीलिंग गिरते ही वहां मौजूद बच्चों के परिजन घबरा गए और अपने बच्चों को लेकर जल्दबाजी में वार्ड से बाहर निकलने लगे. गनीमत रही कि इस घटना में किसी बड़े हादसे की खबर सामने नहीं आई.
अस्पताल के वार्ड में इस तरह सीलिंग गिरने की घटना ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस जगह छोटे बच्चे भर्ती थे, वहां छत का हिस्सा अचानक नीचे आ जाना गंभीर मामला है. घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है. अस्पताल प्रशासन की ओर से अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा का पक्ष लिया गया है, वहीं बच्चों के परिजनों ने भी घटना को लेकर अपनी बात रखी है.
सीलिंग गिरते ही बच्चों को लेकर बाहर निकले परिजन
जेके लोन अस्पताल के सिजेरियन वार्ड में करीब दो दर्जन बच्चे भर्ती थे. इसी दौरान वार्ड की फॉल सीलिंग अचानक गिर गई. अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. सीलिंग गिरने की आवाज और हालात देखकर परिजन घबरा गए. वार्ड में अपने बच्चों के साथ मौजूद तीमारदारों ने बिना देर किए बच्चों को संभाला और उन्हें लेकर बाहर निकल आए. कुछ ही देर में वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. परिजनों की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी. राहत की बात यह रही कि घटना में किसी बड़े हादसे की जानकारी सामने नहीं आई. हालांकि, वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या को देखते हुए यह घटना अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े करती है.
बच्चों के वार्ड में हादसे से उठे सुरक्षा पर सवाल
अस्पताल में भर्ती बच्चे पहले से ही इलाज और देखभाल के लिए वहां मौजूद रहते हैं. ऐसे में वार्ड की फॉल सीलिंग का अचानक गिरना चिंता की बात है. अगर सीलिंग का हिस्सा किसी बच्चे या उसके परिजन के ऊपर गिर जाता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अस्पताल के वार्डों में लगी फॉल सीलिंग की स्थिति कैसी है और उनकी नियमित जांच होती है या नहीं. हालांकि, सीलिंग गिरने की असली वजह क्या रही, इस बारे में अभी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है. इसकी वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा.
अस्पताल अधीक्षक और परिजनों का पक्ष
घटना के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा का बयान लिया गया है. वहीं जेके लोन अस्पताल में मौजूद बच्चों के परिजनों ने भी अपना पक्ष रखा है. दोनों के बयान इस घटना से जुड़ी जानकारी सामने लाने के लिहाज से अहम हैं. फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिजेरियन वार्ड की फॉल सीलिंग गिरने के बाद परिजन बच्चों को लेकर बाहर निकल आए थे. किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है. घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
अस्पताल की व्यवस्था पर अब सबकी नजर
जेके लोन अस्पताल में हुई इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और भवनों की देखरेख पर ध्यान देने की जरूरत सामने रखी है. खासकर ऐसे वार्डों में, जहां छोटे बच्चे भर्ती रहते हैं, वहां किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है. अब यह देखना होगा कि फॉल सीलिंग गिरने की वजह क्या निकलती है और अस्पताल प्रशासन इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाता है. फिलहाल इस घटना में बड़ा नुकसान नहीं होने से राहत है, लेकिन वार्ड में भर्ती करीब दो दर्जन बच्चों की मौजूदगी ने मामले को गंभीर बना दिया है.