मुंबई. पुणे की आईटी इंजीनियर तृष्णा राहुल सकपाल की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए है. इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शादी के बाद पति या ससुराल वाले महिला की कमाई पर अपना अधिकार जता सकते हैं? इतना ही नहीं क्या बहू के माता-पिता के घर या उसकी निजी संपत्ति पर सास-ससुर का हक हो सकता है? क्या पत्नी की पूरी सैलरी पति को देनी जरूरी है? इन सवालों का जवाब समझना जरूरी है, क्योंकि शादी होने से किसी महिला की कमाई और संपत्ति पर अपने-आप पति या ससुराल वालों का मालिकाना हक नहीं बन जाता. हालांकि, संपत्ति किसके नाम है, पैसा किसका है, कोई साथ निवेश या कर्ज है या नहीं और मामला किस तरह का है-इन बातों से कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है.
पुणे में IT इंजीनियर की मौत, सैलरी और फ्लैट मांगने का आरोप
महाराष्ट्र के पुणे में 33 वर्षीय IT इंजीनियर तृष्णा राहुल सकपाल की 29 सितंबर को अपनी जान ले ली थी. उनके पिता बालकृष्ण निकम की शिकायत के मुताबिक, तृष्णा की शादी साल 2018 में राहुल सकपाल से हुई थी. पिता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही तृष्णा पर अपनी पूरी सैलरी देने का दबाव बनाया जा रहा था. इसके अलावा, उनके मायके के फ्लैट को सास के नाम करने और ससुर के लिए एक करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदने की मांग भी की गई थी. शिकायत के मुताबिक, कथित शारीरिक प्रताड़ना से परेशान होकर तृष्णा 2021 में अपने मायके लौट आई थीं. इसके बाद उनके पति ने दूसरी शादी करने के लिए तलाक की अर्जी दी. यह मामला अदालत में लंबित बताया गया है.
पुलिस को मिले नोट में तृष्णा ने अपने पति राहुल, सास वैशाली, ससुर संजय, ननद शैली और दादी-सास शकुंतला सालुंके को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया. पिता की शिकायत के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. ये आरोप हैं, जिनकी जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए पुष्टि होनी बाकी है.
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि कानून के मुताबिक पत्नी की सैलरी और बहू की संपत्ति पर पति या ससुराल वालों का कितना अधिकार है?
1. क्या पत्नी की सैलरी पर पति का अधिकार होता है?
सीनियर वकील अमित सहानी ने बताया कि नहीं, सिर्फ शादी हो जाने से पति पत्नी की पूरी सैलरी का मालिक नहीं बन जाता. अगर पत्नी नौकरी करती है और अपनी कमाई से खर्च चलाती है, बचत करती है या संपत्ति खरीदती है, तो उसकी कमाई पर उसका अपना अधिकार होता है. पति यह नहीं कह सकता कि शादी के बाद पत्नी की पूरी तनख्वाह उसे सौंपना कानूनी रूप से अनिवार्य है. पति-पत्नी आपसी सहमति से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, किराया, ईएमआई और अन्य जिम्मेदारियां बांट सकते हैं लेकिन यह आपसी व्यवस्था और सहमति का विषय है. पत्नी की कमाई पर जबरन कब्जा करना या उसे पैसे देने के लिए धमकाना अलग कानूनी सवाल खड़ा कर सकता है.
यहां एक बात समझना जरूरी है: घर चलाने की जिम्मेदारी साझा हो सकती है लेकिन इससे एक साथी दूसरे की पूरी कमाई का मालिक नहीं बन जाता.
2. क्या बहू की संपत्ति पर सास-ससुर का अधिकार होता है?
सीनियर एडवोकेट अमित सहानी ने बताया कि आम तौर पर बहू की अपनी संपत्ति पर सास-ससुर का अपने-आप कोई मालिकाना हक नहीं बनता. अगर किसी महिला ने अपने पैसों से फ्लैट खरीदा है, उसे विरासत में संपत्ति मिली है या उसके नाम पर कोई संपत्ति उपहार में दी गई है, तो उस संपत्ति पर उसके अधिकार संबंधित दस्तावेजों और लागू कानून के अनुसार तय होते हैं. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 14 के तहत हिंदू महिला की संपत्ति सामान्य तौर पर उसकी पूर्ण संपत्ति मानी जाती है.
3. क्या पत्नी के माता-पिता का फ्लैट सास के नाम करवाया जा सकता है?
अगर फ्लैट पत्नी या उसके माता-पिता की संपत्ति है तो पति या ससुराल वाले केवल रिश्ते के आधार पर उसे अपने नाम कराने का अधिकार नहीं रखते. यदि संपत्ति पत्नी के नाम है तो उसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने के लिए लागू कानूनी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों का पालन करना होगा. किसी की संपत्ति जबरन अपने नाम कराने का दबाव डालना सामान्य पारिवारिक मांग भर नहीं है. यदि यह दबाव दहेज की मांग या प्रताड़ना से जुड़ा हो, तो कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है. पुणे के मामले में तृष्णा के पिता ने आरोप लगाया है कि उनसे मायके का फ्लैट सास के नाम करने और ससुर के लिए एक करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदने की मांग की गई थी. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
4. क्या सास-ससुर बहू से दहेज में पैसे या संपत्ति मांग सकते हैं?
नहीं. दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज मांगना, लेना और देना प्रतिबंधित है. कानून में दहेज की परिभाषा में शादी के संबंध में सीधे या परोक्ष रूप से मांगी गई संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा भी शामिल हो सकती है. हालांकि, किसी विशेष मांग पर यह कानून लागू होगा या नहीं, यह मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए, यदि शादी के बाद महिला या उसके परिवार पर किसी संपत्ति, नकदी या महंगे सामान की मांग पूरी करने के लिए दबाव बनाया जाता है तो परिस्थितियों के आधार पर यह दहेज उत्पीड़न का मामला बन सकता है.
5. पत्नी को प्रताड़ित करने पर कौन-सा कानून लागू हो सकता है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 में पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता करने पर सजा का प्रावधान है. धारा 86 में क्रूरता की परिभाषा दी गई है. इसमें ऐसा जानबूझकर किया गया व्यवहार शामिल हो सकता है, जिससे महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर होने की आशंका हो या उसे गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक नुकसान पहुंचे. गैरकानूनी संपत्ति की मांग पूरी कराने के लिए उत्पीड़न भी इस दायरे में आ सकता है. इसके अलावा, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत परिस्थितियों के अनुसार महिला सुरक्षा आदेश, रहने के अधिकार, आर्थिक राहत और मुआवजे जैसी राहत मांग सकती है. साझा घर में रहने का अधिकार और उस घर का मालिकाना हक दो अलग बातें हैं.
6. क्या पति पत्नी की संपत्ति बेच सकता है या अपने नाम कर सकता है?
सिर्फ पति होने से उसे पत्नी की अलग संपत्ति बेचने या अपने नाम ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं मिल जाता. संपत्ति का मालिकाना हक, दस्तावेज और वैध अनुमति महत्वपूर्ण होते हैं. यदि संपत्ति संयुक्त नाम पर है तो दोनों के अधिकार संबंधित दस्तावेजों और कानून के अनुसार तय होंगे. इसी तरह, अगर पत्नी ने पति के साथ मिलकर घर खरीदा है या किसी संपत्ति में दोनों का निवेश है तो स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए संपत्ति से जुड़ा विवाद होने पर केवल शादी के रिश्ते के आधार पर फैसला नहीं किया जा सकता. रजिस्ट्री, भुगतान का रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और अन्य प्रमाण देखना जरूरी होता है.
7. अगर पति या ससुराल वाले सैलरी या संपत्ति के लिए दबाव बनाएं तो क्या करें?
यदि किसी महिला पर उसकी कमाई या संपत्ति सौंपने के लिए दबाव बनाया जा रहा है तो वह ये कदम उठा सकती है:
– बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, संपत्ति के दस्तावेज और पैसों से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखे.
– धमकी, उत्पीड़न या पैसों की मांग से जुड़े संदेश और अन्य उपलब्ध सबूत संभालकर रखे.
– जरूरत के मुताबिक पुलिस, महिला हेल्प डेस्क या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करे.
– घरेलू हिंसा या संपत्ति विवाद के मामले में वकील से सलाह लेकर उचित कानूनी राहत के लिए आवेदन करे.
अगर किसी महिला को तत्काल खतरा है, तो उसे सुरक्षित स्थान पर जाने और पुलिस या स्थानीय आपातकालीन सहायता लेने को प्राथमिकता देनी चाहिए.