Navratri 2026: कौड़ी देवी से विशालाक्षी माता तक… बेहद चमत्कारी हैं काशी के ये प्राचीन मंदिर, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन

Navratri 2026: कौड़ी देवी से विशालाक्षी माता तक… बेहद चमत्कारी हैं काशी के ये प्राचीन मंदिर, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन


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Devi Temples in Varanasi: काशी में कई ऐसे प्राचीन देवी मंदिर हैं, जहां नवरात्रि के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है. इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं भी काफी अलग हैं. कहीं लोग ताला-चाबी चढ़ाकर बंधनों से मुक्ति की कामना करते हैं, तो कहीं पांच कौड़ियां चढ़ाने की परंपरा है. काशी के इन मंदिरों का जिक्र ‘काशी खंडोक्त’ में भी मिलता है. बंदी देवी, कौड़ी देवी, विशालाक्षी और कुष्मांडा देवी के इन धामों से जुड़ी ऐसी कई कथाएं हैं, जिनके बारे में जानने के लिए श्रद्धालु उत्सुक रहते हैं. आखिर कहां स्थित हैं ये मंदिर और क्या है इनकी मान्यताएं, आइए जानते हैं.

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नवरात्रि के नौ दिनों में इन देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ होती है. जो भी भक्त इन मंदिरों के चमत्कारों के बारे में सुनता है, वह यहां खिंचा चला आता है. काशी में विराजमान इन देवियों का जिक्र काशी के मंदिरों पर आधारित सबसे प्रामाणिक पुस्तक ‘काशी खंडोक्त’ में भी मिलता है, क्योंकि देवी के ये धाम सैकड़ों साल पुराने हैं.

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर बंदी देवी का प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर की महिमा अपरंपार है. बंदी देवी को कारागार की देवी कहा जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ देवी के दर्शन करने आता है और उनके दरबार में माला-फूल के साथ ताला-चाबी चढ़ाता है, बंदी देवी उसे सभी बंधनों से मुक्त करती हैं. यहां तक कि जेल की सलाखों के पीछे बंद लोगों को भी मुक्ति मिल जाती है.

मंदिर के प्रधान पुजारी सुधाकर दुबे ने बताया कि बंदी देवी पाताल लोक की देवी हैं. कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब अहिरावण ने भगवान राम को बंधक बना लिया था, उस समय प्रभु श्रीराम ने बंदी देवी का ध्यान करके उनसे बंधन से मुक्ति की कामना की थी. उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर बंदी देवी ने उन्हें कैद से मुक्त होने का आशीर्वाद दिया था. इसके बाद प्रभु श्रीराम अहिरावण की कैद से मुक्त हुए. मान्यता है कि जो भी भक्त यहां लगातार 41 दिनों तक दर्शन करता है, उसे झूठे मुकदमों से मुक्ति मिल जाती है.

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इसके अलावा, काशी में कौड़ी देवी का प्राचीन मंदिर भी है. यह मंदिर शहर के नवाबगंज इलाके में स्थित है. भक्त कौड़ी देवी को कौड़ियां चढ़ाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त यहां दर्शन करता है और कौड़ी देवी को पांच कौड़ियां अर्पित करता है, उसकी धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं. कथाओं के मुताबिक, कौड़ी देवी को बाबा विश्वनाथ की बहन माना जाता है.

दक्षिण भारत में कौड़ी देवी के प्रति लोगों की गहरी आस्था है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में दक्षिण भारत से श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं. भक्त देवी को श्रृंगार की सामग्री के साथ पांच कौड़ियां चढ़ाते हैं. इनमें से चार कौड़ियां देवी को अर्पित की जाती हैं, जबकि पांचवीं कौड़ी भक्त को प्रसाद स्वरूप मिलती है. लोग इस कौड़ी को अपने घर के पूजा स्थल या तिजोरी में रखते हैं.

इसके अलावा, काशी में विशालाक्षी देवी का मंदिर भी है. यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. नाथों के नाथ बाबा विश्वनाथ के धाम के करीब ही देवी का मंदिर स्थित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर देवी सती के कान का कुंडल गिरा था. विशालाक्षी का अर्थ है विशाल आंखों वाली देवी.

इस मंदिर में देवी की प्रतिमा के पीछे माता की एक स्वयंभू प्रतिमा भी है. काशी के मीरघाट पर देवी का यह मंदिर स्थित है. यह मंदिर श्रीयंत्र पर आधारित है. मंदिर के शिखर पर देवी-देवताओं की कई प्रतिमाएं स्थापित हैं. तंग गलियों के बीच स्थित इस मंदिर में देवी के दर्शन के लिए हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. वर्तमान में मंदिर का जो स्वरूप दिखाई देता है, वह वर्ष 1893 में बनवाया गया था. इसका निर्माण दक्षिण भारत के नट्टुकोट्टई नगरथार समुदाय ने करवाया था.

इसके अलावा, शहर के दुर्गाकुंड क्षेत्र में माता कुष्मांडा देवी का प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर में देवी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं. नवरात्रि के चौथे दिन यहां देवी के दर्शन का शास्त्रीय विधान है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, दैत्य शुंभ-निशुंभ का वध करने के बाद थकी-हारी देवी ने यहीं विश्राम किया था. देवी का यह धाम बेहद चमत्कारिक माना जाता है. मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.

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