राहुल गांधी की हाई टी बैठक से चर्चा में आया यह रिवाज, आखिर क्या होती है High Tea? जानिए इसमें क्या-क्या परोसा जाता है

राहुल गांधी की हाई टी बैठक से चर्चा में आया यह रिवाज, आखिर क्या होती है High Tea? जानिए इसमें क्या-क्या परोसा जाता है


What is High Tea: भारत में चाय केवल एक ड्रिंक नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है. सुबह उठने से लेकर शाम की थकान मिटाने तक, चाय पीने के कई बहाने मिल जाते हैं. घर पर कोई मेहमान आ जाए तो सबसे पहले चाय पूछी जाती है और उसके साथ बिस्कुट, नमकीन या पकौड़े भी रख दिए जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी हाई टी के बारे में सुना है? हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हाई टी को लेकर यह शब्द चर्चा में आ गया है. राहुल गांधी ने 13 अक्टूबर 2026 को अपने दिल्ली स्थित आवास पर कई सांसदों और दूसरे मेहमानों को हाई टी के लिए आमंत्रित किया है. इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि आखिर हाई टी क्या होती है और क्या इसमें सामान्य चाय से कुछ अलग परोसा जाता है? दरअसल, हाई टी का मतलब सिर्फ महंगी चाय पीना नहीं है.

यह चाय के साथ खाने-पीने और मेहमानों के साथ समय बिताने का एक खास तरीका है, जिसकी शुरुआत ब्रिटेन में हुई थी. आज होटल, कैफे, घरों की पार्टियों और औपचारिक कार्यक्रमों में हाई टी का चलन देखने को मिलता है. इसमें चाय के साथ कई तरह के नमकीन और मीठे व्यंजन रखे जा सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि हाई टी और आफ्टरनून टी को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, जबकि पारंपरिक रूप से दोनों अलग हैं. आइए जानते हैं हाई टी का इतिहास, इसमें परोसे जाने वाले खाने और इसे घर पर तैयार करने के आसान तरीके के बारे में.

राहुल गांधी ने मेहमानों को हाई टी पर क्यों बुलाया?
13 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी ने नई दिल्ली के सुनहरी बाग रोड स्थित अपने आवास पर हाई टी का कार्यक्रम रखा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें इंडिया गठबंधन के सांसदों के साथ सिविल सोसायटी और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है. कार्यक्रम से पहले एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की भी जानकारी सामने आई है.

हालांकि, यह एक राजनीतिक कार्यक्रम है, लेकिन यहां हमारी चर्चा राजनीति के बजाय हाई टी की परंपरा पर है. ऐसे आयोजनों में चाय के साथ हल्का नाश्ता परोसा जा सकता है और मेहमान आपस में बातचीत करते हैं. राहुल गांधी के इस कार्यक्रम का पूरा फूड मेन्यू सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वहां कौन-कौन से व्यंजन परोसे जाएंगे.

आखिर क्या होती है हाई टी?
हाई टी चाय के साथ खाने का एक पारंपरिक ब्रिटिश तरीका है. पुराने समय में यह शाम के खाने से जुड़ी होती थी. इसमें केवल चाय और बिस्कुट नहीं, बल्कि पेट भरने वाले व्यंजन भी शामिल होते थे. पारंपरिक हाई टी में ब्रेड, अंडे, मीट, पाई और दूसरे गर्म व्यंजन परोसे जा सकते थे. यह उन लोगों के लिए शाम का भोजन होता था, जो दिनभर काम करने के बाद घर लौटते थे. समय के साथ हाई टी का मतलब भी बदलता गया. आज भारत सहित कई देशों में होटल और कैफे हाई टी के नाम से चाय, कॉफी, सैंडविच, केक, पेस्ट्री और नमकीन स्नैक्स का खास मेन्यू पेश करते हैं. यही वजह है कि किसी कार्यक्रम के निमंत्रण में हाई टी लिखा हो तो आमतौर पर लोग समझते हैं कि वहां चाय के साथ खाने के कई विकल्प मिल सकते हैं.

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हाई टी नाम कैसे पड़ा, क्या इसका ऊंचाई से कोई संबंध है?
हाई टी नाम सुनकर कई लोगों को लगता है कि शायद यह किसी ऊंची जगह पर बैठकर चाय पीने का तरीका होगा. कुछ लोग इसे महंगे होटल या खास लोगों की पार्टी से भी जोड़ते हैं, लेकिन इसका इतिहास थोड़ा अलग है. ब्रिटेन में हाई टी का संबंध ऊंची डाइनिंग टेबल पर बैठकर भोजन करने की परंपरा से जोड़ा जाता है. पहले कामकाजी परिवार शाम को टेबल और कुर्सियों पर बैठकर चाय के साथ खाना खाते थे. इसके उलट, आफ्टरनून टी में अक्सर छोटी और नीची टेबल के आसपास बैठकर चाय और हल्का नाश्ता लिया जाता था. इस तरह हाई टी के नाम में मौजूद हाई शब्द को पारंपरिक रूप से टेबल की ऊंचाई से जोड़ा जाता है, न कि चाय की कीमत या किसी व्यक्ति के सामाजिक दर्जे से.

(इमेज AI)

हाई टी और आफ्टरनून टी में क्या अंतर है?
हाई टी और आफ्टरनून टी को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों की शुरुआत अलग जरूरतों से हुई थी. आफ्टरनून टी का चलन ब्रिटेन में दोपहर और रात के खाने के बीच हल्की भूख मिटाने के लिए लोकप्रिय हुआ. इसमें चाय के साथ छोटे सैंडविच, स्कोन, जैम, क्रीम, केक और पेस्ट्री जैसी चीजें परोसी जाती थीं. वहीं, पारंपरिक हाई टी शाम के समय लिया जाने वाला ज्यादा भरपेट भोजन था. इसमें चाय के साथ गर्म और नमकीन खाने की चीजों को भी जगह मिलती थी. आज कई होटल अपने आफ्टरनून टी जैसे मेन्यू को भी हाई टी कहते हैं. इसलिए किसी होटल या कार्यक्रम में दोनों शब्दों का इस्तेमाल हमेशा पुराने ब्रिटिश अर्थ के अनुसार नहीं होता.

हाई टी में खाने के लिए क्या-क्या दिया जाता है?
आजकल हाई टी का मेन्यू जगह, बजट और मेहमानों की पसंद के अनुसार तैयार किया जाता है. इसमें सबसे जरूरी चीज चाय होती है. कई जगह दूध वाली चाय के अलावा ग्रीन टी, ब्लैक टी, हर्बल टी और फ्लेवर्ड टी के विकल्प भी रखे जाते हैं. खाने की बात करें तो वेज सैंडविच, चीज सैंडविच, मिनी बर्गर, पनीर टिक्का, कटलेट, समोसे, पकौड़े और छोटे स्नैक्स परोसे जा सकते हैं. मीठे में केक, कुकीज, पेस्ट्री, मफिन और दूसरी मिठाइयां शामिल की जा सकती हैं. कुछ जगहों पर हाई टी में फ्रूट प्लेटर और जूस भी रखा जाता है. इसका मकसद मेहमानों को अलग-अलग स्वाद के छोटे-छोटे विकल्प देना होता है, ताकि वे बातचीत करते हुए खाने का आनंद ले सकें.

हाई टी किस समय रखी जाती है?
पारंपरिक रूप से हाई टी शाम के समय, करीब 5 से 7 बजे के बीच ली जाती थी. यह कई परिवारों के लिए शाम का मुख्य भोजन भी होती थी. आज के समय में इसका कोई एक तय समय नहीं है. होटल और कैफे अपनी सुविधा के अनुसार दोपहर से शाम तक हाई टी सर्व कर सकते हैं. कई जगह दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे के बीच हाई टी का मेन्यू उपलब्ध रहता है. घर में भी हाई टी पार्टी रखने के लिए शाम का समय अच्छा माना जा सकता है. इस दौरान लोग दिनभर के काम से थोड़ा समय निकालकर दोस्तों और परिवार के साथ बैठ सकते हैं.

भारत में हाई टी का चलन क्यों बढ़ रहा है?
भारत में चाय के साथ नाश्ता करने की परंपरा पहले से ही रही है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसे कई जगह हाई टी के नाम से पेश किया जाता है. शादी से पहले होने वाले छोटे कार्यक्रम, ऑफिस मीटिंग, जन्मदिन, किटी पार्टी और पारिवारिक समारोहों में हाई टी का आयोजन किया जा सकता है. इसमें पूरा लंच या डिनर रखने की जरूरत नहीं होती. हाई टी का एक फायदा यह भी है कि मेहमान अपनी पसंद के अनुसार थोड़ा-थोड़ा खाना ले सकते हैं. बड़े भोजन की तुलना में इसका मेन्यू हल्का रखा जा सकता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर हाई टी सस्ती हो. खर्च पूरी तरह खाने के विकल्पों और आयोजन की जगह पर निर्भर करता है.

घर पर हाई टी पार्टी कैसे तैयार करें?
अगर आप अपने घर पर हाई टी पार्टी रखना चाहते हैं तो इसके लिए महंगे बर्तन या होटल जैसा इंतजाम करने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद सामान से भी अच्छा मेन्यू तैयार किया जा सकता है. सबसे पहले मेहमानों की संख्या के अनुसार चाय की व्यवस्था करें. आप सामान्य अदरक-इलायची वाली चाय के साथ एक दूसरा विकल्प भी रख सकते हैं. इसके बाद दो से तीन नमकीन और एक या दो मीठे व्यंजन चुनें. उदाहरण के लिए, वेज सैंडविच, मिनी समोसे, पनीर कटलेट और बिस्कुट के साथ केक रखा जा सकता है. अगर भारतीय स्वाद पसंद है तो ढोकला, मठरी, नमकपारे और पकौड़े भी अच्छे विकल्प हैं. खाने को छोटी प्लेटों में सजाकर रखें, ताकि मेहमान आसानी से सर्व कर सकें. चाय के कप, नैपकिन और पानी की व्यवस्था भी पहले से कर लें. इस तरह कम मेहनत में घर पर अच्छी हाई टी पार्टी तैयार हो सकती है.

हाई टी में मेहमानों को कैसे सर्व किया जाता है?
हाई टी की एक खास बात उसका सर्व करने का अंदाज भी है. कई होटल में छोटे सैंडविच, पेस्ट्री और स्नैक्स को दो या तीन स्तर वाली ट्रे में सजाकर रखा जाता है. हालांकि, यह सजावट खास तौर पर आधुनिक आफ्टरनून टी सर्विस से जुड़ी है. घर पर आप सामान्य सर्विंग ट्रे या अलग-अलग प्लेटों का इस्तेमाल कर सकते हैं. कोशिश करें कि नमकीन और मीठी चीजें अलग रखी जाएं. इससे मेहमान अपनी पसंद के अनुसार खाना चुन सकते हैं. चाय को बहुत पहले बनाकर रखने के बजाय मेहमानों के आने के आसपास तैयार करना बेहतर रहता है, ताकि उसका स्वाद और खुशबू बनी रहे.

क्या हाई टी केवल अमीर लोगों की पार्टी होती है?
हाई टी को लेकर एक आम धारणा है कि यह सिर्फ बड़े होटल, खास मेहमानों या महंगे आयोजनों से जुड़ी होती है. लेकिन ऐसा नहीं है. इसकी शुरुआत कामकाजी परिवारों के शाम के भोजन से जुड़ी थी. आज भी इसे घर पर साधारण तरीके से आयोजित किया जा सकता है. जरूरी नहीं कि हाई टी में विदेशी स्नैक्स या महंगी चाय ही परोसी जाए. चाय के साथ घर के बने समोसे, सैंडविच, ढोकला या मठरी रखकर भी हाई टी का आयोजन किया जा सकता है. राहुल गांधी के हाई टी कार्यक्रम के कारण यह शब्द एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इसका मतलब केवल किसी खास राजनीतिक या औपचारिक बैठक से नहीं जुड़ा है. हाई टी खाने-पीने और लोगों के साथ बैठकर समय बिताने की एक पुरानी परंपरा है, जो आज अलग-अलग रूपों में लोकप्रिय है.



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