IIM और MBA वाले भी फेल! 12 मुर्गा-मुर्गियों से खड़ा किया लाखों का कारोबार, ऐसे बदली किरण देवी ने किस्मत

IIM और MBA वाले भी फेल! 12 मुर्गा-मुर्गियों से खड़ा किया लाखों का कारोबार, ऐसे बदली किरण देवी ने किस्मत


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Poultry Farming Success Story: कोडरमा के चंदवारा प्रखंड स्थित आरागारो गांव की किरण देवी ने महज 12 मुर्गा-मुर्गियों से मुर्गी पालन की शुरुआत कर सफलता की मिसाल पेश की है. वर्ष 2012 में सपोर्ट संस्था से मिले 4 मुर्गा और 8 मुर्गियों से शुरू हुआ उनका कारोबार आज करीब 1000 मुर्गा-मुर्गियों तक पहुंच गया है.

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कोडरमा: अगर मेहनत करने का जज्बा हो और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो छोटी सी शुरुआत भी सफलता की बड़ी कहानी बन सकती है. कोडरमा जिले के चंदवारा प्रखंड के आरागारो गांव की रहने वाली किरण देवी ने इसे सच कर दिखाया है. करीब 14 साल पहले महज 12 मुर्गा-मुर्गियों से शुरू हुआ उनका सफर आज एक बड़े पोल्ट्री फार्म तक पहुंच चुका है. वर्तमान में उनके फार्म में करीब 1000 मुर्गा-मुर्गियां पल रही हैं. मुर्गी पालन के इस कारोबार से वह हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं.

12 मुर्गा-मुर्गियों से शुरू हुआ सफर
विशेष बातचीत में किरण देवी ने बताया कि वर्ष 2012 में सपोर्ट नाम की संस्था की ओर से आजीविका के साधन विकसित करने के उद्देश्य से उन्हें चार मुर्गा और आठ मुर्गियां दी गई थीं. उस समय उनके पास कारोबार शुरू करने के लिए संसाधन सीमित थे. लेकिन उन्होंने मिले अवसर का सही इस्तेमाल करने का फैसला किया. उन्होंने मुर्गा-मुर्गियों की बेहतर देखभाल की और उनके प्रजनन से धीरे-धीरे संख्या बढ़ानी शुरू की. उचित प्रबंधन और लगातार मेहनत के बल पर उनका छोटा प्रयास एक बड़े कारोबार में बदल गया. आज उनके पोल्ट्री फार्म में लगभग 1000 मुर्गा-मुर्गियां हैं. इन 14 वर्षों के दौरान वह कई हजार मुर्गा-मुर्गियों की बिक्री कर चुकी हैं. इससे अच्छी आमदनी प्राप्त की है.

देसी और सोनाली मुर्गियों का कर रहीं पालन
किरण देवी अपने पोल्ट्री फार्म में दो तरह की मुर्गियों का पालन कर रही हैं. इनमें देसी मुर्गियां और सोनाली नस्ल की मुर्गियां शामिल हैं. दोनों के पालन का उद्देश्य अलग-अलग है, जिससे उन्हें आमदनी के अलग-अलग स्रोत मिलते हैं. उन्होंने बताया कि देसी मुर्गियों के अंडों से नए चूजे तैयार किए जाते हैं. इसके बाद चूजों को बड़ा करके उनकी बिक्री की जाती है. वहीं सोनाली नस्ल की मुर्गियों को मुख्य रूप से अंडा उत्पादन के लिए रखा गया है. इसके अलावा मुर्गों की बिक्री से भी कमाई होती है.

सुबह-शाम कुछ घंटे देकर संभालती हैं फार्म
किरण देवी ग्रामीण परिवेश में रहते हुए घर और खेती से जुड़े कार्यों के साथ अपने पोल्ट्री फार्म का संचालन भी करती हैं. उन्होंने बताया कि सुबह और शाम मुर्गा-मुर्गियों को दाना पानी देने तथा उनकी देखभाल करने का काम करती हैं. इसके बाद वह घर के अन्य कार्यों में व्यस्त हो जाती हैं. मुर्गी पालन में नियमित देखभाल और उचित प्रबंधन जरूरी है. समय पर दाना पानी देना, उनकी स्थिति पर नजर रखना और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने बताया कि उचित देखभाल मिलने पर मुर्गी के चूजे लगभग 90 दिनों में बड़े हो जाते हैं.

हर महीने 15 हजार रुपये की आमदनी
किरण देवी ने बताया कि मुर्गी पालन से उन्हें हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है. इस कमाई से वह अपने जरूरत के सामान खरीदने के साथ बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों में भी सहयोग करती हैं. ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के लिए घर की जिम्मेदारियों के साथ रोजगार करना आसान नहीं होता. इसके बावजूद किरण देवी ने सीमित संसाधनों से शुरुआत करके अपने लिए आमदनी का एक स्थायी माध्यम विकसित करने का प्रयास किया है. उनके कारोबार ने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद की है.



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