JNU Professor Bimol Akoijam, Bimol Akoijam FIR Case: JNU के पूर्व प्रोफेसर को लेकर क्यों मचा बवाल? 11 छात्राओं ने क्या आरोप लगाए, जानें पूरी कहानी

JNU Professor Bimol Akoijam, Bimol Akoijam FIR Case: JNU के पूर्व प्रोफेसर को लेकर क्यों मचा बवाल? 11 छात्राओं ने क्या आरोप लगाए, जानें पूरी कहानी


JNU Controversy: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर और इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम विवादों में घिर गए हैं.11 छात्राओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई का मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है.जेएनयू ने उन्हें प्रोफेसर पद से हटा दिया है. छात्राओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मई 2026 में विश्वविद्यालय की कुलपति से शिकायत की थी, लेकिन उस पर उचित कार्रवाई नहीं हुई. दूसरी ओर भाजपा महिला मोर्चा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और कांग्रेस नेतृत्व पर आरोपी सांसद को बचाने का आरोप लगाया.ऐसे में सवाल है कि छात्राओं की शिकायत से शुरू हुआ यह मामला विश्वविद्यालय की कार्रवाई से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा कैसे बन गया? आइए समझते हैं…

1. सबसे पहले समझिए, पूरा मामला क्या है?

यह मामला जेएनयू में पढ़ने वाली 11 छात्राओं की ओर से अपने प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है.अकोइजाम जेएनयू के सामाजिक विज्ञान स्कूल के अंतर्गत सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में प्रोफेसर थे.इसके साथ ही वह मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद भी हैं.छात्राओं की शिकायतों पर विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने जांच की.समिति ने उनके खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जिसके बाद जेएनयू ने 9 अक्टूबर 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त कर दिया.इधर दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद और जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम (Angomcha Bimol Akoijam) के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर ली है. यह मामला 11 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया है.

2. छात्राओं ने क्या आरोप लगाए और शिकायत कब की?

छात्राओं ने मई 2026 में जेएनयू की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के सामने शिकायत रखी थी. उनका आरोप था कि शिकायत करने के बावजूद शुरुआती दौर में उनकी बात पर उचित कार्रवाई नहीं हुई. 11 छात्राओं ने विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति के सामने शिकायतें दर्ज कराई थीं.आरोपों में शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान अनुचित व्यवहार और कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें शामिल थीं.कुछ रिपोर्टों में मौखिक परीक्षा यानी वाइवा के दौरान अनुचित टिप्पणियों और अवांछित व्यवहार के आरोपों का भी जिक्र है.छात्राओं की शिकायत के बाद मामले ने तब और ध्यान खींचा जब विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने जांच पूरी करके कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की.इसके बाद मामला केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांसद की राजनीतिक जिम्मेदारी और कांग्रेस के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे.

3. अब एफआईआर क्यों दर्ज हुई?

जेएनयू से बर्खास्तगी के बाद 11 छात्राओं से जुड़े इस मामले में एक और अहम घटनाक्रम सामने आया.दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर अकोइजाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.मामला दिल्ली के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75 और 79 सहित संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया.ये प्रावधान यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा का अपमान करने से जुड़े आरोपों पर लागू हो सकते हैं.पुलिस की जांच अभी अलग कानूनी प्रक्रिया है.इसका मतलब यह है कि मामला अब सिर्फ विश्वविद्यालय की नौकरी और अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है.एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपों से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी.

4. दिल्ली महिला आयोग ने भी JNU से मांगा था जवाब

यह मामला सार्वजनिक होने के बाद दिल्ली महिला आयोग ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी.आयोग ने सितंबर 2026 में 11 छात्राओं की शिकायतों को लेकर जेएनयू प्रशासन से जानकारी मांगी थी.छात्राओं का कहना था कि उन्होंने मई में कुलपति के सामने अपनी शिकायत रखी थी, लेकिन उन्हें समय पर उचित कार्रवाई होती नहीं दिखी.इसी संदर्भ में विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा गया था और तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया था.

5. भाजपा महिला मोर्चा ने क्यों किया प्रदर्शन?

जेएनयू की कार्रवाई के बाद यह मामला राजनीतिक टकराव में भी बदल गया.भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया.प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेतृत्व पर अकोइजाम को बचाने का आरोप लगाया और मांग की कि पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करे.यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब भाजपा महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है.भाजपा ने इसी राजनीतिक माहौल के बीच जेएनयू की छात्राओं की शिकायतों को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए.प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दीनदयाल उपाध्याय मार्ग से कांग्रेस मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया.

6. क्या बिमोल अकोइजाम की सांसदी भी खत्म हो सकती है?

यह इस मामले से जुड़ा एक अहम सवाल है.अकोइजाम को जेएनयू की नौकरी से बर्खास्त किया गया है, लेकिन इसका अर्थ उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त होना नहीं है.किसी सांसद की सदस्यता खत्म होने के नियम अलग हैं.आम तौर पर आपराधिक मामले में दोषसिद्धि और कम से कम दो साल की सजा होने पर जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अयोग्यता का सवाल उठ सकता है हालांकि किसी खास मामले में सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? यह लागू कानून, अदालत के फैसले और अन्य संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर करता है.जेएनयू ने उनकी विश्वविद्यालय सेवा समाप्त की है और दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.

7. मणिपुर हिंसा के बाद राजनीति में आए थे बिमोल अकोइजाम

अंगोमचा बिमोल अकोइजाम अकादमिक क्षेत्र में प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते रहे हैं.वह मणिपुर से जुड़े सामाजिक और मानवाधिकार के मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं.वर्ष 2023 में मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद वह सक्रिय राजनीति में आए.वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें इनर मणिपुर सीट से उम्मीदवार बनाया.उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की और लोकसभा पहुंचे.संसद में अकोइजाम मणिपुर में शांति बहाली, हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और पूर्वोत्तर के मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए चर्चा में रहे हैं.ऐसे में उनके खिलाफ लगे आरोपों और जेएनयू की कार्रवाई ने राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक ध्यान खींचा है.

8. जेएनयू में शिकायतों का पुराना रिकॉर्ड क्या कहता है?

जेएनयू में छात्राओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों का मुद्दा पहले भी सामने आता रहा है. इन आंकड़ों को मौजूदा मामले से अलग समझना जरूरी है, क्योंकि किसी संस्थान में दर्ज सभी शिकायतें एक जैसी नहीं होतीं. 2015-16 में एक ही साल में 39 शिकायतें दर्ज की गई .2017 से 2024 तक आंतरिक शिकायत समिति बनने के बाद कुल 151 शिकायतें आने की बात कही गई है. 2022-23 में 30 शिकायतें दर्ज की गई. 2023-24 में 30 शिकायतें सामने आने की बात कही गई है. जेएनयू परिसर के आसपास मार्च 2024 में 19 साल की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना का जिक्र है, जिसके बाद विरोध हुआ था. अक्टूबर 2024 में फ्रेशर्स पार्टी के दौरान हुई एक घटना को लेकर 47 छात्राओं की ओर से सामूहिक शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही गई है.ये घटनाएं दिखाती हैं कि कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों पर कार्रवाई का सवाल पहले भी चर्चा में रहा है.



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