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Budget Dharamshala in Haridwar: हरिद्वार में हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में यहां ठहरने के लिए होटल तो कई हैं, लेकिन उनका किराया हर किसी के बजट में नहीं होता. अगर आप परिवार के साथ हरिद्वार जा रहे हैं और कम खर्च में रुकने की जगह तलाश रहे हैं, तो यहां की पुरानी धर्मशालाएं अच्छा विकल्प हो सकती हैं. हर की पौड़ी और अपर रोड के आसपास ऐसी कई धर्मशालाएं हैं, जहां 150 से 300 रुपये तक में एक रात के लिए कमरा मिल सकता है. कुछ धर्मशालाएं 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं और यहां ठहरने के लिए परिवार, पहचान पत्र और समय से जुड़े नियम भी हैं. जानिए हरिद्वार की इन धर्मशालाओं का किराया, सुविधाएं और यहां रुकने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
धर्मनगरी हरिद्वार देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां गंगा में स्नान करने के साथ ही मनसा देवी, चंडी देवी और माया देवी मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. साल भर होने वाले धार्मिक पर्वों और मेलों में भी लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. देश के कोने-कोने से लोग यहां तर्पण, पिंडदान, मुंडन और दूसरे धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं. खास पर्वों पर गंगा स्नान और मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए हर की पौड़ी के आसपास कई होटल, रिसॉर्ट और गेस्ट हाउस हैं. हालांकि, इन जगहों पर रुकना हर किसी के बजट में नहीं होता. अगर आप परिवार के साथ हरिद्वार आने की योजना बना रहे हैं और कम खर्च में ठहरना चाहते हैं, तो यहां की पुरानी धर्मशालाएं आपके काम आ सकती हैं. भीमगोड़ा से लेकर अपर रोड तक ऐसी कई धर्मशालाएं हैं, जहां आधुनिक होटलों के मुकाबले कम कीमत में कमरे मिल जाते हैं. इनमें से कई धर्मशालाएं 100 से 250 साल तक पुरानी हैं. यहां कमरे के लिए लिया जाने वाला शुल्क भी काफी कम है.
अपर रोड पर नगर कोतवाली से हर की पौड़ी की ओर करीब 100 मीटर की दूरी पर सेठ सूरजमल धर्मशाला स्थित है. यह धर्मशाला करीब 250 साल पुरानी है. इसके संचालक श्रीनिवास पांडे के अनुसार, यहां कुल 65 कमरे हैं. एक रात रुकने के लिए 150 से 200 रुपये तक शुल्क लिया जाता है. उनके मुताबिक, यह राशि बिजली, पानी और सफाई जैसी व्यवस्थाओं के लिए ली जाती है. यहां के कमरे साधारण हैं और उनमें बेड की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में श्रद्धालुओं को फर्श पर ही सोना पड़ता है. धर्मशाला में केवल परिवारों को कमरा दिया जाता है. यहां ठहरने वाले लोगों को खाने-पीने का इंतजाम भी खुद करना होता है.
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सेठ सूरजमल धर्मशाला से करीब 20 मीटर आगे अपर रोड पर देवी दयाल सुखदयाल धर्मशाला है. यह धर्मशाला लगभग 94 साल पुरानी है. इसके संचालक शंकर दत्त पुरोहित ने बताया कि यहां कुल 24 कमरे हैं. एक रात के लिए कमरे का किराया 200 से 300 रुपये तक है. धर्मशाला में सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है. यहां केवल परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को ही कमरा दिया जाता है. अकेले आने वाले व्यक्ति को कमरा नहीं मिलता. इसके अलावा, यहां रुकने वाले श्रद्धालुओं को अपने खाने-पीने की व्यवस्था खुद करनी होती है.
हरिद्वार के जिला महिला अस्पताल के सामने लखनऊ धर्मशाला भी कम बजट में ठहरने का एक विकल्प है. इसके संचालक रामकुमार गुप्ता के अनुसार, धर्मशाला में कुल 30 कमरे हैं. यहां एक दिन ठहरने के लिए 200 से 250 रुपये तक शुल्क लिया जाता है. धर्मशाला में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है. बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को पहचान पत्र दिखाने के बाद ही कमरा दिया जाता है. कम खर्च में परिवार के साथ ठहरने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह एक विकल्प हो सकता है. यहां भी खाने-पीने का इंतजाम खुद करना पड़ता है.
जिला महिला अस्पताल के सामने स्थित स्वर्णकार धर्मशाला में भी श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है. धर्मशाला के संचालक के अनुसार, यहां कुल 30 कमरे हैं. नॉन-एसी कमरे का किराया 300 रुपये है, जबकि एसी कमरों के लिए 700 से 1,500 रुपये तक देने पड़ते हैं. ऐसे में लोग अपने बजट के हिसाब से कमरा चुन सकते हैं. यहां से हर की पौड़ी की दूरी करीब 800 से 900 मीटर है. श्रद्धालु पैदल या ई-रिक्शा से कुछ ही समय में हर की पौड़ी पहुंच सकते हैं. आसपास के बाजारों में घूमने के लिए भी यह जगह सुविधाजनक है. धर्मशाला में खाने-पीने की व्यवस्था खुद करनी होती है.
अपर रोड पर नगर कोतवाली से हर की पौड़ी की ओर करीब 200 मीटर की दूरी पर बीकानेर धर्मशाला स्थित है. इसके संचालक विजय शंकर आचार्य के अनुसार, इस धर्मशाला का निर्माण साल 1903 में हुआ था. करीब 123 साल पुरानी इस धर्मशाला में कुल 30 कमरे हैं. यहां अकेले व्यक्तियों को ठहरने की अनुमति नहीं है और केवल परिवारों को ही कमरे दिए जाते हैं. धर्मशाला का मुख्य द्वार रात 10 बजे बंद कर दिया जाता है और सुबह 6 बजे खोला जाता है. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित लोगों से कमरा खाली कराया जा सकता है. यहां एक रात ठहरने के लिए परिवारों से 200 से 250 रुपये तक शुल्क लिया जाता है.