अमेरिका में भारतीय मूल के सिख नेता रंजीव पुरी मिशिगन राज्य की प्रतिनिधि सभा के स्पीकर बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं. अगर 3 नवंबर 2026 को होने वाले चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन पार्टी से सदन का नियंत्रण हासिल कर लेती है और पुरी अपनी सीट भी जीत जाते हैं, तो वह अमेरिका के किसी राज्य की प्रतिनिधि सभा के पहले भारतीय-अमेरिकी स्पीकर बन सकते हैं. फिलहाल मिशिगन की 110 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है और मैट हॉल स्पीकर हैं.
42 वर्षीय रंजीव पुरी पंजाबी प्रवासी परिवार से आते हैं. साल 2020 में वह मिशिगन की स्टेट हाउस के लिए चुने जाने वाले पहले सिख-अमेरिकी बने थे. मिशिगन हाउस डेमोक्रेट्स की प्रोफाइल के मुताबिक, वह अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले अश्वेत या गैर-श्वेत व्यक्ति भी हैं. अब उनकी नजर राज्य की राजनीति के सबसे अहम पदों में से एक पर है. हालांकि, उनका स्पीकर बनना केवल उनकी खुद की जीत पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि यह भी जरूरी होगा कि डेमोक्रेट्स सदन में बहुमत हासिल करें.
कौन हैं रंजीव पुरी?
रंजीव पुरी का जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य के रैसीन शहर में पंजाबी प्रवासी परिवार में हुआ था. उन्होंने ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और 2014 में शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की. राजनीति में आने से पहले उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया. उनका अनुभव मिशिगन के ऑटोमोबाइल उद्योग से भी जुड़ा रहा, जहां उन्होंने फिएट क्राइसलर में कारोबार और तकनीक से संबंधित पहलों पर काम किया.
पुरी की राजनीति में दिलचस्पी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के चुनाव अभियानों से बढ़ी. उन्होंने 2008 और 2012 में ओबामा के राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में हिस्सा लिया था. पुरी के मुताबिक, इन अभियानों के अनुभव ने उन्हें अपने समुदाय में बदलाव लाने के लिए राजनीति में सक्रिय होने की प्रेरणा दी. इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति में कदम रखा और 2020 में पहली बार मिशिगन की प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता.
डेमोक्रेटिक पार्टी में बढ़ा कद
रंजीव पुरी मिशिगन के 24वें हाउस डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करते हैं और इस वक्त अपने तीसरे कार्यकाल में हैं. 2023-24 के विधायी सत्र के दौरान उन्हें हाउस मेजॉरिटी व्हिप की जिम्मेदारी दी गई थी. यह डेमोक्रेटिक पार्टी के सदन में नेतृत्व से जुड़ा अहम पद है. इसके अलावा, उन्होंने परिवहन से संबंधित विनियोग उपसमिति की अध्यक्षता भी की. इस भूमिका में उन्होंने मिशिगन के परिवहन बजट पर काम किया, जिसमें वित्त वर्ष 2024 के लिए परिवहन विभाग के 6.6 अरब डॉलर के बजट से जुड़ा काम भी शामिल था.
नवंबर 2024 में डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायकों ने उन्हें 2025-26 के विधायी कार्यकाल के लिए अपने दल का नेता चुना. उन्होंने जनवरी 2025 में हाउस डेमोक्रेटिक लीडर की जिम्मेदारी संभाली. इस पद के साथ पुरी राज्य की राजनीति में पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए. उनके राजनीतिक एजेंडे में बंदूक से जुड़ी हिंसा को रोकने के उपाय, बुनियादी ढांचे का विकास और आर्थिक तरक्की जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं.
2023 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी के बाद पुरी ने हथियारों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन किया था. उन्होंने हेट क्राइम के खिलाफ सुरक्षा बढ़ाने से जुड़े विधायी प्रयास भी किए हैं. नवंबर के चुनाव से पहले उनकी दावेदारी को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य हेली स्टीवंस ने भी सार्वजनिक समर्थन जताया है.
3 नवंबर के चुनाव पर टिकी निगाहें
मिशिगन की 110 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी बहुमत में है. मैट हॉल इस सदन के स्पीकर हैं, जबकि राज्य की गवर्नर डेमोक्रेटिक पार्टी की ग्रेचेन व्हिटमर हैं. इस तरह राज्य की सत्ता में अलग-अलग पार्टियों का प्रभाव है. डेमोक्रेट्स की कोशिश है कि 3 नवंबर के चुनाव में वे सदन का नियंत्रण वापस हासिल कर लें. अगर पार्टी बहुमत में आती है, तो पुरी के स्पीकर पद तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है.
हालांकि, पुरी के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती भी है. इस चुनाव में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार एलिसन के फुलर से है. इसलिए उनकी स्पीकर बनने की संभावना दो बातों पर निर्भर करेगी—पहली, वह अपने निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा जीत दर्ज करें और दूसरी, डेमोक्रेटिक पार्टी सदन में बहुमत हासिल करे. इनमें से किसी एक शर्त के पूरा नहीं होने पर उनकी दावेदारी प्रभावित हो सकती है.
हेली स्टीवंस ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा, ‘मिशिगन के डेमोक्रेट्स आगे बढ़ रहे हैं. हम राज्य की प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने और रंजीव पुरी को देश का पहला भारतीय-अमेरिकी स्टेट हाउस स्पीकर बनाने जा रहे हैं.’ स्टीवंस इस साल अमेरिकी कांग्रेस से विदा होने वाली हैं. वह सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का नामांकन हासिल करने की कोशिश में सफल नहीं हो सकी थीं.
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
अगर रंजीव पुरी स्पीकर चुने जाते हैं, तो यह अमेरिकी राज्यों की प्रतिनिधि सभाओं में भारतीय मूल के लोगों के प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी. मिशिगन में भारतीय मूल के करीब 1.27 लाख लोग रहते हैं, जो राज्य की आबादी का लगभग 1.27 प्रतिशत हैं. यह आंकड़ा रिपब्लिकन रणनीतिकार अनंग मित्तल द्वारा तैयार किए गए इंडियन अमेरिकन वोटर एटलस के हवाले से दिया गया है.
पुरी का परिवार सिख समुदाय से जुड़ा रहा है. उनके माता-पिता ने विस्कॉन्सिन में पहला सिख गुरुद्वारा स्थापित करने में मदद की थी. यह गुरुद्वारा 2012 में ओक क्रीक गोलीबारी की चपेट में आया था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी.
2023 में पुरी ने हेट क्राइम के खिलाफ सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक विधेयक पेश किया था. इसमें धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ और उन्हें अपवित्र करने जैसी घटनाओं से जुड़े मामलों पर सुरक्षा बढ़ाने के उपाय शामिल थे. ऐसे में उनकी संभावित पदोन्नति को भारतीय-अमेरिकी और सिख-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और नफरत से जुड़े अपराधों पर चल रही बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
फिलहाल, पुरी के सामने चुनाव जीतने और अपनी पार्टी के लिए बहुमत सुनिश्चित करने की चुनौती है. 3 नवंबर के नतीजे तय करेंगे कि मिशिगन की प्रतिनिधि सभा में सत्ता किसके हाथ में जाती है और क्या रंजीव पुरी अमेरिकी राज्य की राजनीति में एक नया इतिहास बना पाते हैं.