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पलामू में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए मुनाफे का जरिया बन रही है. इसमें मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. किसान महंगे प्लास्टिक मल्च की जगह जैविक मल्च अपना सकते हैं. इससे खेती की लागत घटती है. खरपतवार पर नियंत्रण रहता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है.
पलामूः पलामू में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बनती जा रही है. लेकिन इसकी खेती में कुछ खास तकनीकों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है. जिससे कि इसकी खेती में अच्छा मुनाफा मिलता है. इन्हीं में से एक मल्चिंग तकनीक है. इसके इस्तेमाल से न केवल स्ट्रॉबेरी की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि किसानों को खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद मिलती है. खास बात यह है कि किसान प्लास्टिक मल्च की जगह ऑर्गेनिक मल्च का इस्तेमाल कर खेती की लागत कम कर सकते हैं. यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है.
ऑर्गेनिक मल्च से किसानों को मिलेगा दोहरा फायदा
पलामू जिले के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग का विशेष महत्व है. किसान रेज्ड बेड बनाकर मल्चिंग तकनीक से स्ट्रॉबेरी की खेती कर सकते हैं. इसके लिए प्लास्टिक मल्च और ऑर्गेनिक मल्च दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, ऑर्गेनिक मल्च किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है. इसमें सूखी पत्तियां, पुआल और अन्य जैविक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है. स्थानीय स्तर पर सामग्री उपलब्ध होने से किसानों की लागत भी कम हो सकती है.
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मददगार
उन्होंने बताया कि ऑर्गेनिक मल्च का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है. इससे बार-बार सिंचाई की जरूरत कम हो सकती है. इसके अलावा यह खरपतवार की बढ़वार को भी नियंत्रित करता है. समय के साथ जैविक मल्च सड़कर मिट्टी में मिल जाता है और जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाता है. इससे मिट्टी की संरचना और उर्वरा शक्ति में सुधार होता है. हालांकि, स्ट्रॉबेरी के फलों को सड़न से बचाने के लिए मल्च को साफ और उचित मात्रा में रखना जरूरी है.
प्लास्टिक मल्च में कितने माइक्रोन का करें इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल करने वाले किसानों को उसकी मोटाई पर ध्यान देना चाहिए. स्ट्रॉबेरी की खेती में सामान्यतः 25 माइक्रोन मोटाई वाला प्लास्टिक मल्च इस्तेमाल किया जाता है. वहीं तीन महीने की कम अवधि वाली फसल के लिए 20 माइक्रोन मल्च भी उपयोगी हो सकता है. लंबी अवधि की फसल के लिए अधिक टिकाऊ मल्च का चयन करना बेहतर होता है.
1500 रुपये में मिलता है 450 मीटर मल्च
उन्होंने बताया कि मल्च खरीदते समय उसकी गुणवत्ता जरूर जांचनी चाहिए. अच्छी गुणवत्ता वाला मल्च जल्दी फटता नहीं है. बाजार में 25 से 30, माइक्रोन मोटाई वाला लगभग 450 मीटर प्लास्टिक मल्च करीब 1500 रुपये में मिल सकता है. वहीं लंबी अवधि वाले फसल के लिए ज्यादा माइक्रोन के मल्च का इस्तेमाल करना जरूरी है. वहीं ऑर्गेनिक मल्च का इस्तेमाल से खर्च में कमी के साथ फायदा भी अच्छा होता है.