कांग्रेस मुख्यालय में हुए जूतम-पैजार किसने शुरू की, अजय राय या ममता चौधरी? बैठ गई इंक्वायरी  


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Congress Politics : यूपी की राजधानी लखनऊ में स्थित कांग्रेस मुख्यालय में रविवार को जमकर हंगामा हुआ. यहां कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए. जानकारी के मुताबिक इस दौरान जूते भी चले. अब इंक्वायरी की जाएगी कि गलती किसकी है. 

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कांग्रेस मुख्यालय में हुए जूतम-पैजार किसने शुरू की? बैठ गई इंक्वायरी  Zoom

कांग्रेस मुख्यालय में चले जूते चप्पल.

लखनऊ : बीते रविवार यानी 11 अक्टूबर को लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए थे. देखते ही देखते गाली-गलौज भी होने लगी. इस दौरान कार्यकर्ता धक्का-मुक्की करते भी देखे गए. अब बढ़ते मामले को देखते हुए यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. जांच में सामने आएगा अजय राय या ममता चौधरी किसकी गलती थी.

यह है मामला

बता दें, ये मामला तब सामने आया जब कांग्रेस कार्यकर्ता नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण समारोह के लिए जुटे थे. आरोप है कि अवध जोन की अध्यक्ष ममता चौधरी और अजय राय के बीच विवाद हुआ. इसके बाद अजय राय के समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया. देखते ही देखते गाली-गलौच भी होने लगी. इस दौरान कार्यकर्ता धक्का-मुक्की करते भी देखे गए. वहीं इस पूरी घटना पर बीजेपी ने भी कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा. बीजेपी ने एक्स पर मोहब्बत की दुकान में जूतम-पैजार लिखा.

कांग्रेस की जांच समिति 

बढ़ते मामले को देखते हुए कांग्रेस के राज्य मुख्यालय में हुए हंगामे की जांच के लिए प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी अभिषेक दत्त व अब्दुल हन्नान, पूर्व सांसद रवि वर्मा व महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शमीना शफीक को समिति का सदस्य बनाया गया है. समिति एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी.

जांच समिति क्यों बनाई गई? 

इधर, हंगामे की जांच के लिए अलग समिति गठित किए जाने पर पार्टी के अंदर चर्चा शुरू हो गई है. सवाल यह उठाए जा रहे हैं कि मामला अनुशासन से जुड़ा होने के बावजूद इसे अनुशासन समिति को सौंपने के बजाय अलग जांच समिति क्यों बनाई गई. इसके अलावा समिति में दो सह-प्रभारियों को शामिल किए जाने को लेकर भी संगठन के भीतर चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच संबंध सहज नहीं माने जाते हैं.



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