कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और फिर वहां पहुंचकर एक रिट याचिका दायर की. इस याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों की न्यायिक जांच कराने, वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों का ब्योरा सार्वजनिक करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की स्वतंत्र जांच सहित 10 खास मांग की गई हैं. याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि विभिन्न राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर सुनवाई और विवादित मुद्दों के निपटारे तक अंतरिम रोक लगाई जाए.
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर यह मामला Rahul Gandhi v. Election Commission of India के नाम से लिस्ट है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस की लीगल टीम ने राहुल गांधी के अदालत पहुंचने से पहले यह रिट याचिका दाखिल की. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में शाम 4:30 बजे तक ही याचिका दायर करने की समय-सीमा थी. ऐसे में तय समय तक राहुल गांधी वहां पहुंचे तो उनकी तरफ से वकील एस. प्रसन्ना ने याचिका दायर की. इस याचिका में राहुल के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सहित कई 11 विपक्षी नेताओं का नाम बतौर याचिकाकर्ता दर्ज है.
यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने विपक्षी नेताओं को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया था. सीजेआई ने कहा था कि जिन मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा जाना था, वे पहले से अदालत में विचाराधीन हैं. उन्होंने विपक्षी नेताओं को प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत का रुख करने की सलाह दी थी.
राहुल गांधी की याचिका में क्या हैं 10 मांगें?
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के अधिकारों, मतदाताओं के नाम हटाने और EVM की कार्यप्रणाली से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. चलिये विस्तार से जानते हैं…
1. SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश करे चुनाव आयोग
इस याचिका में चुनाव आयोग को SIR से जुड़ी सारी फाइलें, समझौते, बैठकों और आपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अदालत में पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है. इसके अलावा ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग और 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित फाइल नोटिंग भी मांगी गई है.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन रिकॉर्ड की जांच से यह साफ हो सकेगा कि प्रक्रिया किस आधार पर शुरू की गई और संबंधित फैसले किस तरह लिए गए. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत अधिकारों तथा अनुच्छेद 324 के पालन का भी हवाला दिया है.
2. SIR से जुड़े फैसलों की वैधता की जांच हो
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह जांच करने का अनुरोध किया गया है कि SIR से जुड़े विवादित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 तथा पहले के अदालती फैसलों के अनुरूप हैं या नहीं.
इस संबंध में 1995 के सेशन बनाम भारत संघ मामले का भी जिक्र किया गया है. याचिकाकर्ताओं की मांग है कि जिन फैसलों को उचित वैधानिक अधिकार के बिना लिया गया पाया जाए, उन्हें निरस्त किया जाए.
3. नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक या वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है, जहां ऐसा करना आवश्यक हो. हालांकि, यह याचिकाकर्ताओं की मांग है; किसी अधिकारी के दोषी होने का न्यायिक निष्कर्ष इससे अपने आप नहीं निकलता.
4. शिकायतों पर फैसला हो और उसका रिकॉर्ड रखा जाए
याचिका में चुनाव आयोग को SIR से जुड़ी मौजूदा याचिका और संबंधित शिकायतों पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता चाहते हैं कि SIR से संबंधित फैसले 2023 के कानून की धारा 18 के अनुरूप हों और निर्णय लेने की प्रक्रिया का उचित रिकॉर्ड रखा जाए. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया गया है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े फैसलों के पीछे के कारणों और प्रक्रिया की जांच की जा सके.
5. ऑनलाइन फॉर्म-6 निर्धारित नियमों के मुताबिक हो
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है. याचिका में मांग की गई है कि ऑनलाइन फॉर्म-6 का प्रारूप पंजीकरण निर्वाचन नियम, 1960 में निर्धारित फॉर्म के अनुरूप होना चाहिए.
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि निर्धारित प्रारूप में बदलाव करना हो तो इसके लिए नियमों में औपचारिक संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. वे चाहते हैं कि निर्धारित प्रक्रिया से अलग बदलावों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के लागू न किया जाए.
6. मतदाता सूची और EVM का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए
याचिका की प्रमुख मांगों में से एक मतदाता सूची और EVM की स्वतंत्र जांच के लिए समिति गठित करना है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने वाली समिति बनाने का अनुरोध किया गया है.
इस समिति को निर्धारित समय-सीमा के भीतर SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और उनमें किए गए संशोधनों की जांच करने का सुझाव दिया गया है. साथ ही, ECINET और ERONET डेटाबेस तक पहुंच, उनमें हुए बदलावों और संबंधित प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग की गई है.
याचिका में EVM के तकनीकी डिजाइन, संरचना, इस्तेमाल और तैनाती से जुड़े फैसलों, नीतियों, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल की जांच करने की मांग भी शामिल है. इसके अलावा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली बेहतर प्रक्रियाओं पर विचार करने का अनुरोध किया गया है.
7. वोटर लिस्ट से हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक हों
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार सूची प्रकाशित की जाए. इसके साथ प्रत्येक नाम हटाने का कारण भी बताया जाए.
याचिका में हटाए गए मतदाताओं का लिंग और आयु के आधार पर वर्गीकरण सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है. इसके अलावा ऐसे पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया गया है, जिनके नाम गलती से हट गए हों.
8. नोटिस और सुनवाई के बिना किसी का नाम न हटे
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने की मांग की गई है कि कानून के तहत जरूरी नोटिस दिए बिना और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना किसी मतदाता का नाम सूची से न हटाया जाए.
विपक्षी नेताओं ने यह भी अनुरोध किया है कि पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र नागरिकों को कानून के तहत निर्धारित अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए.
इस मांग का केंद्र यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पात्र नागरिकों को अपना पक्ष रखने और गलती सुधारने का अवसर मिले.
9. सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगे
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि उठाए गए मुद्दों पर विचार और निर्णय होने तक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए.
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसा करना पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी है. हालांकि, अंतरिम रोक लगाने का फैसला अदालत को करना है. याचिका में इस राहत की मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि SIR पर रोक लग चुकी है.
10. सुप्रीम कोर्ट उचित समझे तो अन्य राहत भी दे
याचिका में अंत में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए वह ऐसे अन्य आदेश भी पारित करे, जिन्हें वह जरूरी समझे.
इसका उद्देश्य याचिकाकर्ताओं के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया की रक्षा करना और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखना है.
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं की याचिका में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से लेकर SIR की वैधता, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और EVM की स्वतंत्र जांच तक कई मुद्दे शामिल हैं. इसके जरिए विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है.