नई दिल्ली (Tukaram Mundhe IAS Story). महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) में लंबे समय से चल रहा घमासान अब नए मोड़ पर आ गया है. पुणे में पिछले 10 दिनों से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे अभ्यर्थियों का गुस्सा आखिरकार शांत हो गया है. सरकार ने उनकी मुख्य मांगें मान ली हैं. इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि तेज-तर्रार और सख्त कार्यशैली के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को MPSC सुधार समिति का सचिव नियुक्त किया गया है.
कौन हैं आईएएस तुकाराम मुंढे?
आईएएस तुकाराम मुंढे का नाम सुनते ही महाराष्ट्र के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच जाती है. 2004 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल करने वाले मुंढे अपनी ईमानदारी और सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले और बचपन में नंगे पैर स्कूल जाने वाले तुकाराम ने बिना किसी कोचिंग के यह मुकाम हासिल किया था. अपने 21 साल के करियर में 25 से अधिक तबादले झेल चुके मुंढे को लोग प्यार से ‘सिंघम’ बुलाते हैं.
सबसे चर्चित आईएएस अफसरों में शामिल हैं मुंढे
New York Times: अक्टूबर 2026 में तुकाराम मुंढे को न्यू यॉर्क टाइम्स अखबार में फीचर किया गया था
तुकाराम मुंढे का अब तक का करियर: कब-कहां संभाली जिम्मेदारी?
महाराष्ट्र कैडर के आईएएस तुकाराम मुंढे ने अपने अब तक के करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. उनकी लिस्ट आप नीचे चेक कर सकते हैं:
- सीईओ (CEO), खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC): करियर की शुरुआती प्रमुख प्रशासनिक जिम्मेदारियों में शामिल.
- 2017 – म्यूनिसिपल कमिश्नर, नवी मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMMC): यहां ‘वॉक विद द कमिश्नर’ जैसी पहल शुरू की और जनहित में कई फैसले लागू किए.
- 2017-18 – प्रबंध निदेशक (MD), पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML): यहां अनुशासनहीनता और अनधिकृत अनुपस्थिति पर सख्त कार्रवाई करते हुए बस किराए और सर्विस स्ट्रक्चर में बदलाव किए.
- 2018 – म्यूनिसिपल कमिश्नर, नासिक म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC): पारदर्शी और सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए चर्चा में रहे.
- 2018 – अतिरिक्त सचिव (Planning), मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार: राज्य योजना विभाग में महत्वपूर्ण नीतिगत भूमिका निभाई.
- 2020 – म्यूनिसिपल कमिश्नर, नागपुर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन: नागरिक सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन को दुरुस्त करने के लिए अभियान चलाए.
- अक्टूबर 2022 – नवंबर 2022 – स्वास्थ्य सेवा आयुक्त, महाराष्ट्र: डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए औचक निरीक्षण शुरू किए.
- 2026 – आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA), महाराष्ट्र: खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कई बड़े होटल और रेस्टोरेंट पर सीलबंदी की कार्रवाई की. इसका प्रभाव पूरे देश में देखा गया.
- अक्टूबर 2026 – सचिव, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC): MPSC सुधार और पेपर लीक जांच समिति के सदस्य-सचिव के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई.
MPSC में क्या था विवाद और क्यों भड़के थे छात्र?
पुणे के एसएम जोशी ब्रिज पर पिछले 10 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा था. उनकी शिकायत MPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर थी. छात्र संघ का कहना था कि आयोग के चेयरमैन विवेक भीमांवर को उनके पद से हटाए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पूर्व जज दिलीप भोसले की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया, जिसमें तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया. फिर, MPSC चेयरमैन विवेक भीमांवर ने छुट्टी पर जाने की घोषणा कर दी कि वह नैतिकता को प्राथमिकता देते हैं और जांच पूरी होने तक पद से दूर रहेंगे.
सरकार ने कौन-कौन सी मांगें मानीं?
मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले के नेतृत्व में सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी कई अहम मांगें स्वीकार कर लीं:
- भर्ती प्रक्रिया में तेजी: अगले 3 सालों में 70,000 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी.
- ग्रुप-सी परीक्षा: जनवरी 2027 में होने वाली ग्रुप-सी परीक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
- मुकदमे वापस: आंदोलन के दौरान छात्र प्रतिनिधियों पर दर्ज किए गए पुलिस मामले वापस लिए जाएंगे.
- पारदर्शिता: भविष्य में MPSC के चेयरमैन और सचिव की नियुक्ति से पहले उनका बैकग्राउंड चेक किया जाएगा.
इन सभी आश्वासनों के बाद छात्रों ने आखिरकार 10 दिवसीय धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया.