भारत में चुनाव आयोग की बात हो और टी.एन. शेषन का नाम ना आए तो कुछ अधूरा सा रह जाता है. इस समय जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मुद्दे पर दिल्ली की सड़कें गरमाई हुई हैं तो शेषन का जिक्र फिर आया है. दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ से प्रदर्शन और विरोध के बीच अब सत्तारूढ़ मोदी सरकार के मंत्री पीयूष गोयल का पलटवार आया है. गोयल ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उनके इतिहास और ट्रैक रिकॉर्ड की याद दिला दी है. उन्होंने कांग्रेस राज के कुछ CEC का उदाहरण देते हुए पुरस्कार देने की बात कही. किसी को राज्यपाल बनाया गया तो किसी को लोकसभा चुनाव लड़वा दिया. इसमें एक नाम शेषन का भी है, जिनको कांग्रेस ने टिकट देकर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार दिया था.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों का नाम लेते हुए निशाना साधा. सबसे पहले गोयल ने कहा कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर टीएन शेषन की ईमानदारी का कांग्रेस बड़ा गुणगान करती थी. लेकिन 1999 में उन्हें, आडवाणी के सामने कांग्रेस के टिकट पर खड़ा होने का मौका दिया गया. इसके बाद गोयल ने 1996 से 2001 तक चीफ इलेक्शन कमिश्नर रहे एम एस गिल का उदाहरण भी दिया.
टी. एन. शेषन
टी. एन. शेषन की पहचान देश के टॉप लेवल ब्यूरोक्रेट और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर है. उन्हें भारत में चुनावी सुधारों का जनक माना जाता है, जिन्होंने इलेक्टोरल प्रॉसेस को पारदर्शी, निष्पक्ष, भ्रष्टाचार मुक्त बना दिया था. कैबिनेट सचिव रैंक पर रहे शेषन को रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस की ही सरकार के समय देश का CEC बनाया गया. वह 1990 से लेकर 1996 तक इस पद पर रहे. यह देश की सियासत में हलचल का दौर था.
1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने टी. एन. शेषन को चुनावी मैदान में उतार दिया. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त शेषन कांग्रेस के टिकट पर गुजरात की गांधीनगर सीट से भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे थे. हालांकि इस आम चुनाव में शेषन को आडवाणी के हाथों करीब एक लाख 80 हजार वोटों के अंतर से हार मिली.
एम. एस. गिल
बीजेपी मंत्री पीयूष गोयल ने जिस दूसरे शख्स का नाम लिया वो पंजाब कैडर के IAS अधिकारी एम. एस. गिल थे. उन्होंने शेषन के बाद 1996 से 2001 तक देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर का पद संभाला. साल 2000 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया. बीजेपी ने इस पर भी सवाल उठाया कि पद पर रहते हुए उन्हें कारनामों का रिवार्ड दिया गया.
चुनाव में EVM का बड़े पैमाने पर यूज करने वाले गिल ने रिटायरमेंट के 3 साल बाद उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर लिया था. वह कांग्रेस के टिकट पर 2004 में राज्यसभा सांसद बने. फिर 2008 में मनमोहन सिंह की सरकार में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में खेल और युवा मामलों का मंत्री बनाया जाता है.
आर. के. त्रिवेदी
पीयूष गोयल ने अगला नाम रामकृष्ण त्रिवेदी का नाम लिया. साल 1982 से लेकर 1985 तक भारत के 7वें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहे त्रिवेदी को रिटायरमेंट के बाद 26 फरवरी 1986 को राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार ने गुजरात का राज्यपाल बनाया था.
नवीन चावला
भाजपा की तरफ से यूपीए सरकार के समय नवीन चावला की चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्ति को लेकर भी निशाना साधा गया. उन्होंने सोनिया गांधी की तरफ से चावला को चुनाव आयुक्त बनाए जाने को लेकर सवाल उठाया कि बिना किसी सरकारी पद पर रहे वो किस हैसियत से तय कर रही थीं कि किसे कौन सा पद दिया जाए? बाद में नवीन चावला मुख्य चुनाव आयुक्त भी बन गए.
इसके अलावा पीयूष गोयल ने केरल के दो अन्य अधिकारियों का नाम लिया. उन्होंने कहा कि टीकाराम मीणा केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे. एक साल बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में ले लिया गया. वहीं इस साल ही केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर रतन यू केलकर को चुनाव के तुरंत बाद मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने अपना चीफ सेक्रेटरी घोषित कर दिया.