Are Degrees Enough for Modern Careers: AI के दौर में तेजी से बदल रही हैं स्किल्स, क्या आप कल के लिए तैयार हैं?

Are Degrees Enough for Modern Careers: AI के दौर में तेजी से बदल रही हैं स्किल्स, क्या आप कल के लिए तैयार हैं?


नई दिल्ली (Are Degrees Enough for Modern Careers). नौकरी की दुनिया में डिग्री का सिक्का हमेशा से चलता आया है. बरसों से एक अनकहा नियम है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी करो, डिग्री लेकर अपनी पहली नौकरी हासिल कर लो. माना जाता है कि जिसके पास जितनी बड़ी डिग्री है, उसका भविष्य उतना ही सुरक्षित है. माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बच्चों की उच्च शिक्षा पर खर्च करते हैं. आज भी कई क्षेत्रों में डिग्री होना अनिवार्य शर्त है. इससे स्टूडेंट्स को फॉर्मल पहचान मिलती है.

कॉर्पोरेट जगत में बदलाव के साथ पुरानी इक्वेशन कमजोर पड़ रही है. डिग्री बताती है कि किसी ने क्या पढ़ा है. लेकिन इस बात की गारंटी नहीं देती कि वह ऑफिस की चुनौतियों से कैसे निपटेगा. बात नए प्रोजेक्ट को संभालने, क्लाइंट से डील करने या अचानक आई समस्या को सुलझाने की आती है तो कई बार किताबी ज्ञान कम पड़ जाता है. Marching Sheep की फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर सोनिका एरोन का मानना है कि डिग्री ज्ञान का बेस तैयार करती है, लेकिन प्रोफेशनल लाइफ के उतार-चढ़ाव की गारंटी नहीं दे सकती.

डिग्री है नींव, अनुभव है असली इमारत

इस बदलते दौर में सबसे अहम सवाल है कि क्या केवल डिग्री प्रोफेशनल दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है? दरअसल, किताबी पढ़ाई और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के बीच बड़ा फासला होता है.

उदाहरण के लिए, इंजीनियरिंग स्टूडेंट कंप्यूटर कोडिंग की भाषा के नियम तो अच्छी तरह समझ सकता है, लेकिन सिस्टम में अचानक एरर आ जाए और कोडिंग फेल हो जाए तो उसे वही सुलझाने के लिए प्रैक्टिकल अनुभव की जरूरत होगी.

इसीलिए अब इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स, वर्क प्लेसमेंट और प्रैक्टिकल असाइनमेंट्स का महत्व बहुत बढ़ गया है. पढ़ाई का मकसद सिर्फ कॉलेज को ऑफिस बनाना नहीं है. इससे स्टूडेंट्स को क्लासरूम की दुनिया से निकालकर असल दुनिया की परेशानियों से रूबरू कराना है.

‘अनुभव’ ही बन गया है एंट्री टिकट

देश-विदेश में स्किल्ड वर्कर्स की कमी ‘अनुभव की कमी’ दर्शाती है. जॉब मार्केट में उतरते ही फ्रेशर्स से प्रैक्टिकल नॉलेज की उम्मीद की जाती है. अनुभव के लिए स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप करनी पड़ती है, जो कई बार Unpaid होती है. ऐसे में वे पिछड़ जाते हैं जो आर्थिक तंगी के कारण बिना वेतन के काम नहीं कर सकते या जिनके पास बड़े शहरों में रहकर काम करने का साधन नहीं है. यह केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं है. यह समानता (Equity) का सवाल भी है कि आखिर अनुभव हासिल करने का अवसर किसे मिल रहा है.

AI और बदलते दौर में लगातार अपडेट हो रही हैं स्किल्स

हर कुछ साल में इंडस्ट्री की डिमांड बदल जाती है. कभी डिजिटल स्किल्स की मांग होती है तो कभी सॉफ्ट स्किल्स की. एआई के दौर ने बदलाव की स्पीड कई गुना बढ़ा दी है. टेक्नोलॉजी ने कई कामों को आसान या ऑटोमेट कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि स्टूडेंट्स जो पढ़ रहे हैं, वह तकनीक के आगे पुराना हो जाएगा तो वे क्या करेंगे? क्या वे बिना किसी की मदद के कुछ नया सीख सकते हैं? क्या वे गलत या अधूरा समाधान पहचानकर उसमें सुधार कर सकते हैं? यही ‘हार्ड स्किल्स’ सिखाना और परखना कठिन है.

पहली नौकरी से करें पूरे करियर की तैयारी

हायर एजुकेशन को अक्सर ‘पहली नौकरी’ का टिकट मान लिया जाता है. लेकिन यह सोच बहुत सीमित है. आज का युवा अपने करियर में कई बार इंडस्ट्री बदलेगा, नई टेक्नोलॉजी सीखेगा, ब्रेक लेगा या ऐसे दौर से गुजरेगा जहां उसका पूरा वर्कस्पेस बदल चुका होगा. इसीलिए कॉलेज-यूनिवर्सिटी और Employers को मिलकर सोचना होगा. डिग्री शुरुआती रास्ता दिखा सकती है, लेकिन आने वाले कल के तूफानों से निपटने के लिए स्किल्स और अनुभव के हथियारों से खुद ही लैस होना पड़ेगा.



Source link