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Liquor Contract Scam: मध्य प्रदेश के शराब ठेका मामले में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी दीपम रायचूरा को आबकारी आयुक्त ने निलंबित कर दिया है. जांच कमेटी की रिपोर्ट में भोपाल के टीटी नगर की दो दुकानों के ठेके और ट्रांसफर में सात गड़बड़ियां मिली हैं.
Liquor Contract Scam: मध्य प्रदेश में शराब ठेका मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है. डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी दीपम रायचूरा को आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर की गई. जांच में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके देने और बाद में उनका ट्रांसफर करने में सात गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं. यह मामला करीब एक हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया के आरोपों के बाद चर्चा में आया. गोगिया ने आरोप लगाया था कि शराब का ठेका दिलाने के बदले एक करोड़ रुपए रिश्वत ली गई थी.
जांच में सामने आईं प्रमुख गड़बड़ियां
फर्जी ई-एफडीआर और वेरिफिकेशन रिपोर्ट: जांच के अनुसार, 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपए की ई-एफडीआर जमा की गई थी. इसके साथ बैंक का वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी लगाई गई. बाद में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने साफ किया कि उसने यह एफडीआर जारी ही नहीं की थी. जांच में वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी फर्जी पाई गई. फाइल में बैंक को लेटर भेजने का रिकॉर्ड भी नहीं मिला.
नियमों के खिलाफ बैंक की सिक्योरिटी: 8 फरवरी 2024 के राजपत्र में तय नियमों के अनुसार, निर्धारित कैटेगरीज के बैंकों की सिक्योरिटी ही स्वीकार की जानी थी. इसके बावजूद एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की सिक्योरिटी स्वीकार कर ली गई.
सिक्योरिटी जमा करने में देरी: लाइसेंसी ने 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपए नकद जमा किए थे. यह राशि 20 अप्रैल 2024 को न्यूनतम गारंटी ड्यूटी में समायोजित की गई. बाकी सिक्योरिटी 30 अप्रैल तक जमा करनी थी, लेकिन इसे 12 मई को जमा किया गया. इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई.
पार्टनरशिप की जांच किए बिना ठेका ट्रांसफर: मेसर्स मां माइन्स के ठेके को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में साझेदारी से जुड़े दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी मिली. दस्तावेजों में विजय सिंह का नाम होने और पोर्टल पर उपलब्ध पार्टनरशिप डीड में नाम नहीं होने के बीच अंतर पाया गया.
गैर-भागीदार की बैंक गारंटी स्वीकार: विजय सिंह ने आईसीआईसीआई बैंक की 76 लाख रुपए की ई-बैंक गारंटी जमा की थी. जांच के मुताबिक, वे न मूल लाइसेंसी थे और न ही ट्रांसफर के समय फर्म के हिस्सेदार थे. इसके बावजूद उनकी गारंटी स्वीकार कर ली गई. फिलहाल, जांच रिपोर्ट के आधार पर रायचूरा को निलंबित किया गया है. इस मामले में सामने आई अनियमितताओं और रिश्वत के आरोपों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है.