Ram Temple Receives Eat Right Place Of Worship Certificate: सौ बात की एक बात ये कि खबर पता चली आपको कि अब अयोध्या के राम मंदिर के प्रसाद को सर्टिफिकेट मिल गया है? मतलब प्रसाद को ही नहीं मंदिर को ही सर्टिफिकेट मिल गया है कि अयोध्या का राम मंदिर ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप’ है. ज़्यादातर पब्लिक तो ये जानती ही नहीं कि मंदिरों को भी सर्टिफिकेट दिए जाते हैं. और ये किस बात की सर्टिफ़िकेट है? ये इस बात का सर्टिफ़िकेट है कि इस धर्मस्थल में खाने-पीने का जो कुछ भी मिल रहा है वो साफ है, स्वच्छ है. ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप. ये सर्टिफिकेट सरकार देती है. मतलब सरकार की जो अथॉरिटी है ना FSSAI, जो खाने-पीने की चीज़ों के मानक तय करती है वो पैकेट वाला खाना बनाने वाली कंपनियों को ही नहीं, मंदिरों को भी सर्टिफिकेट देती है. कि यहां का प्रसाद या लंगर वगैरह साफ़ है स्वच्छ है.
अब ये मत कहियेगा कि मंदिरों पर ही सारे कानून लगा रखे हैं, मस्जिदों को कोई नहीं पूछता. सर्टिफ़िकेट का नाम है ‘ईट राइट प्लेस ऑफ़ वर्शिप’, प्लेस ऑफ वर्शिप मतलब किसी भी धर्म का उपासना स्थल. तो उसमें मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च सब आते हैं. बल्कि सभी धर्मस्थलों के लिए ये व्यवस्था थी इसीलिए इसका नाम बदला भी गया था. पहले FSSAI के इस कार्यक्रम का नाम था ‘प्रॉजेक्ट BHOG’, BHOG, ब्लिसफ़ुल हायजीनिक ऑफ़रिंग टू गॉड. लेकिन क्योंकि ‘भोग’ शब्द पारंपरिक हिंदू रीति रिवाज से जुड़ा रहा है इसलिए FSSAI ने इस कार्यक्रम के तहत दिये जाने वाले सर्टिफ़िकेट का नाम ही बदल कर ‘ईट राइट प्लेस ऑफ़ वर्शिप’ कर दिया. क्योंकि ये सर्टिफ़िकेट मंदिरों को भी दिया जाता है, मस्जिदों को भी दिया जाता है, गुरुद्वारों को भी, गिरिजाघरों को भी, बौध मठों को भी, किसी भी धर्मस्थल के लिए है. ये कोई नया सर्टिफ़िकेट नहीं है.
2018 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट BHOG
अयोध्या के राम मंदिर को अभी मिला है तो शायद ज़्यादा लोगों को इसके बारे में पता चल रहा है लेकिन ये काफ़ी पहले से दिया जाता रहा है. FSSAI ने ये प्रॉजेक्ट BHOG शुरू किया था 2018 में. हुआ ये था कि 2015 में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के प्रशासन ने देखा कि कई विदेशी श्रद्धालु जो मंदिर में आ रहे थे वो मंदिर का प्रसाद नहीं ले रहे थे क्योंकि उनको डर लग रहा था कि कहीं उसको खाने से उनकी तबीयत ना बिगड़ जाए. तो मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के प्रशासन ने सोचा कि अगर मंदिर के प्रसाद को कोई ऐसा सर्टिफ़िकेट मिल जाए किसी सरकारी एजेंसी दे कि वहां का प्रसाद स्वच्छ है तो जो भी मंदिर आएंगे, ख़ासकर विदेशी श्रद्धालु जो भारत में कहीं भी कुछ भी खाने से फ़ूड पॉयज़निंग होने से डरते हैं, उनको एक भरोसा हो जाएगा कि बिना डर के प्रसाद ले सकते हैं. तो सिद्धिविनायक मंदिर के प्रशासन ने FSSAI के साथ मिलकर एक पायलट प्रॉजेक्ट चलाया जिसमें प्रसाद बनाने की सामग्री के मानक तय किये गए. कि आटा ऐसा वाला होगा, घी ऐसा होगा, चीनी यहां से आएगी वगैरह-वगैरह सारे स्टैंडर्ड तय किये गए.
साफ़-सफ़ाई का पूरा प्रोटोकॉल बनाया गया. रसोई को अपग्रेड किया गया. और सबसे ख़ास बात ये कि प्रसाद बनाने वालों की पूरी स्वच्छता की ट्रेनिंग की गई और सारी प्रक्रिया की चेकिंग का सिस्टम बनाया गया. और FSSAI का सर्टिफ़िकेट लगाया गया मंदिर में लोगों को स्वच्छता का भरोसा देने के लिए. सिद्धिविनायक के बाद ये सिस्टम बनाया गया शिरडी के साई बाबा मंदिर में. और जब इन दोनों मंदिरों में ये सफल रहा था तो FSSAI ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रालयों से संपर्क किया और फ़ूड सेफ़्टी के एक्सपर्ट लोगों से बात की और ये देखा गया कि भारत में तो धर्म स्थलों में रोज़ 30 करोड़ लोग जाते हैं. 30 करोड़ लोग रोज़. प्रसाद बंटता है, लंगर लगते हैं, भंडारे लगते हैं, तो ये तय किया गया कि फ़ूड पॉयज़निंग जैसी किसी घटना को रोकने के लिए देश भर में ये अभियान शुरू किया जाए. और 2018 में ये प्रॉजेक्ट BHOG शुरू किया गया था. और सिर्फ़ फ़ूड पॉयज़निंग की ही बात नहीं है, जो पानी प्रसाद और लंगर या भंडारे का खाना बनाने में इस्तेमाल होता है वो साफ़ हो, जो सामग्री इस्तेमाल होती है वो साफ़ रखी जाए, उसको स्वच्छता से स्टोर किया जाए, वो सब इसके तहत देखा जाता है.
धर्मस्थलों की रसोइयां ही नहीं, बाहर से जो ठेकेदार प्रसाद सामग्री सप्लाई करते हैं उनके यहां भी स्वच्छता चेक की जाती है. खाने का तेल बार-बार इस्तेमाल ना हो ये देखा जाता है. कोई रंग ना डाले जाएं खाने में, प्रसाद में. और यहां तक कि जो कचरा होता है या जो प्रसाद या खाना बच जाता है, बासी हो जाता है, वो कहीं इस्तेमाल ना हो, उसको फेंकने का पूरा सिस्टम बनाना पड़ता है ये सर्टिफ़िकेट लेने के लिए. पूरा ऑडिट होता है तब जाकर ये सर्टिफ़िकेट दिया जाता है.
114 पॉयंट पर इंस्पेक्शन
टोटल 114 पॉयंट पर इंस्पेक्शन होता है. पूरी ऑडिट की एक चेकलिस्ट होती है, धर्म स्थल की रसोई की, वहां के पानी के क्वॉलिटी की, स्टाफ़ की साफ़ सफ़ाई की, और बाहर से जो ठेकेदार सामग्री सप्लाई करते हैं उनकी. 114 पॉयंट में 90 पायंट से नीचे जिसके होते हैं उस धर्म स्थल को सर्टिफ़िकेट नहीं मिलता. जिनको मिलता है उनकी भी दो तरह की रेटिंग होती है. 91-99 पॉयंट पर ‘सैटिस्फ़ैक्टरी’, ‘संतोषजनक’ रेटिंग वाला सर्टिफ़िकेट दिया जाता है. और 100 से 114 पॉयंट पर ‘एक्सिलेंट’, ‘अति विशिष्ट’ रेटिंग वाला सर्टिफ़िकेट दिया जाता है. अयोध्या के राम मंदिर को 103 पॉयंट मिले ऑडिट में तो उसको भी ‘अति विशिष्ट’ रेटिंग वाला सर्टिफ़िकेट दिया गया है. दो साल तक, अक्टूबर 2028 तक ये सर्टिफ़िकेट वैलिड रहेगा. ये सर्टिफ़िकेट दो साल तक दिया जाता है मतलब ये नहीं कि बीच में कोई चेकिंग-वेकिंग नहीं होती. बीच-बीच में अधिकारी आ कर चेकिंग भी करेंगे, ऐसा नियम है.
अयोध्या के कई मंदिर को मिला सर्टिफिकेट
अयोध्या में राम मंदिर को भी ये सर्टिफ़िकेट मिल गया, हनुमानगढ़ी को भी, कनक भवन को भी, साथ ही एक जैन मंदिर को भी और देवकाली मंदिर को भी. अब तक ये सर्टिफ़िकेशन देश भर में 1100 से ज़्यादा धर्म स्थल ले चुके हैं. कश्मीर की हज़रतबल दरगाह हो, या अमृतसर में हरमंदिर साहिब हो, दक्षिण भारत के तिरुपति मंदिरों से लेकर कई बौध मठों तक, 1100 से ज़्यादा धर्म स्थल ये ‘ईट राइट प्लेस ऑफ़ वर्शिप’ सर्टिफ़िकेशन ले चुके हैं. लेकिन आपने नोट किया हम बार-बार ये कह रहे हैं कि ये धर्म स्थल ये सर्टिफ़िकेट ले चुके हैं. मतलब ये कंपलसरी नहीं है लेना. ये सर्टिफ़िकेट लेने के लिए अप्लाई करना पड़ता है.
ज़रूरी नहीं है कि हर मंदिर, हर गुरुद्वारा इसको ले. बेसिक FSSAI का लायसेंस तो लेने पड़ता है अगर बड़ी संख्या में लोगों को लंगर दिया जाना है या कोई भंडारा किया जाना है, या प्रसाद बांटा जाना है, लेकिन ये वाला सर्टिफ़िकेट लेना कोई ज़रूरी नहीं है. ऐसा कोई क़ानून नहीं बनाया गया है. ये तो अभी सिर्फ़ श्रद्धालुओं को आश्वस्त करने के लिए है कि आप बेफ़िक्र हो कर प्रसाद ले सकते हैं यहां से. अब राम मंदिर तो ये सर्टिफ़िकेट मिल गया है तो इस बहाने और पब्लिक को भी पता चलेगा कि इस तरह का कोई सर्टिफ़िकेट भी होता है जो प्रसाद की शुद्धता पर मुहर लगाता है, और फिर हर धर्म स्थल में ऐसी शुद्धता और स्वच्छता की मांग होने लगे तो इससे अच्छा औऱ क्या हो सकता है. आस्था की रक्षा के साथ स्वास्थ्य की रक्षा भी तो पुण्य का ही काम हुआ. सौ बात की एक बात.