Last Updated:
Naresh Meena-Ravindra Singh Bhati News : राजस्थान के चर्चित युवा नेता नरेश मीणा को अब दूसरे युवा और जुझारू नेता शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का साथ मिल गया है. किसानों की मांगों को लेकर अनशन कर रहे मीणा के पास रविवार को WES के सरलीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर निर्दलीय रविन्द्र सिंह भाटी पहुंचे. उन्होंने मीणा के हालचाल पूछे और बाद में जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया. दो युवा और आंदोलनकारी नेताओं के इस मिलन से सूबे में सियासी हलचल तेज हो गई है.
नरेश मीणा को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाते विधायक रविन्द्र सिंह भाटी. (फोटो साभार: https://x.com/RavindraBhati__)
जयपुर. किसानों की मांगों को लेकर अनशन करने वाले युवा नेता नरेश मीणा को अब पश्चिमी राजस्थान के कद्दावर युवा नेता एवं शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का साथ मिल गया है. EWS के सरलीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे रविन्द्र सिंह भाटी ने रविवार को बारां पहुंचकर अनशन पर बैठे नरेश मीणा को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया. इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में तीसरे मोर्चे की नई चर्चा ने शुरू हो गई. हालांकि राजस्थान में पहले भी इस तरह की चर्चाएं हो चुकी है लेकिन वे कभी सिरे नहीं चढ़ पाई. नरेश मीणा को पूर्व शेखावाटी के युवा नेता राजेन्द्र गुढ़ा का भी साथ मिल चुका है. इससे किसानों और युवाओं की मांगों को सड़कों पर संघर्ष कर रहे नरेश मीणा की सियासी ताकत और समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है.
नरेश मीणा खुद ‘एकला चलो रे’ कारवां बनता चला जाएगा की थीम पर काम कर रहे हैं. दो साल पहले टोंक जिले की उनियारा विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में व्यवस्थाओं को लेकर एसडीएम को थप्पड़ मारने वाले नरेश मीणा का सियासी सफर उसी समय से तेज हो गया था. थप्पड़ कांड के बाद मचे बवाल और जेल के सफर ने नरेश मीणा को पूरे प्रदेश में सुर्खियों में ला दिया था. जमानत नहीं मिलने के दौरान जातीय पंचायतों का साथ मिलने से नरेश मीणा और मजबूत होते गए. जेल से बाहर आते ही नरेश मीणा की ओर से झालावाड़ में किया गया विरोध प्रदर्शन ने उनको और सुर्खियों में ला दिया.
साभार : https://x.com/RavindraBhati__
मीणा को राजेन्द्र गुढ़ा का साथ भी पहले से मिला हुआ है
बाद में किसानों और युवाओं के विभिन्न मुद्दों पर हुंकार भरने वाले नरेश मीणा को शेखावाटी के खांटी युवा नेता पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा का साथ मिला. नरेश मीणा ने जब बीते 2 अक्टूबर को किसान आंदोलन की शुरुआत की थी तो गुढ़ा आए थे. गुढ़ा बसपा से और निर्दलीय विधायक रह चुके हैं. बसपा से जीतने के दौरान गहलोत सरकार को समर्थन देकर दो बार मंत्री बने. लेकिन बाद में सरकार से मनमुटाव होने के कारण उन्होंने तीखे तेवर अख्तियार कर लिए थे. तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ ‘लाल डायरी’ के राज खोलने वाले गुढ़ा को बाद में मंत्रिमंडल से बेदखल कर दिया गया था. गुढ़ा भी अपने तीखे तेवरों के कई बार सरकारों की आंखों के किरकिर बन चुके हैं.
उनके बाद अब जिस तरह से नरेश मीणा को राजस्थान के सबसे युवा विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का साथ मिला है आने वाले समय में तीसरे मोर्चे की संभावना फिर से बनने लगी है. रविन्द्र भाटी केवल पश्चिमी राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे सूबे में युवाओं की पसंद बने हुए हैं. बीजेपी लहर में बाड़मेर की शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले भाटी ने लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को पश्चिमी राजस्थान में तगड़ा झटका दिया था. भाटी ने बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर जब सांसदी के लिए ताल ठोकी थी बीजेपी को यह अनुमान नहीं लगा सकी कि उसे वहां करारी का हार का सामना करना पड़ेगा.
लोकसभा चुनाव में छा गए थे भाटी
लोकसभा चुनाव 2024 में भाटी की युवाओं के बीच दीवानगी सिर चढ़कर बोली. उनकी सभाओं में आने वाली भीड़ से बीजेपी और कांग्रेस भौचक्की रह गई. इस चुनाव में रविन्द्र भाटी इस कदर छाए कि बाड़मेर-जैसलमेर का मुकाबला सबसे हॉट मुकाबला बन गया था. देशभर की निगाहें इस मुकाबले पर टिक गई थी. सोशल मीडिया पर भाटी की रिकॉर्डतोड़ फॉलोइंग ने सबकी आंखे चुंधिया दी थी. बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर बीजेपी की तरफ से उसके पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी चुनाव मैदान में थे. लेकिन भाटी ने उनको तीसरे नंबर पर खिसका दिया. हालांकि रविन्द्र सिंह भाटी यह चुनाव जीत नहीं पाए थे लेकिन उन्होंने जिस तरह से अपनी धाक दिखाई उससे बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक सन्न रह गए.
इसे एक नए गठजोड़ के तौर देखा जा रहा है
पश्चिमी राजस्थान में ‘ओरण बचाओ अभियान’ के बाद भाटी अब सामान्य वर्ग के लिए लागू EWS के सरलीकरण की मांग को लेकर मैदान में है. वे इसके लिए प्रदेशभर में आंदोलन कर रहे हैं. उनके इस आंदोलन को युवाओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है. उनकी इस यात्रा में युवाओं की जिस तरह से तादाद उमड़ रही है. वे सबको हैरान कर रही है. ऐसे में नरेश मीणा को उनका साथ मिलना नए सियासी समीकरण के संकेत माने जा रहे हैं. हालांकि मीणा को अनशन तुड़वाने के दौरान भाटी ने तीसरे मोर्चे की कोई बात नहीं की लेकिन सियासी हलकों में इसे एक नए गठजोड़ के तौर देखा जा रहा है.
युवाओं और जुझारू नेताओं की नजदकियां नई संकेत दे रही है
व्यवस्थाओं के खिलाफ देशभर में जिस तरह युवा अग्रेसिव हो रहे हैं ऐसे हालात में राजस्थान में दो युवा नेताओं की बढ़ती नजदीकियों ने कई दिग्गज नेताओें के कान खड़े कर दिए हैं. इसकी एक बड़ी वजह आदिवासी इलाके में तेजी से आगे बढ़ रही भारत आदिवासी पार्टी भी है. BAP भी युवाओं के सहारे आगे बढ़ रही है. इसके प्रदेश में एक मात्र सांसद राजकुमार रौत और उनकी पूरी टीम भी युवा है. बीएपी ने जिस तरह से आदिवासी बाहुल्य इलाके में पैर पसारने शुरू किए है उससे बीजेपी और कांग्रेस पहले से चिंता में है. भले ही वह इस चिंता को दर्शाती नहीं लेकिन अंदरखाने वहां भी दोनों पार्टियों में बैचनी है. अब युवाओं और जुझारू नेताओं की नजदकियां नई संकेत दे रही है.