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IIT Admission Rules: क्या 12वीं में कम नंबर या जेईई में कम स्कोर पर भी आईआईटी में एडमिशन मिल सकता है? प्रिपरेटरी कोर्स, स्पोर्ट्स कोटा और दिव्यांग आरक्षण के नियमों के साथ समझिए आईआईटी में एंट्री के सभी रास्ते.
IIT Admission with Low Marks: जेईई में कम नंबर पर भी आईआईटी में सीट पक्की हो सकती है
नई दिल्ली (IIT Admission Rules). लाखों स्टूडेंट्स हर साल देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान यानी आईआईटी में एडमिशन लेने का सपना देखते हैं. इसके लिए वे दिन-रात जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड की तैयारी में जुटे रहते हैं. लेकिन कई बार बहुत मेहनत के बाद भी कट-ऑफ या रैंक थोड़ी पीछे छूट जाती है. ऐसे में ज्यादातर स्टूडेंट्स आईआईटी सपने को फेल मान लेते हैं. लेकिन असल में ऐसा है नहीं. आप कम नंबर के बाद भी आईआईटी में एंट्री ले सकते हैं.
क्या कम नंबर आने पर IIT में एडमिशन मिल सकता है?
कुछ खास परिस्थितियों में यह संभव है. लेकिन इसके लिए नियम एकदम स्पष्ट हैं. आमतौर पर आईआईटी के बीटेक कोर्स में दाखिला सिर्फ जेईई एडवांस्ड की मेरिट लिस्ट और रैंक के आधार पर ही होता है. कम रैंक या कम नंबर आने पर सीधे बीटेक में तो एडमिशन नहीं मिलेगा, लेकिन आईआईटी कैंपस में एंट्री के दूसरे रास्ते खुल सकते हैं:
- ‘प्रिपरेटरी कोर्स’ (Preparatory Course)- यह सिस्टम मुख्य रूप से एससी, एसटी और PwD कैटेगरी के उन स्टूडेंट्स के लिए होती है, जो कटऑफ अंक थोड़े कम होने के कारण मुख्य मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाते. ऐसे स्टूडेंट्स को 1 साल का प्रिपरेटरी कोर्स कराया जाता है. इसमें सफल होने पर उन्हें अगले साल सीधे आईआईटी के रेगुलर बीटेक कोर्स में एडमिशन दे दिया जाता है.
- आईआईटी में बीएससी, एमएससी या डेटा साइंस जैसे कई इंटीग्रेटेड और ऑनलाइन/हाइब्रिड डिग्री प्रोग्राम भी हैं. जेईई एडवांस्ड में कम रैंक होने पर इन कोर्सेस में एडमिशन लेकर आईआईटी की डिग्री पाने का मौका मिलता है.
क्या IIT में स्पोर्ट्स कोटा से एडमिशन मिलता है?
नोट- इसके लिए जेईई एडवांस्ड परीक्षा पास करना अनिवार्य है. लेकिन दाखिले में खेल की उपलब्धियों को भारी प्रायोरिटी दी जाती है. भविष्य में अन्य आईआईटी भी इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.
क्या आईआईटी एलुमनाई (पूर्व छात्रों) के बच्चों को स्पेशल कोटा मिलता है?
कई स्कूल-कॉलेजों में Alumni के बच्चों को एडमिशन में खास प्रिफरेंस मिलती है. ऐसे में स्टूडेंट्स मान लेते हैं कि अगर किसी के माता-पिता आईआईटी से पढ़े हैं तो उनके बच्चों को एडमिशन में मैनेजमेंट या एलुमनाई कोटा मिल जाएगा. लेकिन ऐसा है नहीं. आईआईटी सेंट्रली फंडेड और ट्रांसपेरेंट संस्थान है. यहां किसी भी पूर्व छात्र के बच्चे या रिश्तेदार को कोई स्पेशल सीट या कोटा नहीं दिया जाता. चाहे माता-पिता आईआईटी में प्रोफेसर हों या बड़े उद्योगपति, हर बच्चे को जेईई एडवांस्ड की मेरिट लिस्ट से ही गुजरना पड़ता है.
क्या मेडिकल आधार पर आईआईटी में सीट मिल सकती है?
मेडिकल ग्राउंड्स को लेकर भी कई भ्रम फैले रहते हैं. आम बीमारियों या अचानक हुई मेडिकल इमरजेंसी के आधार पर IIT में अलग से कोई आरक्षण नहीं मिलता. यहां मेडिकल आधार पर केवल दिव्यांगजन (PwD) कोटा ही लागू होता है. इसके तहत 40% या उससे अधिक स्थायी दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार 5% आरक्षण प्रदान किया जाता है. परीक्षा के दौरान अगर किसी को अचानक कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो जाए तो अलग से सीट आरक्षित करने का प्रावधान नहीं है.