Elon Musk Oligarchy Charges: Bernie Sanders|उल्टा पड़ा एलन मस्क का ओलिगार्की वाला दांव भारत को करने चले थे टारगेट अमेरिकी सीनेटर ने आंकड़ों में लपेटा


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उल्टा पड़ा मस्क का ओलिगार्की वाला दांव, अमेरिकी सीनेटर ने आंकड़ों में लपेटा

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Elon Musk’s Oligarchy Charges fires back: एलन मस्क ने भारत पर कुछ दिनों पहले जो आरोप लगाए थे, अब वो खुद उसी के शिकार हो गए हैं. दरअसल मिड टर्म इलेक्शन के पहले रिपब्लिकन पार्टी के सबसे बड़े निजी डोनर बने मस्क पर सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने ‘ओलिगार्की’ वाला आरोप लगाया है और कहा कि वो पैसे के दम पर रिपब्लिकन पार्टी को मुट्ठी में रखना चाहते हैं.

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सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने आंकड़े देकर मस्क को कहा- स्टॉप ओलिगार्की.

Elon Musk’s Oligarchy Charges fires back: भारत में स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने पोस्ट किया और एक खास टर्म इस्तेमाल किया – ओलिगार्की. हफ्ताभर भी नहीं बीता था, अब खुद उन पर ही ओलिगार्की के आरोप लगने लगे है. अमेरिका के अंदर भी अब उनके रिपब्लिकन पार्टी के चंदे को लेकर आवाजें उठ रही है कि वो पैसे से पावर खरीद रहे हैं. अमेरिका के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने अरबपति कारोबारी एलन मस्क को जमकर सुनाया है. सैंडर्स ने आरोप लगाया कि मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव जिताने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए और इसके बाद उनकी संपत्ति में भारी बढ़ोतरी हुई. अब मस्क एक बार फिर अरबों रुपये खर्च मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को समर्थन देने के लिए खर्च कर रहे हैं.

बर्नी सैंडर्स के ने आंकड़े देते हुए कहा कि एलन मस्क ने ट्रंप के चुनाव अभियान में 290 मिलियन डॉलर खर्च किए थे. इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद मस्क की संपत्ति में 696 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और वह दुनिया के पहले खरबपति बन गए. इतना ही नहीं एलन मस्क को ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद फायदे भी खूब मिले हैं. उनकी कंपनी स्पेस एक्स को नासा से ऐतिहासिक 1.6 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. इतना ही नहीं  जुलाई 2026 में स्पेसएक्स को अमेरिकी अंतरिक्ष बल से 18 फाल्कन 9 रॉकेट लॉन्च करने के लिए 1.6 बिलियन डॉलर का बड़ा अनुबंध मिला है. ऐसे में बर्नी सैंडर्स की बात निराधार नहीं है.

पैसे देकर पावर खरीद रहे हैं एलन मस्क?

  1. बर्नी सैंडर्स ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि मस्क अब कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बनाए रखने के लिए 366 मिलियन डॉलर खर्च कर रहे हैं. सैंडर्स ने इसे अमेरिका में अमीर लोगों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से जोड़ते हुए इसकी कड़ी आलोचना की.
  2. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मस्क ने जुलाई से अब तक रिपब्लिकन समर्थक संगठनों को 276 मिलियन डॉलर दिए हैं. इनमें 158 मिलियन डॉलर सीनेट लीडरशिप फंड के जरिए रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में खर्च किए गए.
  3. रिपोर्ट के मुताबिक मस्क ने जुलाई से अब तक दक्षिणपंथी उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले संगठनों को 276 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,760 लाख डॉलर दिए हैं. इस रकम के साथ वह 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म चुनाव के सबसे बड़े निजी डोनर बन गए हैं.

रिपब्लिकन पार्टी को मुट्ठी में करना चाहते हैं मस्क?

एलन मस्क के राजनीतिक संगठन अमेरिका PAC के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो ने रिपब्लिकन पार्टी को दिए गए डोनेशन का बचाव करते हुए कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल करने से रोकने के लिए यह निवेश जरूरी है. मिड टर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के सामने ट्रंप की गिरती लोकप्रियता और महंगाई को लेकर मतदाताओं की नाराजगी जैसी चुनौतियां हैं. इस पूरी खाई को पाटने के लिए एलन मस्क पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं.  इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या अमेरिका में बड़े उद्योगपतियों का पैसा चुनावी राजनीति और नीतियों पर जरूरत से ज्यादा प्रभाव डाल रहा है.

एलन मस्क भारत में स्टारलिंक को लाने के लिए बेताब हैं. (AI Generated Image)

स्टारलिंक को मार्केट नहीं मिली, तो बौखलाए मस्क

अमेरिका में राजनीतिक खर्च को लेकर चर्चा के बीच मस्क भारत में अपने सैटेलाइट इंटरनेट कारोबार स्टारलिंक की एंट्री को लेकर भी सुर्खियों में हैं. चीन और रूस से स्टारलिंक को लेकर मुंह की खाने के बाद मस्क भारतीय बाजार में पांव जमाना चाहते हैं, इसे लेकर उन्होंने पिछले दिनों पोस्ट करते हुए लिखा था कि  भारतीय बाजार में स्टारलिंक आने से ग्राहकों को इंटरनेट सेवाओं के अधिक विकल्प मिलेंगे और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने भारतीय कारोबारियों को लेकर भी कमेंट किए थे और कहा कि वे स्टारलिंक की एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देरी नियामकीय प्रक्रियाओं और सुरक्षा संबंधी शर्तों की वजह से है.



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